सागर

जीएसटी तो वसूलते हैं, लेकिन नहीं देते बिल, व्यापारियों ने बताई हकीकत

छोटे दुकानदारों को जीएसटी रजिस्ट्रेशन में छूट लेकिन वस्तुओं के साथ जीएसटी आ रहा जुड़कर

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Oct 05, 2018
GST recovers but does not give bills

सागर. जीएसटी लागू होने के बाद शहर में दुकानदार ग्राहकों से जीएसटी तो वसूल रहे हैं, लेकिन उसका बिल नहीं दे रहे हैं। पत्रिका ने गुरुवार को शहर की विभिन्न दुकानों में जाकर जब बिल मांगा तो उन्होंने बिल देने से इंकार करते हुए जीएसटी में रजिस्ट्रेशन होने से ही मना कर दिया। हालांकि बड़े मॉल या दुकानों में बिल के साथ जीएसटी जुड़ा हुआ बिल दिया जा रहा है। वहीं चुनावी वर्ष में सरकार भी व्यापारियों पर कार्रवाई करने से बच रही है।
सिविल लाइन चौराहे में जब एक किराना दुकान में जाकर 100 रुपए के सामान खरीदने के बदले पक्का बिल मांगा गया तो उसने इंकार कर दिया। हालांकि यह किराना की दुकान छोटी थी। बड़ी दुकान में जाकर बिल मांगा गया तो उसने बिल तो दिया, लेकिन उसमें जीएसटी नहीं जुड़ा था। फुटकर दुकानदार ने बताया कि जीएसटी सीधे सामान में जुड़कर आता है। रेस्टोरेंट में दिए जाने वाले बिलों में जीएसटी जुड़ा रहता है।
6 हजार व्यापारी रजिस्टर्ड:-जीएसटी के बिल के लिए दुकानदार का रजिस्टे्रशन होना जरूरी है। 20 लाख रुपए सालाना टर्न ओवर वाले व्यापारियों को जीएसटी में रजिस्टे्रशन कराना अनिवार्य है। सागर वृत्त में इस समय करीब ६ हजार व्यापारी जीएसटी में रजिस्टर्ड हैं। इन व्यापारियों को अपनी खरीदी, बिक्री का हर माह रिटर्न भरना होता है। जीएसटी में रजिस्टर्ड व्यापारी की दुकान के बोर्ड व बिल बुक में जीएसटी नंबर लिखना जरूरी है। छोटे दुकानदार जीएसटी के नाम पर ग्राहकों से अधिक दर पर सामान तो बेचते हैं, लेकिन कम कीमत के कारण उन्हें बिल नहीं देते हैं, क्योंकि उनका सालाना टर्न ओवर 20 लाख रुपए तक का नहीं होता। वहीं जब वह थोक व्यापारी से माल खरीदते हैं तो उनसे जीएसटी जोड़ कर माल की कीमत ली जाती है।
अब तक केवल एक शिकायत
राज्य सरकार व केंद्र सरकार द्वारा व्यापार पर लिए जाने वाले टैक्स की निगरानी व वसूली के लिए वाणिज्यिक कर विभाग है। जहां दुकानदारों द्वारा बिल न देने या टैक्स चोरी जैसी शिकायत को दर्ज कराया जा सकता है। इस वर्ष वाणिज्यिक कर विभाग में जीएसटी वसूली के बाद बिल न देने की एक शिकायत आई, जिसके बाद मौके पर जाकर जांच की गई तो उस व्यापारी का जीएसटी में रजिस्ट्रेशन ही नहीं था। यह शिकायत केसली के एक युवक द्वारा बाइक मैकेनिक द्वारा की थी।
शिकायत करें
20 लाख रुपए के वार्षिक टर्न ओवर वाले व्यापारियों को जीएसटी में रजिस्टे्रशन कराना अनिवार्य है। अगर जीएसटी लेने के बाद व्यापारी पक्का बिल नहीं देता तो ग्राहक विभाग में इसकी शिकायत कर सकता है।
निशांकी सिंघई, वाणिज्यिक कर अधिकारी सागर वृत्त

Published on:
05 Oct 2018 10:39 am
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