
Gupt Navratri 2026-साधना-सिद्धि के लिए बनेंगे दुर्लभ संयोग (फोटो सोर्स- Chatgpt)
Gupt Navratri 2026 Date- पंचांग के अनुसार 15 जुलाई से आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा के साथ गुप्त नवरात्र का शुभारंभ होगा। इस बार शुरुआत बुधवार, पुष्य नक्षत्र, हर्षल योग के बाद व्रज योग, बव करण और कर्क राशि के चंद्रमा की साक्षी में होगी। प्रतिपदा पर गुरु-चंद्र के गजकेसरी योग का प्रभाव भी रहने से यह संयोग साधना, उपासना और शुभकार्यों के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है।
ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला ने बताया श्रीमद् देवी भागवत महापुराण के अनुसार वर्ष में चार नवरात्र भाते है जिनको भाषा और माघ के नवरात्र गुप्त तथा चैत्र और अश्विन के नवरात्र प्रकट माने गए है। गुप्त नवरात्र विशेष रूप से साधना, तंत्र, मंत्र, उपासना और विशिष्ट संकलो की शिटि के लिए माने जाते है। इस बार नवरात्र के दौरान सूर्य का राशि परिवर्तन भी होगा, जिसे तांत्रिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व दिया गया है।
शाक्त परंपरा में गुप्त नवरात्र का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस काल में पंचमहाभूतों और प्रकृति में सकारात्मक परिवर्तन होता है। प्राण तत्व की वृद्धि और प्राकृतिक संतुलन साधकों को साधना में सफलता प्रदान करने वाला माना गया है। गुरु के मार्गदर्शन में किए गए अनुष्ठान विशेष फलागी बता गए हैं।
गुप्त नवरात्र के दौरान दो सर्वार्थ सिद्धि योग और तीन रवि योग का संयोग बनेगा। शास्त्रों के अनुसार इन योगों में नए कार्यों की शुरुआत, बैंकिंग, टेक्नोलॉजी, व्यवसाय, कार्यालय परिवर्तन, करियर और विकास से जुड़े कार्य करना शुभ माना गया है। साधकों के लिए भी ये योग सिद्धि प्रदान करने वाले माने जाते हैं।
16 जुलाई की रात्रि में सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। कर्क राशि के स्वामी चंद्रमा हैं। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस परिवर्तन से वर्षा ऋतु सक्रिय होगी और दक्षिण-पश्चिम मानसून का प्रभाव बढ़ने से अच्छी वर्षा के संकेत मिलेंगे।
21 जुलाई, मंगलवार को गुप्त नवरात्र की दुर्गा अष्टमी रहेगी। जिन परिवारों में अष्टमी पूजन की परंपरा है, वे इस दिन विशेष पूजा-अर्चना करेंगे। साधकों के लिए भी यह दिन अनुष्ठानों की पूर्णाहुति का महत्वपूर्ण अवसर माना गया है।
22 जुलाई, बुधवार को भड्डाली नवमी के साथ गुप्त नवरात्र का समापन होगा। यह नवमी अबूझ मुहूर्त की श्रेणी में मानी जाती है, इसलिए इस दिन कई शुभ कार्य किए जा सकते हैं। हालांकि, गुरु तारा अस्त होने के कारण विवाह जैसे मांगलिक कार्य वर्जित रहेंगे।
Updated on:
08 Jul 2026 10:26 am
Published on:
08 Jul 2026 10:25 am
