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क्या आप जानते है बिना प्रहलाद वाले नरसिंह अवतार की कहानी? जानिए क्या लिखा है ब्रह्माण्ड पुराण में

Narasimha Avatar Story- अगर आपको लगता है कि नरसिंह अवतार की पूरी कहानी आप जानते हैं, तो ब्रह्माण्ड पुराण का यह संस्करण आपकी सोच बदल सकता है।
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भारत

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Akash Dewani

Jul 07, 2026

narasimha avatar story without prahlada brahmanda purana

Narasimha Avatar Story- क्या आप जानते है बिना प्रहलाद वाले नरसिंह अवतार की कहानी? (फोटो सोर्स- Chatgpt AI Generated)

Brahmanda Purana Narasimha Avatar Story: हम सभी से भगवान विष्णु के दशावतार के बारे में बचपन से सुनते आ रहे है। विष्णुजी के दस अवतारों में से सबसे रौद्र, चौथे अवतार यानी नरसिंह अवतार को माना जाता है जो, आधा मनुष्य और आधा शेर होता है। भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार अपने परम भक्त प्रहलाद को उसके पिता और दुष्ट राक्षस राजा हिरण्कश्ययप से बचाने के लिए लिया था। लेकिन अब अगर आपको बताया जाए कि विष्णु के इस अवतार की एक भी कथा है जिसमें प्रहलाद है ही नहीं? ये कथा ब्रह्माण्ड पुराण में मिलती है। यही नहीं, अगर अन्य पुराणों को देखें तो हमें कई अलग-अलग संस्करण मिलते हैं जिनमें प्रहलाद बच्चा नहीं बल्कि वयस्क है और वह हिरणकश्यप से खुद लड़ता है। हालांकि, ब्रह्माण्ड पुराण की कथा ही एक मात्र ऐसी कथा है जहां प्रहलाद का उल्लेख नहीं मिलता है।

हिरणकश्यप के जन्म शुरू होती है कहानी, ब्रह्मा ने दिया वरदान

ब्रह्माण्ड पुराण के अनुसार, ऋषि कश्यप और दिति को अश्वमेध यज्ञ के अतिरात्र भाग के सोम योग में एक बेटे की प्राप्ति हुई। पैदा होते ही वह ऋषियों के लिए बनाए सोने से बने आसान में जा बैठा जिसे देख ऋषियों ने उसका नाम हिरणकश्यप रखा। वह हिरण्याक्ष और राहु की मां सिंहिका का बड़ा भाई था। हिरणकश्यप ने लाखों साल तक तप किया जिससे खुश होकर ब्रह्मा ने उसे सभी प्राणियों से अमरता, देवताओं, मनुष्यों, राक्षसों और अर्ध-देवताओं पर सर्वोच्चता, और दिन या रात में, गीले या सूखे मौसम में भी अछूत होने का वरदान दिया। ब्रह्मा के वरदान ने हिरणकश्यप को इतना ताकतवर बना दिया था कि उसकी शक्तियां भगवानों से भी ऊपर हो गई।

हिरणकश्यप और नरसिंह अवतार की विषेशताओं में बदलाव

ब्रह्माण्ड पुराण के संस्करण में ब्रहमा से वरदान मिलने के बाद अत्याचारी नहीं बनता बल्कि उसने सनातन धर्म की जितनी भी दिव्य भूमिकाएं थी वो अपने आधीन कर ली थी या वह उसका एकलौटा स्वामी बन गया था। यह ऋत के नियमों यानी ब्रह्मांडीय व्यवस्था के खिलाफ था। इस पुराण में नरसिंह अवतार की विशेषताओं में भी बदलाव देखने को मिलते है। बाकी संस्करणों में जहां नरिसंह को आधा मानव-आधा शेर बताया गया है, वहीं ब्रह्माण्ड पुराण में इस अवतार को मनुष्य में शेर के जैसा बताया गया है। ये नरसिंह अवतार अन्य के मुकाबले अधिक ताकतवर होता है।

इस कारण होता है नरसिंह और हिरणकश्यप में युद्ध

ब्रह्माण्ड पुराण में बताया गया है कि ब्रह्मा से वरदान मिलने के बाद हिरण्कश्ययप ऋतचक्र का अकेला स्वामी बन गया था। यहां तक कि वह बलि प्रथा में देवताओं के भी हिस्से को हड़प चुका था जिससे बलि की प्रथा और ब्रह्मांडीय व्यवस्था खतरे में पड़ जाती। इसी को देखते हुए सभी देवता भगवान विष्णु से प्रार्थना करते है। इसके बाद भगवान विष्णु नरसिंह अवतार लेते है और हिरणकश्यप का वध कर देते हैं।