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भगवान की भक्ति से वंचित रहते हैं : राजेंद्र कृष्ण शास्त्री

बिलहरा देव जानकी रमण हनुमान मंदिर परिसर में चल रही संगीतमयी श्रीराम कथा के चौथे दिवस पं. राजेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि व्यक्ति दुनिया के काम करके धन संपत्ति एकजुट कर लेते है, लेकिन भगवान की भक्ति से वंचित रहते है। सबसे बड़ा धन राम धन है। हम अपने लिए कुछ और दूसरों के […]

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Jan 21, 2026

बिलहरा देव जानकी रमण हनुमान मंदिर परिसर में चल रही संगीतमयी श्रीराम कथा के चौथे दिवस पं. राजेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि व्यक्ति दुनिया के काम करके धन संपत्ति एकजुट कर लेते है, लेकिन भगवान की भक्ति से वंचित रहते है। सबसे बड़ा धन राम धन है। हम अपने लिए कुछ और दूसरों के लिए कुछ और सोचते है। इस प्रकार हम दोहरी सोच रखते है। भगवान श्रीराम के चरित्र से हम सीखे। घर, परिवार, समाज संसार के लोगों से हमारा कैसा व्यवहार हो। पं. राजेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने बताया कि पार्वती ने भगवान शिव से प्रश्न किये जिसमें निर्गुण ब्रह्म सगुण रूप कैसे धारण करता है। राम अवतार क्यों हुआ, बाल चरित्र की कथा श्रवण कराएं, जानकी जी से विवाह किया, राज्य किस दोष से छोड़ा, वन में रहकर जो अपार चरित्र किए। रावण को किस तरह मारा उन्हें कहिये। उन्होंने राज सिंहासन पर बैठकर जो लीलाएं की उसे भी बताएं। प्रश्न करते ही महादेव की ह्दय में सारे राम चरित्र आगे और उन्होंने राम जी के चरित्र का वर्णन करते हुए बालक भगवान श्रीराम की वंदना की। रामकथा सभी अमंगल को हरने वाली, सभी सिद्धियां और मंगल प्रदान करने वाली कथा है। यह कथा गंगा के समान जगत का कल्याण करने एवं पवित्र करने वाली है। भगवान शिव कहते है पार्वती जी के प्रश्न जगत के कल्याण के लिए है। तुम रघुनाथ जी से प्रेम करने वाली हो। कथा का समापन गुरुवार को होगा।

Published on:
21 Jan 2026 04:57 pm
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