
Sunderkand Path- जानिए सूंदर कांड पढ़ने के नियम और लाभ (फोटो सोर्स- chatgpt)
Sunderkand Path: हिंदू धर्म की पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता अंजनी ने भगवान हनुमान को 'सुंदर' नाम दिया था। ऐसा इसलिए क्योंकि हनुमानजी उनके द्वारा की गई भगवान शिव की कृपा और तपस्या का सबसे सुंदर फल थे। यही कारण है कि गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित 'रामचरितमानस' के पांचवें कांड का नाम 'सुंदर कांड' रखा गया है। यह कांड हनुमानजी को ही समर्पित है जिसमें 68 खंड है। ज्योतिषों की माने सुंदर कांड को पढ़ने के लिए सप्ताह के दो दिन-मंगलवार और शनिवार शुभ माना गया है। पर क्या आप सुंदर कांड पढ़ने के नियम और इसके लाभ जानते है? चलिए आपको बताते है।
हनुमानजी की पूजा सभी मनोकामनाओं को पूूर्ण करने वाली मानी गई है। बजरंगबली बहुत जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता माने जाते हैं। शास्त्रों में इनकी कृपा पाने के कई उपाय बताए गए हैं। इन्हीं उपायों में से एक उपाय सुंदरकांड का पाठ करना है। सुंदरकांड के पाठ से हनुमानजी के साथ ही श्रीराम की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है।
ज्योतिषों का मानना है कि अवसरों पर गोस्वामी तुलसीदासजी द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड का पाठ किया जाता है। शुभ कार्यों की शुरूआत से पहले सुंदरकांड का पाठ करने का विशेष महत्व माना गया है। किसी व्यक्ति के जीवन में ज्यादा कष्ट हो, कोई काम नहीं बन पा रहा है, आत्मविश्वास की कमी हो या कोई और समस्या हो, सुंदरकांड के पाठ से शुभ फल प्राप्त होने लग जाते हैं, कई ज्योतिषी या संत भी विपरित परिस्थितियों में सुंदरकांड करने की सलाह देते हैं।
Updated on:
16 Jul 2026, 1:05 PM IST
Published on:
16 Jul 2026, 1:05 PM IST
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