
Bada Mangal 2026: बड़ा मंगल 2026: राशि अनुसार करें हनुमान पूजा, जानें शुभ उपाय (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)
Bada Mangal 2026: ज्येष्ठ माह का सातवां बड़ा मंगल 16 जून को मनाया जाएगा। इस बार मंगलवार को वृद्धि योग और आर्द्रा नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन हनुमान जी की पूजा, दान और राशिनुसार उपाय करने से जीवन की बाधाएं कम होती हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित मुकेश भारद्वाज के अनुसार, मंगल ग्रह के प्रभाव के कारण कुछ राशियों के लिए यह दिन विशेष फलदायी माना जा रहा है।
कल का दिन आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दोनों ही दृष्टिकोण से बेहद दुर्लभ है। 16 जून (Jyeshtha Bada Mangal 2026) को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है, जो देर रात 12:53 बजे तक रहेगी। इसके साथ ही वृद्धि योग और आर्द्रा नक्षत्र का अद्भुत संयोग बन रहा है। इस दिन ग्रहों के सेनापति मंगल का बड़ा गोचर भी होने जा रहा है, जिससे कई राशियों के भाग्य का बंद ताला खुलने वाला है।
यदि आप अपने घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास चाहते हैं, धार्मिक मान्यता के अनुसार हनुमान जी की पूजा में इन सामग्रियों को अवश्य शामिल करें:
बूंदी और बेसन के लड्डू: महाबली को बूंदी बेहद प्रिय है। कल पूजा के बाद इसे प्रसाद के रूप में बांटने से परिवार में खुशहाली आती है।
गुड़ और भुना चना: यदि आप कर्ज के बोझ से दबे हैं या धन की किल्लत है, तो कल हनुमान जी को गुड़-चने का भोग लगाएं। इससे दरिद्रता दूर होती है।
सिंदूर और चमेली का तेल: कुंडली में यदि 'मंगल दोष' अमंगल कर रहा है, तो कल बजरंगबली को चमेली के तेल में मिला हुआ सिंदूर (चोला) अर्पित करें। इससे साहस और बुद्धि की प्राप्ति होती है।
मीठा पान: अगर आपके बनते हुए काम ऐन वक्त पर बिगड़ जाते हैं, तो प्रभु को एक बीड़ा मीठा पान चढ़ाएं। इससे सफलता के मार्ग खुलेंगे।
कल सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान ध्यान करें। साफ-सुथरे लाल या नारंगी (भगवा) रंग के वस्त्र धारण करें। अपने घर के मंदिर में हनुमान जी की प्रतिमा के सामने घी या चमेली के तेल का दीपक और अगरबत्ती जलाएं। पूजा की शुरुआत में प्रभु श्री राम और माता सीता का स्मरण अवश्य करें, क्योंकि राम नाम के बिना हनुमान जी की पूजा अधूरी मानी जाती है।
इसके बाद लाल फूल, सिंदूर और अपना नैवेद्य (भोग) अर्पित करें। वहीं आसन पर बैठकर पूरी एकाग्रता के साथ हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या सुंदरकांड का पाठ करें। अंत में आरती करके प्रसाद को पूरे परिवार और जरूरतमंदों में बांट दें।
इस बड़े मंगल पर बन रहे ग्रहों के विशेष फेरबदल को देखते हुए हर राशि के जातक को अपनी राशि के अनुसार छोटे-छोटे उपाय जरूर करने चाहिए:
बहुत कम लोग जानते हैं कि बड़े मंगल की शुरुआत उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से हुई थी। नवाब आसिफुद्दौला के शासनकाल में जब उनकी मां (आलिया बेगम) ने अलीगंज के पुराने हनुमान मंदिर का जीर्णोद्धार कराया और वहां ज्येष्ठ के मंगलवार को विशाल भंडारे व मेले की शुरुआत की, तब से यह परंपरा पूरे देश में फैल गई। आज के दौर में यह त्योहार सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल है, जहां हिंदू और मुस्लिम समाज के लोग मिलकर जगह-जगह प्याऊ और छबील (भंडारे) लगाते हैं। कल के दिन किसी भूखे को भोजन कराना साक्षात हनुमान जी की सेवा करने के बराबर माना जाता है।
Published on:
15 Jun 2026 05:12 pm
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