बीना. हडक़ल खाती गांव के पास बीपीसीएल बीना रिफाइनरी प्रबंधन द्वारा रास्ता न दिए जाने का विवाद पिछले कई महीनों से चला आ रहा है। बुधवार की दोपहर भी किसान विरोध करने एकत्रित हुए थे। सूचना मिलने पर मौके पर एसडीएम विजय डेहरिया सहित रिफाइनरी के अधिकारी भी पहुंचे और किसानों से बात कर पंचनामा […]
बीना. हडक़ल खाती गांव के पास बीपीसीएल बीना रिफाइनरी प्रबंधन द्वारा रास्ता न दिए जाने का विवाद पिछले कई महीनों से चला आ रहा है। बुधवार की दोपहर भी किसान विरोध करने एकत्रित हुए थे। सूचना मिलने पर मौके पर एसडीएम विजय डेहरिया सहित रिफाइनरी के अधिकारी भी पहुंचे और किसानों से बात कर पंचनामा तैयार कराया।
किसानों ने बताया कि जिस रास्ते को बीपीसीएल रिफाइनरी बंद करना चाहती है, वहां से कई किसान खेतों को आते-जाते हैं और कई वर्षों से वह इसका उपयोग कर रहे हैं। रिफाइनरी विस्तार का कार्य शुरू होने पर इस जगह पर बीआरसी कंपनी पर फेब्रिकेशन का कार्य किया जा रहा है और इसके चारों ओर फेंसिंग की जा रही है, जिससे रास्ता बंद हो जाएगा। इस संबंध में रिफाइनरी के एचआर अजय शर्मा ने बताया कि सुरक्षा को लेकर फेंसिंग की जा रही है, जिससे कोई हादसा न हो। रास्ता देने बैरिकेङ्क्षडग की जाएगी, लेकिन फेंसिंग तक ही जमीन बीपीसीएल के आधिपत्य में रहेगी। इसको लेकर आगे कोई विवाद नहीं होना चाहिए। भाजपा ग्रामीण मंडल अध्यक्ष संजय ठाकुर ने कहा कि तहसीलदार के समक्ष तीस फीट रास्ता देने की बात रिफाइनरी के अधिकारियों ने कही थी, लेकिन बाद में उन्होंने मना कर दिया। रास्ता न मिलने से किसान कृषि कार्य कैसे करेंगे और नियमानुसार खेतों को जाने का रास्ता बंद नहीं किया जा सकता है। सभी से चर्चा करने के बाद एसडीएम ने उस जमीन के बाजू से रह रहे किसान जीवन पिता हल्कई बंसल के मकान के आगे तक पंद्रह फीट का रास्ता देने के निर्देश दिए हैं और इसके लिए बीपीसीएल के कर्मचारियों ने तत्काल नाप कर बैरिकेडिंग का कार्य शुरू कर दिया था। पंद्रह फीट रास्ता के आगे से किसानों को दस फीट रास्ता देने दिलाने के लिए कहा है, जिससे खेतों तक पहुंचने में किसानों को परेशानी न हो। रास्ते को लेकर हुए निर्णय का मौके पर ही पटवारियों ने पंचनामा तैयार किया। इस अवसर पर थाना प्रभारी नितिन पाल, सरपंच प्रतिनिधि अवधेश तिवारी, अरविंद, बलराम, ऋषि तिवारी सहित अन्य किसान उपस्थित थे।
खंभे हटाने की रखी मांग
बीपीसीएल प्रबंधन ने जो जमीन रास्ता के लिए छोड़ी है, उसपर हाइटेंशन लाइन के खंभे लगे हुए हैं, जिससे रास्ता छोटा हो रहा है। किसानों ने वह खंभे भी शिफ्ट करने की मांग की है, जिससे आसानी से वाहन निकल सके।
तीस फीट रास्ते की थी मांग
किसानों की मांग तीस फीट रास्ते की थी, जिससे ट्रैक्टर-ट्रॉली क्रॉस हो सकें और कटाई के समय हार्वेस्टर निकल सके। इसके बाद भी पंद्रह और दस फीट रास्ता देने पर सहमति बनी।