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क्या है योगिनी एकादशी व्रत की खास बात, जानें सरल पूजा-विधि स्नान और संकल्प

Yogini Ekadashi Vrat - 10 जुलाई को योगिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से व्यक्ति को 88 हजार ब्राह्मणों के भोजन जितना पुण्य मिलता है।
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भारत

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Akash Dewani

Jul 08, 2026

special thing about Yogini Ekadashi Vrat 2026 Devshayani Ekadashi

Yogini Ekadashi Vrat 2026- 10 जुलाई को रखा जाएगा योगिनी एकादशी व्रत (Photo Source- Chatgpt)

Yogini Ekadashi 2026- सनातन धर्म में साल भर में आने वाली सभी 24 एकादशियो का अपना विशेष महत्व है, लेकिन आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की 'योगिनी एकादशी' (Yogini Ekadashi 2026) को बेहद खास माना गया है। निर्जला एकादशी की कठिन साधना के बाद और देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi) से ठीक पहले आने वाला यह व्रत इस बार 10 जुलाई, शुक्रवार को रखा जाएगा। मान्यता है कि इस एक व्रत को सच्चे मन से करने पर 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

शनिवार दोपहर को होगा पारण

एकादशी के व्रत में पारण के समय का विशेष महत्व होता है। व्रत का पारण अगले दिन 11 जुलाई, शनिवार को दोपहर 01:45 बजे से शाम 04:29 बजे तक किया जा सकेगा। इसी समयावधि में व्रत खोलना शास्त्र सम्मत और फलदायी रहेगा।

यह है सरल पूजा-विधि स्नान और संकल्प

सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें।

अभिषेक व भोग: भगवान नारायण (विष्णु जी) की मूर्ति को गंगाजल या पवित्र जल से स्नान कराएं।

शोडशोपचार पूजन: भगवान को पीले पुष्प, धूप, दीप, और नैवेद्य (भोंग) अर्पित करें।

आरती और क्षमा याचना: विष्णु सहस्रनाम का पाठ या एकादशी की कथा सुनकर आरती उतारें।

क्या मिलता है योगिनी एकादशी व्रत का फल?

धार्मिक ग्रंथों में योगिनी एकादशी को पापों का नाश करने वाली और मोक्षदायिनी एकादशी बताया गया है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर पुण्य मिलता है। यह व्रत जीवन में सुख-समृद्धि, आरोग्य और मानसिक शांति प्रदान करता है तथा मृत्यु के बाद उत्तम लोक की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।

सूर्योदय को स्पर्श नहीं कर रही तिथि, इसलिए हुआ तिथि क्षय

ज्योतिषाचार्य हुकुमचंद-हिमांशु जैन के मुताबिक, इस बार पंचांगीय गणना के अनुसार तिथि का क्षय हो गया है। 10 जुलाई, शुक्रवार को सूर्योदय के बाद यानी सुबह 08:17 बजे एकादशी तिथि प्रारंभ होगी, जो कि अगले दिन यानी 11 जुलाई, शनिवार को सूर्योदय से पहले ही सुबह 05:23 बजे समाप्त हो जाएगी। चूंकि यह तिथि किसी भी सूर्योदय को स्पर्श नहीं कर रही है, इसलिए इसे 'तिथि क्षय माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, ऐसी स्थिति में व्रत 10 जुलाई शुक्रवार को ही रखा जाएगा। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, योगिनी एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के जाने-अनजाने में किए गए सभी पाप मिट जाते हैं। यह व्रत जीवन में सुख-समृद्धि और आरोग्य लेकर आता है तथा मृत्यु के बाद जीव को स्वर्गलोक की प्राप्ति होती है।

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