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भारत से बाहर बदली गई रामायण! कहीं सीता बनीं रावण की बेटी, कहीं जिंदा बच गया रावण

Ramayana Versions- दुनिया के कई देशों ने अपनी-अपनी रामायण लिखी, लेकिन कहीं सीता बनीं रावण की बेटी, कहीं हनुमान के बताए गए पुत्र, तो कहीं अंत ही बदल दिया गया। आखिर क्यों?
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भारत

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Akash Dewani

Jul 05, 2026

different ramayana versions in south east asian countries

Versions of Ramayana- साउथ ईस्ट एशिया में रामायण के विभिन्न संस्करण (फोटो सोर्स- ChatGpt)

Different Ramayana Versions- ऋषि वाल्मीकि द्वारा लिखित रामायण भारत का एक ऐसा महाकाव्य है, जिसकी घटनाएं, कहानी, पात्र आदि मनुष्यों को जीवन जीने का असल सार समझाते हैं। रामायण महाकाव्य मनुष्यों को बताता है कि कैसे बुराई चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो वह अच्छाई के सामने हार ही जाती है। महाकाव्य रामायण को पढ़कर भगवान श्रीराम के व्यक्तित्व का पता लगता है कि कैसे भगवान विष्णु के अवतार होने तथा अयोध्या के राजकुमार एवं राजा रहते हुए भी उन्होंने अपना जीवन सत्य और सादगी के नाम कर दिया था। रामायण का हर पात्र, चाहे वह देवता हो, मनुष्य हो या पशु, सभी से इंसान कुछ न कुछ सीख सकता है। तो ऐसे में जब एक ऐसी गाथा धर्म से परे हो वो सिर्फ एक देश तक सीमित कैसे हो सकती है?

बता दें कि ऋषि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण महाकाव्य दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों में एक अलग ही संस्करण है। कुछ देशों ने अपनी नई रामायण लिखी, कुछ ने पात्रों और जगहों के नाम बदले तो कुछ ने तो पूरी कहानी ही बदलकर रख दी। ऋषि वाल्मीकि की रामायण को नींव मानकर अन्य देशों ने इसके अपने-अपने संस्करण लिखे। गौर करने वाली बात यह है कि इनमें से बहुत से ऐसे भी संस्करण है जिसमे इस्लाम का प्रभाव भी दिखता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इनमें कुछ ऐसे देश भी है जहां बाद में जाकर इस्लामिक राजाओं ने शासन किया और उस विशिष्ट देश की संस्कृति और साहित्य में बहुत सी तब्दीलियां आई।

द रामाकियन- थाईलैंड

सबसे पहले बात करते हैं थाईलैंड की रामायण, जिसका नाम- ‘द रामाकियन’ (The Ramakien) है। इस रामायण को थाईलैंड के समाज के अनुरूप लिखा गया है। किरदारों के नामों में थाईलैंड संस्कृति के अनुरूप परिवर्तन हुआ है। जैसे भगवान राम को बताया गया है- फ्रा राम, लक्ष्मण को फ्रा लक, तो रावण को थोटसाकन। बात करें इसकी घटनाओं की तो इसमें मां सीता को रावण की बेटी और भगवान हनुमान को ब्रह्मचारी नहीं बताया गया है। इसी प्रकार रावण की मृत्यु की कहानी में भी काफी बदलाव हुए हैं। इसमें रावण की नाभि में अमृत नहीं बताया गया, बल्कि यह बताया गया है कि रावण अपना हृदय किसी संरक्षक को देता है और हनुमान किसी तरह इस हृदय को खोजकर लाते हैं और चीर देते हैं, जिससे रावण की मृत्यु होती है।

हिकायत सेरी रामा- मलेशिया

इसी प्रकार रामायण का एक संस्करण मलेशिया ने भी निकाला है, जिसका नाम 'हिकायत सेरी रामा' (Hikayat Seri Rama) है। मलेशिया एक इस्लामिक देश है इसलिए यहां जिस तरह के बदलावों के साथ रामायण प्रस्तुत की गई है जो विवादित भी मानी जाती है। उदाहरण के लिए इस रामायण में कई जगहों पर 'अल्लाह' को एकमात्र देवता बताया गया है और दशरथ को पैगंबर नबी का महान पुत्र। वहीं मंदोदरी की शादी रावण के अलावा दशरथ से भी दिखाई गई। इसमें माता सीता को नहीं बल्कि मंदोदरी को लक्ष्मी का अवतार बताया गया है। इतना ही नहीं, इस रामायण में भगवान राम और सीता को अप्रत्यक्ष रूप से भाई बहन बताया गया है और भगवान हनुमान को उनका पुत्र।

