
बीना. लंबे समय से किसान डीएपी खाद आने का इंतजार कर रहे थे और रैक लगने के बाद बिहरना गोदाम में 120 टन खाद आया है। खाद की सूचना मिलने पर मंगलवार रात से ही किसान गोदाम पहुंचने लगे थे और सुबह 4 बजे से कतारें लगना शुरू हो गईं थीं। घंटों लाइन में लगने के बाद किसानों को एक एकड़ के लिए एक बोरी खाद मिल सका। एक बोरी खाद के लिए भी मशक्कत करनी पड़ी और धक्का खाने पड़े। सुबह से रात तक खाद का वितरण जारी रहा।
रबी सीजन के लिए किसान अभी से खाद खरीदने लगे हैं और सबसे ज्यादा जरूरत डीएपी की होती है, लेकिन लंबे समय से खाद बाजार व गोदाम में उपलब्ध नहीं था। गोदाम में 120 टन खाद आने पर किसानों को एक एकड़ पर एक बोरी और अधिकतम पांच बोरी खाद दिया जा रहा है। खाद लेने के लिए किसान रात में ही गोदाम पहुंच गए थे और खाद की पर्ची लेने के लिए सुबह 4 बजे से कतारें लग गईं थीं। पर्ची वितरण के लिए चार काउंटर बनाए गए हैं, लेकिन सैकड़ों की संख्या में पहुंचे किसानों के कारण काउंटर पर धक्का-मुक्की और विवाद की स्थिति बनती रही। धक्का-मुक्की के कारण काउंटर का एक कांच टूट गया, जिसमें कर्मचारी घायल होने से बचे। व्यवस्था बनाने भानगढ़ थाना प्रभारी धर्नेन्द्र यादव सहित करीब 12 पुलिसकर्मी तैनात थे। साथ ही नायब तहसीलदार हेमराज मेहर, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी अवधेश राय, गोदाम प्रभारी नीलम राय आदि उपस्थित थे। पर्ची बनने में देरी होने पर किसान कई बार आक्रोशित हुए और विवाद की स्थिति निर्मित हुई, जिससे पुलिस ने भी बहस हुई। किसानों का कहना था कि कभी भी नेता खाद लेने कतार में नहीं लगते हैं, न ही वह किसानों की समस्या जानने आते हैं, क्योंकि उनके घर पहले ही खाद भेज दिया जाता है। महिलाओं के लिए अलग से काउंटर न होने के कारण उन्हें परेशान होना पड़ा और कई महिलाएं कतार से बाहर आकर खड़ी हो गईं थीं।
गौहर निवासी रामकली बाई सुबह 5 बजे खाद लेने पहुंच गईं थी। जमीन उनके पति के नाम पर है, लेेकिन पति के बीमार होने पर वह खाद लेने गईं थीं। जब पर्ची के लिए उनका नंबर आया, तो किर्रावदा समिति प्रबंधक ने पति को साथ लाने की बता कहते हुए वहां से हटा दिया। महिला का आरोप था कि समिति प्रबंधक ने धक्का मारा है। किसानों ने विरोध किया तो पर्ची बनाना बंद कर दी गईं थीं। इसके बाद आक्रोशित किसान वहां मौजूद नायब तहसीलदार के पास पहुंचे और प्रबंधक पर कार्रवाई की मांग करने लगे। गोदाम प्रभारी ने महिला के दस्तावेज देखकर खाद दिलाने की बात कहकर मामला शांत कराया।
नौगांव के किसान राजाबाबू ठाकुर ने बताया कि रात 2 बजे वह गोदाम पहुंच गए थे, लेकिन दोपहर 1 बजे तक उन्हें पर्ची नहीं मिल पाई थी। क्योंकि काउंटर की संख्या कम है और किसान ज्यादा हैं। इसी प्रकार भानगढ़ निवासी अभिषेक जैन रात से कतार में लगे रहे, लेकिन दोपहर तक उन्हें भी पर्ची नहीं मिल पाई थी। गोदाम में पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं थी।
कतार में लगे किसानों ने आरोप लगाया है कि कर्मचारियों ने फोन पर भी कई लोगों की पर्ची बनाई हैं और ब्लैक में खाद बेचा है। क्योंकि घंटों खड़े होने के बाद भी वह काउंटर तक नहीं पहुंच सके, न ही कतारें कम हुईं। कतार में लगे भूखे-प्यासे कई किसान खाद लिए बिना ही वापस लौट गए।
पर्ची बनाने के लिए चार काउंटर बनाए गए हैं। साथ ही सुबह से ही पर्ची बनना शुरू हो गईं थीं और खाद वितरण किया गया, जो रात तक जारी रहा। अभी आगे भी और डीएपी खाद आना है। किसान व्यवस्था बनाने में सहयोग करें, जिससे खाद वितरण में परेशानी न आए। पानी की समस्या का स्थायी समाधान कराने अधिकारियों ने पीएचई से बात की है। डीएपी की जगह अन्य खाद गोदाम में है, जो किसान ले सकते हैं।
हेमराज मेहर, नायब तहसीलदार