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16 जुलाई को सूर्य बदलेंगे अपनी दिशा, कर्क में करेंगे गोचर, जानिए जल चढ़ाने का महत्व

Karka Sankranti 2026- 16 जुलाई को कर्क संक्रांति व दक्षिणायन की शुरुआत होगी। पुराण, ज्योतिष और सेहत यह तीनों इससे जुड़े ऐसे फायदे बताते हैं।
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भारत

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Akash Dewani

Jul 06, 2026

sun transit in cancer on 16 july 2026 karka sankranti benefits significance

Karka Sankranti 2026- 16 जुलाई को सूर्य कर्क राशि में गोचर करेंगे जिसके साथ कर्क संक्रांति की शुरुआत होगी (फोटो सोर्स- Chatgpt)

Karka Sankranti benefits-16 जुलाई को सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करेगा। इस दिन कर्क संक्रांति पर्व मनाया जाएगा। इस पर्व पर तीर्थ-स्नान और दान के साथ उगते हुए सूरज की पूजा करने की भी परंपरा है। पुराणों में कहा गया है कि ऐसा करने से बीमारियां दूर होती है। साथ ही उम्र और सकारात्मक ऊर्जा भी बढ़ती है। सेहत के नजरिये से भी देखा जाए तो सूर्य को जल चढ़ाना फायदेमंद होता है। क्योंकि सूरज की रोशनी में विटामिन डी होता है। जो हमारे शरीर में सीधे पहुंचता है।

सूर्य किस समय कर्क में करेगा गोचर

ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि सूर्य 16 जुलाई को रात्रि 11:38 मिनट पर चंद्रमा की राशि कर्क में गोचर करेंगे। सूर्य इस राशि में 17 अगस्त तक रहेंगे। इसके बाद सूर्य अपनी राशि सिंह में गोचर कर जाएंगे। आषाढ़ महीने में सूर्य उपासना की परंपरा है। इससे आत्मविश्वास बढ़ता है।

पुराणों बताए गए जल चढाने के फायदे

स्कंद और पद्म पुराण में कहा गया है कि इस महीने में सूर्य को जल चढ़ाने से पुण्य मिलता है और पाप भी खत्म हो जाते हैं। वेदों में सूर्य को सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। इसलिए सूर्य उपासना से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

कर्क संक्रांति को ज्योतिष में क्या माना जाता है?

ज्योतिष के अनुसार कर्क संक्रांति को छह महीने के उत्तरायण काल का अंत माना जाता है। इसके साथ ही इस दिन ही दक्षिणायन की शुरुआत होती है। सूर्य की यह स्थिति मकर संक्रांति तक रहती है। सूर्य के गोचर का प्रभाव राजनीति बिजनस और जीवन अन्य क्षेत्रों में देखने को मिलेगा।

क्या है सूर्य गोचर का अर्थ?

सूर्य गोचर का अर्थ है कि सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को जगत की आत्मा कहा गया है। सूर्य के बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते इसलिए सूर्य के गोचर का ज्यादा प्रभाव देखने को मिलता है। सूर्य के गोचर के दौरान किस व्यक्ति को कैसा फल मिलेगा। यह इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति की कुंडली या राशि में सूर्य किस भाव में संचरण कर रहे हैं।

सूर्य को जल चढ़ाना क्यों है फायदेमंद?

सेहत के नजरिये से भी महत्वपूर्ण सूर्य को जल चढ़ाना सेहत के लिए भी फायदेमंद है। सूर्य की किरणें शरीर में मौजूद बैक्टीरिया को दूर कर निरोगी बनाने का काम करती हैं। इससे शरीर स्वस्थ रहता है। इंसान का शरीर पंच तत्वों से बना होता है। इनमें एक तत्व अग्नि भी है। सूर्य को अग्नि का कारक माना गया है। इसलिए सुबह सूर्य को जल चढ़ाने से उसकी किरणें पूरे शरीर पर पड़ती हैं।

सक्रिय हो जाते है कई अंग

इससे हार्ट, स्कीन, आंखें, लिवर और दिमाग जैसे सभी अंग सक्रिय हो जाते हैं। शरीर के ऊर्जा चक्र को सक्रिय करने में मददगार ज्योतिष ग्रंथों में भी सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है। इसलिए सुबह जल्दी उठकर सूर्य देव के दर्शन से मन प्रसन्न होता है। इससे सकारात्मक रहने और अच्छे काम करने की प्रेरणा मिलती है। उगते हुए सूर्य की किरणें हमारे शरीर के ऊर्जा चक्र को सक्रिय करने में भी मदद करती हैं। सू

संक्रांति पर सूर्य को जल चढ़ाने का महत्व

धर्म ग्रंथों के अनुसार संक्रांति पर सूर्य को जल चढ़ाने का महत्व स्कंद और पद्म पुराण के अनुसार सूर्य को देवताओं की श्रेणी में रखा गया है। उन्हें भक्तों को प्रत्यक्ष दर्शन देने वाला भी कहा जाता है। इसलिए आषाढ़ महीने में सूर्यदेव को जल चढ़ाने से विशेष पुण्य मिलता है। आषाढ़ महीने में सूर्य को जल चढ़ाने से सम्मान मिलता है। सफलता और तरक्की के लिए भी सूर्यदेव को जल चढ़ाया जाता है। दुश्मनों पर जीत के लिए भी सूर्य को जल चढ़ाया जाता है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार युद्ध के लिए लंका जाने से पहले भगवान श्रीराम ने भी सूर्य को जल चढ़ाकर पूजा की थी। इससे उन्हें रावण पर जीत हासिल करने में मदद मिली।