छतरपुर. देरी रोड पर स्थित 12 एकड़ बंजर भूमि, जो पहले भू माफिया के कब्जे में थी, अब एक फलदार और हरियाली से भरे फ्रूट व ऑर्गेनिक वेजिटेबल फॉरेस्ट के रूप में विकसित हो चुकी है। पार्क में मेथी, मटर, पालक, पत्तागोभी, टमाटर, मिर्च, गाजर, शलजम, मूली और चुकंदर जैसी ऑर्गेनिक सब्जियां उगाई जा रही […]
छतरपुर. देरी रोड पर स्थित 12 एकड़ बंजर भूमि, जो पहले भू माफिया के कब्जे में थी, अब एक फलदार और हरियाली से भरे फ्रूट व ऑर्गेनिक वेजिटेबल फॉरेस्ट के रूप में विकसित हो चुकी है। पार्क में मेथी, मटर, पालक, पत्तागोभी, टमाटर, मिर्च, गाजर, शलजम, मूली और चुकंदर जैसी ऑर्गेनिक सब्जियां उगाई जा रही हैं। साथ ही अमरूद, आम समेत 18 हजार फलदार पेड़ों में फल आने लगे हैं। इस पार्क में लाल मूली हो रही है, जो हिमाचल प्रदेश से बीज लाकर यहां उगाई जा रही है। यह मूली बिना कीटनाशक और रासायनिक खाद के उगाई जाती है, सिर्फ देशी गोबर की खाद का इस्तेमाल किया जाता है।
सुपर फूड है लाल मूली : ये हैं खासियत
शासकीय जमीन का अतिक्रमण हटाकर तैयार किया फ्रूट पार्क
12 एकड़ शासकीय बंजर जमीन पर भू माफिया ने कब्जा किया था और वहां मकान तक बना दिए थे। तात्कालीन कलेक्टर संदीप जीआर ने जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के बाद खनिज विभाग को इस पार्क के निर्माण की जिम्मेदारी दे दी। अमित मिश्रा डिप्टी डायरेक्टर माइनिंग ने बताया कि इस पार्क को एक बेहतरीन पार्क के तौर पर विकसित किया जा रहा है। लोग यहां शांति और हरियाली में सुकून के पल भी बिता सकें।
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सागर में शुरू हुई काले आलू की खेती, कमाया तीन गुना मुनाफा
किसान आकाश चौरसिया सागर के कपूरिया में पिछले चार-पांच साल से काले आलू की खेती करते आ रहे हैं, जिसके चलते वो अपनी लागत से चार गुना मुनाफा कमा रहे हैं। काला आलू वैसे तो दक्षिण अमेरिकी कंद है, लेकिन इसके खास गुणों के कारण पिछले कुछ सालों में भारत में इसकी खेती में काफी इजाफा हुआ है। सामान्य आलू से इसकी कीमत दो और तीन गुना ज्यादा मिलती है। शुगर और हार्ट के मरीजों के लिए भी यह आलू फायदेमंद बताया गया है।