सागर

…तो आत्मनिर्भर होती सागर स्मार्ट सिटी, 500 करोड़ का राजस्व मिलता

– केंद्रीय जेल की जमीन पर बनना था बुंदेलखंड स्मार्ट बिजनेस डिस्ट्रिक्ट – केंद्रीय जेल शिफ्टिंग की धीमी रफ्तार से नहीं आया शहर में ज्यादा बदलाव सागर. स्मार्ट सिटी योजना में केंद्रीय जेल की जमीन से सागर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के आत्मनिर्भर बनने का रास्ता तलाशा गया था। केंद्रीय जेल की शिफ्टिंग के बाद खाली […]

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May 21, 2024

- केंद्रीय जेल की जमीन पर बनना था बुंदेलखंड स्मार्ट बिजनेस डिस्ट्रिक्ट

- केंद्रीय जेल शिफ्टिंग की धीमी रफ्तार से नहीं आया शहर में ज्यादा बदलाव

सागर. स्मार्ट सिटी योजना में केंद्रीय जेल की जमीन से सागर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के आत्मनिर्भर बनने का रास्ता तलाशा गया था। केंद्रीय जेल की शिफ्टिंग के बाद खाली होने वाली 40 एकड़ की जमीन पर अलग-अलग विकास कार्यों से 500 करोड़ रुपए की राशि जुटाने का प्रावधान किया गया था। शिफ्टिंग की कागजी कार्रवाई में लगे समय से यह सपना अब धुंधला हो गया है।

प्लानिंग वही, लेकिन बोलने से कतरा रहे अफसर

केंद्रीय जेल की शिफ्टिंग का रास्ता भोपाल स्तर से भी क्लीयर हो गया है। लोकसभा चुनाव की आदर्श आचार संहिता के खत्म होते ही नवीन जेल निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू होगी। नई जेल के तैयार होने में तीन साल तक का समय लग सकता है। यही वजह है कि वर्तमान में अफसर मौजूदा केंद्रीय जेल पर क्या होगा, इस पर बोलने से बच रहे हैं।

स्मार्ट बिजनेस डिस्ट्रिक्ट इनसे जुटाया जाना था राजस्व

- 40 एकड़ पर तैयार होना था स्मार्ट बिजनेस डिस्ट्रिक्ट

- 6 इंक्यूबेशन सेंटर जहां 1200 एंटरप्रेन्योरशिप के लिए

- 6 स्किल डवलपमेंट एंड ट्रैनिंग सेंटर

- 100 करोड़ रुपए से वर्तमान जेल के विस्थापन के लिए प्रावधान

जमीन का ये उपयोग होना था

- 70650 वर्गमीटर जमीन रिटेज स्पेस

- 164850 वर्गमीटर जमीन कमर्शियल स्पेस

- 37680 वर्गमीटर आइटी ऑफिस

- 37680 वर्गमीटर कंवेंशन सेंटर कम स्टार रेटेड होटल

- 987 हाउसिंग यूनिट्स काम्पैक्ट डेनसिटी

- 755 रेसीडेंस यूनिट्स

बस स्टैंड को लेकर भी यही समस्या

स्मार्ट सिटी योजना के तहत शासकीय और प्राइवेट बस स्टैंड की शिफ्टिंग के बाद वहां पर स्टार रेटेड होटल्स और लेक फ्रंट डवलपमेंट किया जाना था, लेकिन फिलहाल इस मामले में भी अब अफसरों ने चुप्पी साध ली है। दरअसल जून-2024 को स्मार्ट सिटी योजना समाप्त होनी वाली है। शासन से इसका नोटिफिकेशन भी आ गया है। यही वजह है कि अब अफसर नए प्रोजेक्ट या निर्देश आने का इंतजार कर रहे हैं।

बड़े प्रोजेक्ट जिनकी शिफ्टिंग में देरी हुई

- डेयरी विस्थापन की प्रक्रिया डेढ़ साल से चल रही है लेकिन प्रयास अब तक सफल नहीं हो पाए हैं। लिहाजा प्रोजेक्ट का असर नहीं दिख रहे।

- बस स्टैंड की शिफ्टिंग चंद रोज पहले ही हुई है। इसलिए इसका असर दिखने में चार से पांच महीनों का समय लग सकता है।

- फर्नीचर क्लस्टर की स्वीकृति मिले सवा साल हो गया है लेकिन प्रक्रिया कागजों में ही अटकी है।

- केंद्रीय जेल की शिफ्टिंग पूरी होते-होते तीन साल तक और लग सकते हैं।

- ट्रांसपोर्ट नगर की शिफ्टिंग की प्रक्रिया भी पाइपलाइन में है। अमावनी में सभी तैयारियां पूरी हैं, लेकिन ट्रांसपोर्टर मौके पर जाने के लिए तैयार नहीं।

Updated on:
21 May 2024 05:47 pm
Published on:
21 May 2024 05:46 pm
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