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Gupt Navratri 2026: कैसे निर्धारित होता है मां दुर्गा के आगमन का वाहन? ज्योतिषाचार्य से जानिए

Gupt Navratri 2026: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में इस माता रानी के आगमन का वाहन भी चर्चा में है। शास्त्रों के अनुसार इसका सीधा संबंध वर्षा, समृद्धि और सुख-शांति से माना जाता है।
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भारत

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Akash Dewani

Jul 14, 2026

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Gupt Navratri 2026: ज्योतिषाचार्य से जानिए कैसे निर्धारित होता है माता के आगमन का वाहन (Photo Source- Chatgpt)

Gupt Navratri Mahavidyas Puja: सनातन धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व होता है। नवरात्रि के दिनों में देवी मां के नव स्वरूपों की पूजा आराधना की जाती है। साल में चार बार नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है जिसमें एक चैत्र नवरात्रि दूसरा शारदीय नवरात्रि और दो गुप्त नवरात्रि। तंत्र मंत्र की साधना में लीन रहने वाले लोगों के लिए गुप्त नवरात्रि (Gupt Navratri 2026) बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई से आरंभ होकर 22 जुलाई को समाप्त होंगे लेकिन चतुर्थी तिथि का क्षय और नवमी तिथि की वृद्धि होने से गुप्त नवरात्रि का उत्थापन और व्रत पारण 23 जुलाई को होगा। ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा से जाने गुप्त नवरात्रि का महत्व, 10 महाविद्याओं की पूजा और देवी के वाहन का महत्व के साथ व्रत रखने की तिथि की पूरी जानकारी।

नौका में सवार होकर आएंगी माता

जब भी नवरात्रि बुधवार से प्रारंभ होती है तो मां नौका में सवार होकर आती हैं। देवी भागवत पुराण के अनुसार, यह वाहन अच्छी वर्षा, समृद्धि और कृषि में उन्नति का प्रतीक है। माता रानी के भक्त गुप्त नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं। इस दिन श्रद्धालु निराहार या फलादार रहकर मां दुर्गा की अराधना करते हैं। प्रतिपदा तिथि में घर व मंदिर में कलश स्थापना की जाएगी।

10 महाविद्याओं की होती है पूजा

इन नवरात्रों में 10 महाविद्याओं की पूजा करने का विशेष विधान शास्त्रों में बताया गया है। इस दौरान तंत्र विद्या का विशेष महत्व है। गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की पूजा-अर्चना की जाती है। गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां धुम्रावती, मां बंगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा की जाती है।

किस समय करनी चाहिए पूजा?

इस समय की गई साधना जन्मकुंडली के समस्त दोषों को दूर करने वाली तथा चारों पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और कोक्ष को देने वाली होती है। इसका सबसे महत्वपूर्ण समय मध्य रात्रि से सूर्योदय तक अधिक प्रभावशाली बताया गया है। आषाढ़ माह में पड़ने वाली नवरात्रि को भी गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। इस दौरान प्रतिपदा से लेकर नवमी तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। गुप्त नवरात्रि में साधक महाविद्याओं के लिए खास साधना करते हैं।

देवी मां दुर्गा के वाहन

वैसे तो मां दुर्गा का वाहन सिंह को माना जाता है। लेकिन हर साल नवरात्रि के समय तिथि के अनुसार माता अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर धरती पर आती हैं। यानी माता सिंह की बजाय दूसरी सवारी पर सवार होकर भी पृथ्वी पर आती हैं। माता दुर्गा आती भी वाहन से हैं और जाती भी वाहन से हैं।

मां दुर्गा के सातों दिन होते है अलग वाहन

"शशि सूर्य गजरुढा शनिभौमै तुरंगमे। गुरौशुक्रेच दोलायां बुधे नौकाप्रकीर्तिता॥"

देवीभागवत पुराण के उल्लेखित इस श्लोक के अनुसार, सप्ताह के सातों दिनों के अनुसार देवी के आगमन का अलग-अलग वाहन बताया गया है। अगर नवरात्रि का आरंभ सोमवार या रविवार को हो तो इसका मतलब है कि माता हाथी पर आएंगी। शनिवार और मंगलवार को माता अश्व यानी घोड़े पर सवार होकर आती हैं।

गुरुवार या शुक्रवार को नवरात्रि का आरंभ हो रहा हो तब माता डोली या पालकी पर आती हैं। बुधवार के दिन नवरात्रि पूजा आरंभ होने पर माता नाव पर आरुढ़ होकर आती हैं। नवरात्रि का विशेष नक्षत्रों और योगों के साथ आना मनुष्य जीवन पर खास प्रभाव डालता है। ठीक इसी प्रकार कलश स्थापन के दिन देवी किस वाहन पर विराजित होकर पृथ्वी लोक की तरफ आ रही हैं इसका भी मानव जीवन पर विशेष असर होता है।

मां दुर्गा का नौका पर सवार होकर आने का क्या है महत्व?

नवरात्रि में माता दुर्गा के वाहन का विशेष महत्व होता है। बुधवार से शुरुआत होने पर माता नौका पर सवार होकर आती हैं। नवरात्र जिस दिन से शुरू होती है, उसी के आधार पर माता के वाहन का निर्धारण होता है। बुधवार से शुरुआत होने पर माता नौका पर सवार होकर आती हैं। देवी भागवत पुराण के अनुसार, यह वाहन अच्छी वर्षा, समृद्धि और कृषि में उन्नति का प्रतीक है। मान्यता है कि माता का नौका पर आगमन भक्तों के कष्ट दूर करने के साथ खुशहाली का संदेश देता है। मां जगदंबे का नौका यानी नाव पर आगमन शुभ माना जाता है।

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