शब-ए-बारात को अल्लाह की इबादत और गुनाहों से तौबा की रात के रूप में जाना जाता है।
मुस्लिम समुदाय ने गुरुवार की रात को शब-ए-बारात का त्योहार मनाया। इस अवसर पर परिजनों ने अपने बुजुर्गों की कब्रिस्तान पर पहुंचकर उनकी मगफिरत की दुआएं मांगी। इस दिन विशेष रूप से रोजा भी रखा गया। शब-ए-बारात को अल्लाह की इबादत और गुनाहों से तौबा की रात के रूप में जाना जाता है। कुरान शरीफ और हदीस में इस रात की विशेष माना गया। इस रात खुदा अपने बंदों को इबादत करने का विशेष अवसर प्रदान करते हैं। इस रात गुनाहों से बचने का खास एहतमाम करना है। जमीयत उलेमा ए हिंद के जिला अध्यक्ष हाफिज सैयद नासिर अली ने बताया कि शब ए बारात की रात में लोग पूरी रात इबादत करते हैं और कब्रिस्तान में जाकर अपने पूर्वजों के लिए दुआ करते हैं। मस्जिदों में नमाज अदा करते हैं कुरान पढ़ते हैं और पूरी दुनिया जहान के लोगों के लिए दुआएं करते हैं। शब ए बारात इस्लामिक माह शाबान जो की इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार आठवां महीना है। इसकी 14 तारीख की रात शब ए बारात कहलाती है. जिसका मतलब होता है जहन्नुम से आजाद करना। शहर की भोपाल रोड, गोपालगंज एवं भैंसा सदर की कब्रिस्तान पर बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग पहुंचे और बुजुर्गों की मगफिरत की दुआएं मांगी।