Sagar- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ज्ञानवीर विश्वविद्यालय का शुभारंभ किया
Sagar- महान शिक्षाविद् डॉ. हरि सिंह गौर की धरती सागर Sagar को बुधवार को बड़ी सौगातें मिलीं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यहां ज्ञानवीर विश्वविद्यालय का शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने राहतगढ़ और जेसीनगर में श्रमिकों के बच्चों के लिए लाइब्रेरी बनाने की भी घोषणा की। उन्होंने डॉ. हरि सिंह गौर के योगदान को रेखांकित किया। सीएम ने कहा कि डॉ. गौर ने
ने अपनी जमा पूंजी लगाकर बुंदेलखंड के सागर Sagar में शिक्षा का नया सूर्योदय किया। उन्हीं के प्रयासों से बुंदेलखंड को केंद्रीय विश्वविद्यालय की सौगात मिली। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ज्ञानवीर विश्वविद्यालय में मूट कोर्ट का अवलोकन करते हुए छात्र-छात्राओं से बातचीत की। उन्होंने बरी की सब्जी, बिजोरे, कचरिया जैसे बुंदेलखंड के पारंपरिक व्यंजनों का लुत्फ भी उठाया।
सीएम मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार के लिए बुंदेलखंड सर्वोच्च प्राथमिकता का क्षेत्र रहा है। हमारी सरकार ने पिछले दिनों खजुराहो में हुई कैबिनेट बैठक में बुंदेलखंड के विकास के लिए 27 हजार करोड़ रुपए के विशेष पैकेज की मंजूरी दी। इससे क्षेत्र में करोड़ों का निवेश आएगा और बड़ी संख्या में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। प्रदेश में युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि सागर Sagar अब उन चुनिंदा शहरों में शामिल है जहां केंद्रीय विश्वविद्यालय के साथ राजकीय विश्वविद्यालय (स्टेट यूनिवर्सिटी) और मेडिकल कॉलेज की सुविधा भी उपलब्ध है। ज्ञानवीर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति आदित्य सिंह राजपूत ने स्वागत उदबोधन में विश्वविद्यालय के संबंध में जानकारी दी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यहां बुंदेली स्वाद का लुत्फ उठाया। उनकी थाली में बुंदेलखंड के पारंपरिक व्यंजन शामिल थे। इनमें मुख्य रूप से मेथी और चने की भाजी, कड़ी पकौड़ा, दही बड़े, पारंपरिक स्वाद के साथ बिजोरे, कचरिया, बरी की सब्जी और प्रसिद्ध महेरी, खीचला, पापड़, मंगोड़ी और गुजराती नमकीन, चिरौंजी की बर्फी, आम-नींबू का अचार और ताजगी से भरपूर आम का पना शामिल थे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुंदेलखंड के पारंपरिक खान-पान संस्कृति की सराहना करते हुए इसे सेहत के लिए भी उत्तम बताया। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बुंदेलखंड के पारंपरिक मोटे अनाज (Millets) से बने व्यंजनों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ज्वार, बाजरा, मक्का की रोटी न केवल ऊर्जा प्रदान करती है, बल्कि हमारी प्राचीन आहार पद्धति का गौरव भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बुंदेली व्यंजन केवल स्वाद में ही बेमिसाल नहीं हैं, बल्कि यह पाचन की दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी है। ज्वार-बाजरा जैसे मोटे अनाज स्वास्थ्य का आधार हैं।
कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल, रहली विधायक एवं पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव, खुरई विधायक एवं पूर्व मंत्री भूपेन्द्र सिंह, सागर विधायक शैलेन्द्र जैन, नरयावली विधायक प्रदीप लारिया, देवरी विधायक ब्रज बिहारी पटेरिया, बण्डा विधायक वीरेन्द्र सिंह लोधी, बीना विधायक निर्मला सप्रे, जिला पंचायत अध्यक्ष हीरासिंह राजपूत, महापौर नगर निगम सागर संगीता सुशील तिवारी सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सागर प्रवास के दौरान बुंदेली संस्कृति की जीवंत प्रस्तुति ने सभी का ध्यान खींच लिया। स्थानीय बुंदेली कलाकारों एवं पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मनमोहक प्रस्तुति के साथ मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत किया गया। कलाकारों ने राई, बधाई एवं अन्य लोक गीतों की प्रस्तुतियां दीं, जिसमें ढोलक, नगड़िया, बांसुरी, मंजीरा और अन्य पारंपरिक बुंदेली वाद्य यंत्रों की धुनें गूंज उठी। मनमोहक प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलाकारों को गले लगाया और उनकी पीठ थपथपाकर सराहना की।