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नंबर तो मात्र एक पैमाना हैं, वह जिंदगी नहीं हैं, परीक्षा के तनाव से दूर रहने के लिए विद्यार्थियों को दिए टिप्स

बीना. ब्रह्माकुमारीज खिमलासा सेवाकेंद्र द्वारा शनिवार को हाइ स्कूल और हायर सेकंडरी स्कूल के विद्यार्थियों के लिए मोटिवेशनल कार्यक्रम आयोजित किया गया।इसमें मोटिवेशनल स्पीकर व कथावाचक राजयोगिनी बीके नीलम ने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी संकल्प करें कि सबसे पहले मुझे नैतिक और चरित्रवान इंसान बनना है। जीवन में एक बार हार जाने पर निराश नहीं […]

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Marks are just a measure, not life; tips for students to manage exam stress

कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थी

बीना. ब्रह्माकुमारीज खिमलासा सेवाकेंद्र द्वारा शनिवार को हाइ स्कूल और हायर सेकंडरी स्कूल के विद्यार्थियों के लिए मोटिवेशनल कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इसमें मोटिवेशनल स्पीकर व कथावाचक राजयोगिनी बीके नीलम ने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी संकल्प करें कि सबसे पहले मुझे नैतिक और चरित्रवान इंसान बनना है। जीवन में एक बार हार जाने पर निराश नहीं होना, क्योंकि हार ही जीत का कारण बनती है। हार ही हमें सिखाती है कि हमारे प्रयासों में कहां कमी रह गई। अगली बार मुझे कैसे तैयारी करनी है। इसलिए कभी भी परीक्षा में कम नंबर आने पर या फैल होने पर निराश नहीं हों, अगले साल और मेहनत के साथ कठिन परिश्रम करें, इससे सफलता जरूर मिलेगी। उन्होंने कहा कि नंबर तो मात्र एक पैमाना है, वह जिंदगी नहीं है, जिंदगी नंबर से बड़ी है। जब हम जीवन में बड़ा लक्ष्य तय करते हैं तो रुकावटें भी आती हैं।

उठते ही ऊं ध्वनि करें
सेवाकेंद्र संचालिका बीके जानकी ने कहा कि रोज सुबह उठते ही ऊं ध्वनि करें, इससे एकाग्रता बढ़ेगी और मन शांत होगा। कुछ समय के लिए अपने आराध्य का ध्यान करें। संकल्प बीज हैं, संकल्प से ही सृष्टि बनती है। जैसे हमारे संकल्प होते हैं, वैसा हमारा जीवन बनने लगता है।

शिव निराकार, अजर-अमर और समय चक्र से न्यारे हैं
ब्रह्माकुमारीज द्वारा आयोजित शिव महापुराण ज्ञान महायज्ञ कथा के तीसरे दिन कथावाचक राजयोगिनी बीके नीलम ने कहा कि सृष्टि एक निश्चित समय चक्र के अनुसार चलती है। यह चक्र सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर और कलियुग के क्रम से निरंतर घूमता रहता है। जैसे ऋतुएं बदलती हैं, वैसे ही युग परिवर्तन भी प्रकृति का नियम है। वर्तमान समय परिवर्तन का काल है, जब मानवता को आत्मचिंतन और आत्मपरिवतज़्न की आवश्यकता है। बीके नीलम ने कहा कि परमपिता परमात्मा शिव सृष्टि के रचयिता और कल्याणकारी हैं, लेकिन वह स्वयं समय चक्र के बंधन में नहीं आते हैं।