
Sawan Rudrabhishek Vidhi : ज्योतिषाचार्य से जानिए सावन में रुद्राभिषेक क्यों माना जाता है खास? (फोटो सोर्स- Patrika)
Sawan 2026 Rudrabhishek Vidhi : भगवान शिव की आराधना के पवित्र श्रावण मास (Sawan 2026) की शुरुआत 30 जुलाई से होगी। श्रावण सोमवार पर महादेव की विशेष पूजा-अर्चना होगी। सावन महीने का समापन 28 अगस्त को होगा पर, कई शिवालयों में 29 जुलाई की शाम से ही रुद्राभिषेक शुरू हो जाएंगे। शास्त्रीय दृष्टि से रुद्राभिषेक भगवान शिव को प्रसन्न करने का सर्वोत्तम वैदिक अनुष्ठान है। चलिए ज्योतिषाचार्य जगदीश शर्मा से जानते है क्या है रुद्राभिषेक करने की विधि और इसका महत्व।
ज्योतिषाचार्य के अनुसार रुद्राभिषेक करने से यश, दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य, धन,सुख-समृद्धि, उच्च पद और समस्त मनोकामनाओं की सिद्धि प्राप्त होती है। सावन के महीने में भगवान शिव की आराधना का सर्वश्रेष्ठ एवं अत्यंत पावन अनुष्ठान समय माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इस मास में की गई शिव उपासना से ग्रहदोष, रोग, क्लेश, भय एवं अनेक प्रकार की बाधाओं का शमन होता है। यदि धर में निरंतर तनाव हो, व्यापार में बाधाएं आती हों या मानसिक अशांति बनी रहती हो, तो श्रावण मास में विधिपूर्वक रुद्राभिषेक कराना अत्यंत लाभकारी माना गया है।
रुद्राभिषेक सामर्थ्यानुसार 2, 5, 11, 21 अथवा अधिक योग्य वैदिक ब्राह्मणों द्वारा श्रीरुद्र (नमकम्-चमकम्) के वैदिक मंत्रों के साथ कराया जाता है।अभिषेक में गंगाजल, शुद्ध जल, दूध, घी, गन्नें का रस विभिन्न फलों के रस, मधु आदि का प्रयोग किया जाता है।
मंदिर में रुद्राभिषेक के लिए वेदी की आवश्यकता नहीं होती। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि घर में रुद्राभिषेक करते समय लिंगकाकम्प मण्डल, षोडश मातृका मण्डल, नवग्रह मण्डल आदि का पूजन, देवताओं का आवाहन, जप, हवन एवं अभिषेक करना अत्यंत फलदायी माना गया है।रुद्राभिषेक सदैव योग्य वैदिक विद्वानों के निर्देशन में ही कराना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि शुद्ध मंत्रोंच्चारण एवं विधि-विधान से सम्पन्न अनुष्ठान ही पूर्ण शुभफल प्रदान करता है।
Updated on:
21 Jul 2026, 4:08 PM IST
Published on:
21 Jul 2026, 4:08 PM IST
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