
बीना. रबी सीजन की तैयारी किसानों ने शुरू कर दी है और कृषि विभाग द्वारा भी लक्ष्य निर्धारित किए जा रहे हैं। इस वर्ष दलहनी फसलों की ज्यादा बोवनी कराने का लक्ष्य कृषि विभाग का है, जिससे किसानों को लाभ ज्यादा हो सके।
दरअसल रबी फसल बारिश पर निर्भर करती है, कम बारिश होने पर किसान गेहूं की फसल की बोवनी नहीं करते हैं। क्योंकि सिंचाई करने में परेशानी आती है। इस वर्ष अभी तक कुल 845 एमएम बारिश दर्ज हुई और औसत बारिश के लिए 355 एमएम बारिश की जरूरत है। हालांकि मौसम विभाग द्वारा इस माह में भी बारिश की संभावना जताई जा रही है। कम बारिश होने पर किसान गेहूं की बोवनी कम करते हैं, क्योंकि इस फसल में पानी की जरूरत ज्यादा होती है। बारिश कम होने पर किसान मटर, मसूर, चना, सरसों आदि की बोवनी ज्यादा करने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं, कृषि विभाग ने भी दलहन फसल का रकबा बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।
जानकारी के अनुसार अर्किल मटर की फसल 60 दिन में तैयार हो जाती है और जिन किसानों ने उड़द की बोवनी की थी, वह मटर की बोवनी कर सकते हैं। क्योंकि दिसंबर तक यह फसल तैयार हो जाएगी और फिर किसान जीडब्ल्यू 513 गेहूं की बोवनी कर सकते हैं, जिससे किसानों को लाभ ज्यादा होगा।
कृषि विभाग के अनुसार मसूर की 47-17 वैरायटी की बोवनी कर सकते हैं, इसका उत्पादन 7 क्विंटल एकड़ है और दाम भी अच्छे मिलते हैं। कोटा-4 वैरायटी भी अच्छी है, इसमें उगरा रोग भी नहीं लगता है। वहीं, चना में विक्रांत फुले, जेजी 18, जेजी 36, पूषा मानव, जेजी 14 वैरायटी के बोवनी किसान कर सकते हैं, इसमें भी उगरा रोग नहीं लगता है।
गेहूं में जीडब्ल्यू 3288, जीडब्ल्यू 513, एचआई 1544, जीडब्ल्यू 322, एचडी 3410 की वैरायटी अच्छी बताई जा रही हैं। इनमें एचआई 1544 और एचडी 3410 के लिए एक पानी की जरूरत रहती है।
इस वर्ष दलहनी फसलों का रकबा बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। गेहूं की कम पानी वाली वैरायटी की बोवनी किसान कर सकते हैं। साथ ही उड़द की बोवनी करने वाले किसान 60 दिन में तैयार होने वाली अर्किल मटर की बोवनी करें, जो लाभदायक होगी।
अवधेश राय, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, बीना