डाॅ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय में राजभाषा प्रकोष्ठ ने कुलगुरु प्रो. नीलिमा गुप्ता के मार्गदर्शन में हिन्दी पखवाड़ा का आयोजन किया। इसमें भारतीय भाषा प्रकोष्ठ एवं हिंदी क्लब के सौजन्य से आयोजित ‘स्व-रचित रचनापाठ’ कार्यक्रम हुआ।
कुलगुरु के मार्गदर्शन में हिन्दी पखवाड़ा का आयोजन
सागर. डाॅ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय में राजभाषा प्रकोष्ठ ने कुलगुरु प्रो. नीलिमा गुप्ता के मार्गदर्शन में हिन्दी पखवाड़ा का आयोजन किया। इसमें भारतीय भाषा प्रकोष्ठ एवं हिंदी क्लब के सौजन्य से आयोजित ‘स्व-रचित रचनापाठ’ कार्यक्रम हुआ। स्व-रचित रचना पाठ कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. महेन्द्र आर्या, सहायक प्राध्यापक की कविता ‘चालीस पार’ से हुआ। डॉ. अनूपी समैया, सहायक प्राध्यापक ने कविता के माध्यम से विद्यार्थियों की मनोदशा का बखूबी चित्रण किया। डॉ. रामहेत गौतम, सहायक प्राध्यापक ने अपनी कविता ‘सत्यम नाम है मेरा’ में एक बच्चे की पढ़ने की इच्छा को शब्द दिए। विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय के संस्थापक डॉ. गौर के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए गॉड फादर ऑफ सागर एवं ‘भए डॉक्टर गौर दानी’ कविताओं की मनमोहक प्रस्तुति दी। शोधार्थी हिंमाशु तिवारी ने ‘जिंदगी आस करें भी तो क्या करें’ गजल को तरन्नुम में गाकर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। कार्यक्रम में डॉ. विवेक जायसवाल, सहायक प्राध्यापक और डॉ. राकेश सोनी, सहायक प्राध्यापक ने क्रमश: ‘संशय’ और ‘भौंरा’ कविता का पाठ किया। डॉ. उदय श्रीवास्तव, अनुभाग अधिकारी की कविता ’समाधान’ को श्रोताओं ने खूब सराहा। डॉ. हिमांशु यादव, सहायक प्राध्यापक की कविता ‘बेटी और साइकिल’ भी खूब सराही गई। कार्यक्रम में प्रबल पाण्डेय, शशांक सौरभ, अनुराग यादव, दीपेन्द्र लोधी, सिद्धांत शर्मा, हरीश द्विवेदी आदि उपस्थित रहे।