
सतना। भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट में पांच दिवसीय दीपोत्सव का शुभारंभ हो गया है। सुबह से ही धर्मनगरी में श्रद्धालुओं की चहल-पहल बढ़ने लगी थी। मंदाकिनी के घाटों पर स्नान, कामदगिरि की परिक्रमा और प्रमुख धार्मिक स्थलों पर दर्शन-पूजन के साथ दीपावली मेले की शुरुआत हुई। कोई परिवार के साथ पहुंचा तो कोई दोस्तों और रिश्तेदारों के समूह में। बड़ी संख्या में श्रद्धालु बसों और ट्रेनों से चित्रकूट पहुंच रहे हैं। कई लोग निजी वाहनों से भी आ रहे हैं। धर्मनगरी की सड़कों, घाटों और मंदिरों के आसपास सुबह से ही भक्तों की आवाजाही दिखाई देने लगी है।चित्रकूट में दीपावली का पर्व केवल दीप जलाने तक सीमित नहीं है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदाकिनी में स्नान, कामदगिरि की परिक्रमा और भगवान श्रीराम से जुड़े धार्मिक स्थलों के दर्शन विशेष महत्व रखते हैं। इसी आस्था के साथ श्रद्धालु सबसे पहले मंदाकिनी तट पहुंच रहे हैं। रामघाट, भरतघाट सहित विभिन्न घाटों पर स्नान के बाद पूजा-अर्चना और दीपदान किया जा रहा है। इसके बाद श्रद्धालु कामदगिरि पहुंचकर परिक्रमा कर रहे हैं। मंदिरों में दर्शन के लिए भी लोगों का पहुंचना जारी है।
मेले में आने वाले श्रद्धालुओं में अलग-अलग तरह के समूह नजर आ रहे हैं। कई परिवार बच्चों और बुजुर्गों के साथ पहुंचे हैं तो ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग जत्थों में आ रहे हैं। कुछ श्रद्धालु एक दिन में स्नान, परिक्रमा और दर्शन कर लौटने की तैयारी में हैं, जबकि अनेक परिवारों ने पांच दिवसीय मेले के दौरान चित्रकूट में रुककर धार्मिक स्थलों के दर्शन करने का कार्यक्रम बनाया है। बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन से लेकर प्रमुख मार्गों तक श्रद्धालुओं की आवाजाही मेले की शुरुआत के साथ बढ़ने लगी है।
पांच दिनों तक चित्रकूट के अलग-अलग स्थानों पर धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन भी तय किए गए हैं। कामदगिरि आरती स्थल, रामायण दर्शन परिक्रमा मार्ग सहित विभिन्न स्थानों पर सांस्कृतिक मंच तैयार किए गए हैं। प्रमोद वन में शाम को रामलीला का आयोजन किया गया। रात विश्राम करने वाले श्रद्धालु काफी संख्या में रामलीला देखने पहुंचे। इन आयोजनों से श्रद्धालुओं को दर्शन-पूजन के साथ क्षेत्रीय लोक परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।
इस बार चित्रकूट में दीपावली मेला ऐसे समय हो रहा है, जब अगस्त में मंदाकिनी की भीषण बाढ़ ने घाटों और आवागमन के कई रास्तों को प्रभावित किया था। ऐसे में श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए वैकल्पिक इंतजाम किए गए हैं। भरत घाट पर फ्लोटिंग पुल और हनुमानधारा मार्ग पर पीपा पुल के जरिए आवागमन की व्यवस्था की गई है। कुछ प्रभावित धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा कारणों से प्रतिबंध भी हैं। गुप्त गोदावरी की गुफाओं में प्रवेश इस बार प्रतिबंधित रखा गया है। लेकिन यहां पर जिला प्रशासन द्वारा गुप्त गोदावरी दर्शन का वर्चुअल प्रसारण किया जा रहा है। जिसे लोग काफी पसंद कर रहे हैं।
चित्रकूट में इस बार मां मंदाकिनी के मूर्त स्वरूप के साथ भव्य आरती के इंतजाम किए गए है। पुण्य सलिला मंदाकिनी का किनारा, कलकल बहता जल, हवाओं के ठंडे झोंके, बैक ग्राउंड पर आकर्षक रोशनी के बीच भजन संगीत की गूंजती मधुर लहरियाें के बीच आरती का आकर्षण दर्शकों और श्रद्धालुओं को मंत्र मुग्ध कर देता है।
चित्रकूट पांच दिवसीय मेले को लेकर कलेक्टर डॉ सतीश कुमार एस और एसपी हंसराज सिंह ने चित्रकूट में डेरा डाल लिया है। मेला शुभारंभ के साथ ही उन्होंने सभी अधिकारियों की बैठक लेते हुए व्यवस्थागत इंतजामों के निर्देश दिए। कहा, सभी अधिकारी कर्मचारी निर्धारित नीली जैकेट पहन कर रखे। ताकि उन्हें आसानी से पहचान जा सके। इधर शाम को संभागायुक्त शीलेन्द्र सिंह और आईजी गौरव राजपूत भी चित्रकूट पहुंच कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। मेले को लेकर प्रशासन ने घाटों पर सुरक्षा बलों और बचाव दलों की तैनाती के साथ भीड़ प्रबंधन के इंतजाम किए हैं।
पांच दिनों तक चलने वाले इस मेले में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ने की उम्मीद है। फिलहाल धर्मनगरी में दीपोत्सव की शुरुआत के साथ ही रामनाम, भजन-कीर्तन, स्नान, परिक्रमा और दर्शन का सिलसिला शुरू हो चुका है। मंदाकिनी के घाटों से लेकर कामदगिरि तक चित्रकूट में आस्था का जनसैलाब उमडा हुआ है।