
बीना. खाद वितरण व्यवस्था में सुधार करने के लिए ई-टोकन व्यवस्था शुरू की गई है, लेकिन यह किसानों के लिए मुसीबत बन गए हैं। सबसे ज्यादा समस्या डीएपी खाद लेने में आ रही है। क्षेत्र के किसानों को डीएपी के ई-टोकन सौ से डेढ़ सौ किलोमीटर दूर के बुक हो रहे हैं, लेकिन विभाग इसमें सुधार नहीं कर पा रहा है।
जानकारी के अनुसार डीएपी खाद की मांग सबसे ज्यादा है और सोमवार को 70 टन खाद बीना के लिए आया था, लेकिन कुछ मिनट में ही टोकन बुक हो गए थे। जब स्थानीय किसानों ने टोकन बुक किए, तो स्टॉक खत्म हो चुका था। डीएपी का स्टॉक तेंदूखेड़ा दमोह और ग्यारसपुर विदिशा में दिखने पर किसानों ने वहां के टोकन बुक कर लिए थे। देहरी के किसान विशाल ठाकुर ने ग्यारसपुर की दुकान का ई-टोकन बुक किया था, जहां खाद तो मिल गया, लेकिन खाद लाने में 1200 रुपए का अलग से खर्च आया। किसान ब्रजेश कुमार रावत ने 7 बोरी डीएपी के लिए ई-टोकन बुक किया, तो वह तेंदूखेड़ा दमोह में हुआ, लेकिन जब संबंधित विक्रेता से खाद के स्टॉक खत्म होने की बात कही। इसी तरह अन्य किसानों ने भी तेंदूखेड़ा के ही टोकन बुक किए थे। इस स्थिति में किसान खाद के लिए यहां से वहां भटक रहे हैं, लेकिन अधिकारी फिर भी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
सिस्टम में नहीं हो पा रहा सुधार
ई-टोकन में सुधार को लेकर विभाग द्वारा कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। सिर्फ जिला या तहसील के टोकन बुकिंग की व्यवस्था नहीं की जा रही है। अभी स्थिति यह बनी है कि बीना का खाद दूसरे जिले या तहसीलों के किसान बुक कर रहे हैं, जिससे स्टॉक खत्म हो जाता है।
अन्य खाद नहीं ले रहे किसान
किसान डीएपी खाद की जगह दूसरा खाद नहीं ले रहे हैं और जनबूझकर डीएपी के लिए दूसरे जिलों के ई-टोकन बुक कर रहे हैं। अन्य जिले ई-टोकन पोर्टल पर इसलिए खुल रहे हैं, क्योंकि दूसरे जिले की सीमा के पास के गांवों के किसानों को सुविधा होती है। किसान डीएपी की जगह अन्य खाद के लिए टोकन बुक करें, जिससे यह स्थिति नहीं बनेगी।
राजेश त्रिपाठी, उप संचालक कृषि, सागर