रीमकर- कंबोडिया

रामायण का अगला संस्करण आता है कंबोडिया से। यहां रामायण को 'रीमकर' (Reamkar) कहते हैं। यह ऋषि वाल्मीकि की रामायण से सबसे करीब भी मानी जाती है। हालांकि इस रामायण में भगवान हनुमान के व्यक्तित्व में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलता हैं। इस रामायण में उन्हें बाल ब्रह्मचारी नहीं दिखाया गया है। उन्हें रावण की बेटी 'सुवन्नमच्छ' जो एक जलपरी के सामान दिखाई दी गई है। उससे प्यार हो जाता है। उनका एक पुत्र मुदचुन भी बताया गया है।

महाराडिया लवाना- फिलिपिंस

फिलिपिंस की रामायण को 'महाराडिया लवाना' (Maharadia Lawana) कहा जाता है। यह भी एक बहुत विवादित रामायण संस्करण है। इसकी कहानी और पात्रों में बदलाव की वजह इस्लामिक शासन को बताया गया है। यह रामायण भगवान राम पर कम और रावण पर ज्यादा केंद्रित है। इस रामायण में रावण को इस्लामिक राजा बताया गाया है। रामायण के अंत में रावण की मृत्यु ही नहीं होती है। वहीं इसमें मारीच और विभीषण जैसे आवश्यक किरदार भी नहीं है। इस वाली रामायण के लक्ष्मण में वाल्मीकि रामायण के लक्ष्मण वाले एक भी गुण नहीं है।

फ्रा लक फ्रा राम - लाओस

लाओसा देश की रामायण को 'फ्रा लक फ्रा राम' (Phra Lak Phra Ram) के नाम से जाना जाता है। यह ऋषि वाल्मीकि की रामायण से काफी अलग है। इसमें पात्रों के नामों में बदलाव के अलावा रावण को श्रीराम का चचेरा भाई बता दिया गया है। वहीं श्रीराम को गौतम बुद्ध के पिछले जन्म का अवतार बताया गया है। इस रामायण में माता सीता लक्ष्मी का नहीं बल्कि इंद्र की पत्नी इंद्राणी का अवतार बताई गई है और अंत में भगवान हनुमान वानर से एक मनुष्य बन जाते हैं।

बोलर टोली- मंगोलिया

मंगोलिया की रामायण को 'बोलर टोली' (Bolar Toli) कहा जाता है। इसमें आपको जैन, बौद्ध, हिंदू और मंगोलियन संस्कृति का अद्भुत मिश्रण देखने को मिल जाएगा। इसमें लक्ष्मण और विभीषण के होने का कोई वर्णन नहीं है। विभीषण का किरदार ना होने के कारण हनुमान जी को रावण की मृत्यु में श्री राम का सहयोग करते दिखाया गया है। मंगोलिया की रामायण में महाकाव्य के अंत को भी पूरी तरह से बदला गया है। इस रामायण में अंत की लड़ाई में सबसे बड़े बदलाव यह है कि, श्रीराम ने 100 दर्पण वाले कमरे में छिपे रावण को ढूंढकर मारा जिसमें भगवान हनुमान ने उनकी मदद की।

म्यांमार– यामा जतदाव

भारत का पड़ोसी देश म्यांमार जिसे पहले बर्मा भी कहा जाता था, वहां 11वीं शताब्दी से ही मौखिक रूप से रामायण बताई जाती रही है। इसके बाद 16वीं शताब्दी के आस-पास लिखित रूप में रामायण को पढ़ा जाने लगा जो कि बर्मी भाषा में था। यहीं से म्यांमार की रामायण का नाम पहली बार सामने आया था जिसका नाम यामा जतदाव (Yama Zatdaw) है। वैसे तो म्यांमार में भी मुस्लिम शासन रहा था लेकिन उसके प्रतिकूल रामायण आधारित नाटक, नृत्य और संगीत राज दरबारों में पेश किया जाता था। यामा जतदाव और वाल्मीकि रामायण में अधिक बदलाव नहीं है। हालांकि, इसमें बौद्ध सांस्कृतिक और साहित्यिक मूल्यों के कुछ अंश स्पष्ट दिखाई देते है।