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Gupt Navratri 2026- दो योग और एक नक्षत्र का बन रहा अनूठा संयोग, जाने कलश स्थापना का मुहूर्त

Gupt Navratri 2026-15 जुलाई से गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो रही है। इस बार मां दुर्गा नौका पर सवार होकर आने वाली हैं। कलश स्थापना के लिए दो योग और एक नक्षत्र का अनूठा संयोग बन रहा है।
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भारत

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Akash Dewani

Jul 07, 2026

Gupt Navratri 2026 Kalash Sthapana Muhurat unique combination of two yogas one nakshatra

Gupt Navratri 2026- कलश स्थापना के दिन बन रहा है अनूठा संयोग, जाने कब है मुहूर्त (फोटो सोर्स- Chatgpt)

Gupt Navratri Kalash Sthapana Muhurat- आषाढ़ मास के गुप्त नवरात्र 15 जुलाई से शुरू होने जा रहे हैं। इस बार यह महापर्व बेहद अनूठा और मंगलकारी संयोग लेकर आ रहा है। एक तरफ जहां तिथियों का अनोखा फेरबदल (एक तिथि का क्षय और एक की वृद्धि) जानकारों के बीच कौतूहल का विषय है, वहीं दूसरी ओर जगत जननी मां दुर्गा का 'नौका' (नाव) पर सवार होकर आना संपूर्ण सृष्टि के लिए सुख-समृद्धि के साथ-साथ बरसात के लिए वरदान माना जा रहा है। आषाढ़ मास के गुप्त नवरात्र का समय मां दुर्गा की गुप्त साधना करने, दुर्गा सप्तशती के श्लोको को जगाने और हवन-पूजन से आत्मिक बल प्राप्त करने का है।

माता का यह रूप शांति, उन्नति और मंगलकारी परिणामों का प्रतीक

शास्त्रों में मां दुर्गा के आगमन के वाहनों का विशेष फल बताया गया है। इस आषाढ़ गुप्त नवरात्र में मातारानी नौका जब नौका पर आती हैं, तो वह अपने साथ जन-कल्याण, सुख-शांति और असीम समृद्धि लेकर आती हैं। यह संयोग देश में वर्षा, कृषि और जसलों (नाव) पर सवार होकर आ रही हैं। समाज में चल रहे के लिए बेहद अनुकूल संकेत है। माता का यह रूप शांति, उन्नति और मंगलकारी परिणामों का प्रतीक माना जाता है. जिससे अशांति के बादल छंटेंगे।

तिथियों की अनूठी माया, एक तिथि का क्षय, एक की वृद्धि

शास्त्रों में मां दुर्गा के आगमन के वाहनों का विशेष फल बताया गया है। इस आषाढ़ गुप्त नवरात्र में मातारानी नौका जब नौका पर आती हैं, तो वह अपने साथ जन-कल्याण, सुख-शांति और असीम समृद्धि लेकर आती हैं। यह संयोग देश में वर्षा, कृषि और जसलों (नाव) पर सवार होकर आ रही हैं। समाज में चल रहे के लिए बेहद अनुकूल संकेत है। माता का यह रूप शांति, उन्नति और मंगलकारी परिणामों का प्रतीक माना जाता है. जिससे अशांति के बादल छंटेंगे।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

15 जुलाई को प्रतिपदा तिथि दोपहर 11.51 बजे तक ही रहेगी (जबकि इसका प्रारंभ 14 जुलाई को दोपहर 03.13 बजे से हो जाएगा)। उदयातिथि के मान से घट स्थापना 15 जुलाई को ही होगी। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि अमृत सिद्धि योग के साथ पुष्य नक्षत्र का संयोग भी रहेगा।

घट स्थापना शुभ मुहूर्त (Kalash Sthapana Muhurat) : 15 जुलाई, बुधवार प्रातः 05:33 बजे से 10:09 बजे तक। कलश स्थापना सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि योग के साथ पुष्य नक्षत्र के संयोग में होगी।

मंदिरों में होंगे अनुष्ठान, दश महाविद्या साधना

सामान्य नवरात्र की तुलना में गुप्त नवरात्र में बाहरी उत्सव के बजाय मानसिक जप और रात्रि साधना का महत्व अधिक होता है। इसमें मां दुर्गा के 10 रूपों-काली, तारा, त्रिपुरा सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला (दशमहाविद्या) की आराधना की जाती है। मान्यता है कि जो भी साधक इन नौ दिनों में पूरी निष्ठा से इनकी आराधना करता है, उसके जीवन के बड़े से बड़े संकट, शत्रु बाधा और रोग स्वतः ही नष्ट हो जाते हैं।