
बीना. रेलवे स्टेशन के यार्ड में प्री-टू-प्री इंटरलॉकिंग कार्य तेजी से चल रहा है। इसके तहत यार्ड में कई तकनीकी बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे भविष्य में ट्रेनों का संचालन अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित हो सकेगा। नए पॉइंट लगाए जा रहे हैं, जिनकी मदद से ट्रेनें एक ट्रैक से दूसरे ट्रैक पर जा सकेंगी। इन पॉइंट को लॉक किया जा रहा है और बाद में इन्हें इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई) प्रणाली से जोड़ा जाएगा।
यार्ड में पीक्यूआरएस साइडिंग और टीआरडी साइडिंग का निर्माण भी किया जा रहा है। इन साइडिंग में रेलवे की मशीनों को रखा जाएगा। जरूरत पड़ने पर इन मशीनों को तत्काल संबंधित घटनास्थल तक पहुंचाया जा सकेगा, जिससे रखरखाव और आपातकालीन कार्यों में समय की बचत होगी। इंजीनियरिंग साइड का काम भी लगभग पूरा हो चुका है। इसे नए पॉइंट से जोड़ा जा रहा है। वहीं, ईआई सब केबिन से पूरे सिस्टम को जोडऩे का कार्य किया जा रहा है। इस व्यवस्था के शुरू होने के बाद यार्ड में ट्रेनों के मार्ग निर्धारित और पॉइंट संचालन को अधिक सुरक्षित एवं तकनीकी रूप से नियंत्रित किया जा सकेगा।
यार्ड में पुरानी और कमजोर पटरियों को हटाकर नई पटरियां डाली जा रही हैं, इससे ट्रैक की मजबूती बढ़ेगी और ट्रेनों का सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा ओएचई लाइन के बीच स्थित खंभों को हटाकर वहां बूम इरेक्शन लांच किए जा रहे हैं। यह कार्य भी यार्ड के आधुनिकीकरण का हिस्सा है।
यार्ड रिमॉडलिंग में प्री टू प्री इंटरलॉकिंग के तहत कुल 61 नए पॉइंट डाले जाने हैं, जिनमें से भी तक छ: पॉइंट डाले जा चुके हैं। हर एक पॉइंट को डालने में कम से कम चार से पांच घंटे का समय लगता है, इसके लिए बुधवार को दोपहर 12.10 से 2.40 बजे तक डाउन गुड्स यार्ड लाइन पर ब्लॉक लिया गया।
अभी तक तीन, चार व पांच नंबर प्लेटफॉर्म पर केवल एक ही तरफ से ट्रेनों का संचालन होता है, लेकिन अब जल्द ही इनपर दोनों तरफ से ट्रेनों के संचालन की व्यवस्था होगी। अभी चार नंबर प्लेटफॉर्म पर झांसी एंड पर कोच स्पेयर साइडिंग थी, जिसे डिस्मेंटल किया जा रहा है। इसके हटाए जाने के बाद दोनों ओर से ट्रेन को लिया जा सकेगा। साथ ही यार्ड रीमॉडलिंग का काम पूरा होने के बाद चार व पांच नंबर से एक साथ गुना व झांसी की ओर ट्रेनों का चलाया जा सकेगा। वहीं, सागर से व गुना से आने वाली ट्रेनों को भी चार व पांच नंबर प्लेटफॉर्म पर लिया जा सकेगा।