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Ashtanika Parv 2026: क्या है सिद्धचक्र महामंडल विधान? जैन साधिका से जानिए इसका महत्व

Ashtanika Parv 2026- जैन धर्म का पवित्र अष्टान्हिका पर्व शुरू हो चुका है। 29 जुलाई तक चलने वाले इस पर्व में मंदिरों में विशेष अनुष्ठान, विधान और तप के जरिए श्रद्धालु आत्मशुद्धि करेंगे।
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भारत

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Akash Dewani

Jul 22, 2026

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ashtanika parv 2026- जैन साधिका से जानिए क्या है सिद्धचक्र महामंडल विधान? (फोटो सोर्स- Patrika)

Siddhachakra Mahamandal Vidhan- जैन धर्म के प्रमुख पर्वो में से एक अष्टान्हिका पर्व का मंगलवार से शुभारंभ हो गया। इस अवधि में जैन मत को मानने वाले हर दिन मंदिरों में विशेष पूजा, सिद्धचक्र महा मंडल विधान, नंदीश्वर विधान और मंडल पूजा सहित कई प्रकार के अनुष्ठान करते है। अष्टमी से पूर्णिमा तक मनाया जाने वाला यह पर्व इस बार 21 से 29 जुलाई तक चलेगा। भगवान महावीर स्वामी को समर्पित यह उत्सव जैन धर्म के सबसे पुराने पर्वो में से एक है। ये साल में तीन बार कार्तिक, फाल्गुन और आषाढ़ के महीनों में मनाया जाता है। आषाढ़ मास के अष्टान्हिका उत्सव केआरंभ में जैन मंदिरों में अभिषेक, पूजन हुए। जैन साध्वियों ने भी सोमवार को चातुर्मास के लिए जैन मंदिरों में विहार किया।

व्यसन, बुरे विचारों से निजात के लिए तप

मध्य प्रदेश के के जबलपुर जिले में स्थित पिसनहारी मढिया तीर्थ की साधिका ब्रह्मचारिणी बबली दीदी ने बताया कि अष्टान्हिका पर्व में जैन धर्म का पालन करने वाले, ध्यान और आत्मा की शुद्धि के लिए कठिन तप व व्रत आदि करते हैं। इस समय हर प्रकार की बुरी आदतों और बुरे विचारों से अपने को मुक्त करने का प्रयास किया जाता है।

पिसनहारी की मढिया में सिद्धचक्र विधान आरंभ

अष्टान्हिका पर्व के अवसर पर पिसनहारी की मढिया स्थित दिगंबर जैन मंदिर में सिद्धचक्र विधान शुरू हुआ। ब्रह्मचारिणी बबली दीदी ने बताया कि सिद्धों की विशेष आराधना के लिए सिद्धचक्र महामंडल विधान किया जाता है। यह ऐसा अनुष्ठान है, जो हमारे जीवन के समस्त पाप, ताप और संताप नष्ट करता है। सिद्ध शब्द का अर्थ है कृत्य-कृत्य, चक्र का अर्थ है। समूह और मंडल का अर्थ एक प्रकार के वृत्ताकार यंत्र से है। इनको मिलाकर ही सिद्धचक्र बनता है। अष्टान्हिका पर्व के पहले दिन जैन श्रावको ने बड़ी संख्या में मढिया जी स्थित नन्दीश्वर जिनालय में सिद्ध चक्र महामंडल विधान के अंतर्गत ध्वजारोहण, मंडप शुद्धि, स्थापना व पूजन अर्चन किया।

दयोदय सहित अन्य मंदिरों में हुई भक्ति

दयोदय तीर्थ में भी अष्टान्हिका पर्व का शुभारंभ हुआ। यहां भी सिद्ध चक्र महामंडल विधान का आयोजन किया जा रहा है। मंगलवार को बड़ी संख्या में जैन मतावलंबी पूजन अर्चन करने पहुंचे। जैन पंचायत सभा के अध्यक्ष कैलाश जैन कक्का ने बताया कि शहर के लगभग 50 जैन मंदिरों में अष्टान्हिका पर्व का आरम्भहो गया। इन सभी मन्दिरों में सिद्ध चक्र विधान महामंडल के अंतर्गत पूजन हुए। उन्होंने बताया कि जैन साध्वियों ने भी मंगलवार को चातुर्मास के लिए शहर के अलग-अलग जैन मंदिरों में विहार किया। उल्लेखनीय है कि इस बार चातुर्मास में शहर के जैन समाज को साध्वियों का सान्निध्य है।