
Gupt Navratri 2026: जानिए गुप्त नवरात्र के दौरान किन मंदिरों में होती है तंत्र साधना (फोटो सोर्स- Chatgpt)
Tantra Sadhana Shaktipeeths- आषाढ़ गुप्त नवरात्र (Gupt Navratri 2026) 15 जुलाई से शुरू हो रही है। इस दौरान देवी उपासना के साथ तंत्र साधना का भी विशेष महत्व माना जाता है। कई प्राचीन शक्तिपीठों में विशेष पूजा, अनुष्ठान और रात्रिकालीन आराधना होती है, जहां श्रद्धालुओं के साथ बड़ी संख्या में साधक भी पहुंचते हैं। मध्य प्रदेश की संस्कारधानी यानी जबलपुर शहर में शक्ति उपासना और तंत्र साधना की परम्परा सदियों पुरानी रही है।
भेड़ाघाट का चौसठ योगिनी मंदिर (गोलकी मठ), शास्त्री नगर स्थित भैरव मंदिर (बाजनामठ), मिलौनीगंज की बड़ी खेरमाई और चारखंभा स्थित बूढ़ी खेरमाई मंदिर तंत्र साधना के प्रमुख केंद्र माने जाते रहे हैं। गुप्त नवरात्र के दौरान इन मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और साधक शक्ति आराधना के लिए पहुंचते हैं।
आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्र 15 जुलाई को शुभ मुहूर्त में घटस्थापना के साथ प्रारंभ होगी। शहर के प्रमुख शक्तिपीठों में देवी का विशेष श्रृंगार किया जाएगा और दस दिनों तक पूजन, अनुष्ठान तथा विशेष आराधना होगी। रात्रिकाल में बाजनामठ, चौसठ योगिनी मंदिर व बूढ़ी खेरमाई मंदिर में तंत्र साधक और भक्तजन पूजन करेंगे।
शास्त्री नगर स्थित लगभग 500 वर्ष पुराने भैरवनाथ मंदिर बाजनामठ को देश के प्रमुख तांत्रिक मंदिरों में गिना जाता है। मंदिर की स्थापत्य शैली भी अत्यंत विशिष्ट है। पुजारियों के अनुसार इस प्रकार के मंदिर देश में केवल तीन स्थानों पर हैं। एक बाजनामठ, दूसरा काशी और तीसरा महोबा में। इतिहासकार डॉ. राणा के अनुसार चौसठ योगिनी मंदिर में तंत्र विद्या प्राप्त करने वाले साधक यहां भैरव साधना के लिए आते थे। गुप्त नवरात्र में यहां शक्ति और भैरव उपासकों की विशेष भीड़ रहती है। गुप्त नवरात्र में रात के समय साधाक माता की साधना भी करते हैं।
भानतलैया स्थित ऐतिहासिक बड़ी खेरमाई मंदिर कलचुरीकालीन शक्तिपीठ है, जिसकी महिमा का उल्लेख देवी पुराण में भी मिलता है। यह मंदिर शहर ही नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की भी गहरी आस्था का केंद्र है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि मुख्य गर्भगृह में आदिशक्ति के साथ बार्थी ओर भगवान हनुमान और दार्टी ओर भैरव बाबा विराजमान हैं। मंदिर ट्रस्ट से जुड़े लोगों का दावा है कि देश ऐसा अन्यत्र कहीं देखने को नहीं मिलता। सामान्य नवरात्र की तरह गुप्त नवरात्र में भी यहां विशेष पूजा-अर्चना के साथ साधना होगी।
चारखंभा स्थित प्राचीन बूढ़ी खेरमाई मंदिर में स्थापित लगभग 1500 वर्ष पुरानी मां धूमावती की प्रतिमा शहर की सबसे प्राचीन देवी प्रतिमा है। धूमावती देवी को दस महाविद्याओं में सातवीं महाविद्या माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार गोंड शासक राजा संग्रामशाह गुप्त नवरात्र में यहां मां धूमावती की विशेष साधना करते थे। मंदिर के पुजारी सौरभ दुबे ने बताया कि गुप्त नवरात्र के दौरान यहां दर्शन और पूजन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे।
इतिहासकार डॉ. आनंद सिंह राणा के अनुसार भेड़ाघाट स्थित चौसठ योगिनी मंदिर का निर्माण 10वीं शताब्दी में कलचुरी शासक युवराजदेव प्रथम ने कराया था। बाद में 12वीं शताब्दी में गुजरात की रानी गोसलदेवी ने यहां गौरी-शंकर मंदिर का निर्माण कराया। उन्होंने बताया कि गोलाकार संरचना के कारण यह मंदिर गोलकी मठ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। यह तंत्र विज्ञान, ज्योतिष, गणित, संस्कृत साहित्य, पंचांग निर्माण और आयुर्वेद शिक्षा का प्रमुख केंद्र था, जहां देश-विदेश से विद्यार्थी अध्ययन के लिए आते थे। 10वीं शताब्दी में यहां ग्रह और नक्षत्रों की गणना के साथ आयुर्वेद की शिक्षा भी दी जाती थी। मंदिर के पुजारी के अनुसार अब यहां तंत्र साधना नहीं होती, लेकिन गुप्त नवरात्र में साधक साधना प्रारंभ करने से पहले रात्रि में पूजा-अर्चना करने आते हैं।
Updated on:
14 Jul 2026 11:23 am
Published on:
14 Jul 2026 11:23 am
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