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सतना में 200 मीटर सड़क के लिए कलेक्ट्रेट में 3 घंटे बवाल, कलेक्टर को घेरा, पुलिस से भिड़े, तीन हंगामाई भेजे गए जेल

निजी आराजी पर सरकारी सड़क बनाने की मांग लेकर कुड़िया के ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे। प्रशासन पर दबाव बनाने स्कूली बच्चों को मालवाहकों में भर कर प्रदर्शन कराने लाया गया। मालवाहक किया गया जब्त। CWC ने प्रदर्शन में बच्चों को लाने पर डीईओ से मांगा जवाब।
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सतना

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Ramashankar Sharma

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Updated: 4 Nov 2026, 9:15 AM IST

protest

सतना। रामपुर बाघेलान तहसील की ग्राम पंचायत बिहरा क्रमांक-2 के ग्राम कुडिया कर्णपुर में 200 मीटर सड़क निर्माण की मांग को लेकर सोमवार को ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट में जमकर हंगामा किया। करीब आधा सैकड़ा महिला-पुरुष छोटे बच्चों और स्कूली छात्राओं को साथ लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। जनसुनवाई के पुराने आवेदनों के साथ पहुंचे ग्रामीणों की मांग थी कि कलेक्टर तत्काल गांव पहुंचकर सड़क का निरीक्षण करें। अधिकारियों की समझाइश और अगले दिन एसडीएम के गांव पहुंचने के आश्वासन के बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। कलेक्ट्रेट का रास्ता रोकने से शुरू हुआ विवाद पुलिस से झूमाझटकी तक पहुंच गया। करीब तीन घंटे चले घटनाक्रम के बाद पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में लेकर एसडीएम के समक्ष पेश किया, जहां से उन्हें प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के तहत जेल भेज दिया गया। वहीं, बच्चों और छात्राओं को मालवाहक वाहन में बैठाकर लाने पर यातायात पुलिस ने वाहन जब्त कर लिया।

पुराने आवेदनों के साथ पहुंचे थे ग्रामीण

ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट परिसर के सामने नारेबाजी कर प्रदर्शन शुरू किया। उनके हाथों में जनसुनवाई में पहले दिए गए आवेदनों की प्रतियां थीं। ग्रामीणों का कहना था कि वे कई बार सड़क निर्माण के लिए आवेदन कर चुके हैं, लेकिन गांव में करीब 200 मीटर का रास्ता अब तक नहीं बन पाया। वे कलेक्टर से मिलकर अपनी समस्या रखना चाहते थे और मांग कर रहे थे कि कलेक्टर उसी दिन गांव पहुंचकर स्थिति देखें। सूचना मिलने पर नायब तहसीलदार राजेश सिंह मौके पर पहुंचे। इसके बाद डिप्टी कलेक्टर संदीप परस्ते ने भी ग्रामीणों से चर्चा की। उन्होंने मांग पर सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिलाते हुए अगले दिन एसडीएम रामपुर बाघेलान के गांव पहुंचकर निरीक्षण करने की बात कही। हालांकि, प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे दो-तीन लोग इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं हुए। उनका कहना था कि एसडीएम को पहले भी कई बार ज्ञापन दिए जा चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

कलेक्टर के प्रतिनिधि की बात भी नहीं मानी

प्रदर्शनकारियों की नारेबाजी सुनकर जनसुनवाई कर रहे कलेक्टर ने तहसीलदार सौरभ मिश्रा को मौके पर भेजा। उन्होंने ग्रामीणों को समझाया कि डिप्टी कलेक्टर यहां कलेक्टर के प्रतिनिधि के रूप में उनकी बात सुनने आए हैं। अगले दिन एसडीएम के गांव पहुंचने का आश्वासन भी दिया। इसके बाद अधिकांश ग्रामीण लौटने लगे और अधिकारी भी कार्यालय में चले गए।लेकिन कुछ देर बाद प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे लोग ग्रामीणों को लेकर फिर कलेक्ट्रेट पहुंचे। इस बार एसडीएम राहुल सिलाडिया ने प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की। उन्होंने बताया कि जिस 200 मीटर सड़क की मांग की जा रही है, वह निजी आराजी में आती है। ऐसे में जमीन मालिक की सहमति के बिना सड़क निर्माण संभव नहीं है। इसके बावजूद प्रशासन मौके पर जाकर संबंधित पक्षों से चर्चा करेगा और बीच का रास्ता निकालने का प्रयास करेगा। एसडीएम ने अगले दिन गांव पहुंचने की बात दोहराई। इस आश्वासन के बाद ग्रामीण बाहर आ गए।

जनसुनवाई कक्ष के बाहर कलेक्टर का रास्ता घेरा

इसके बाद घटनाक्रम ने फिर करवट ली। तीन-चार नेतृत्वकारी लोगों ने ग्रामीणों को दोबारा एकत्र किया और करीब पचास लोगों के साथ कलेक्ट्रेट के प्रथम तल पर पहुंच गए। यहां जनसुनवाई कक्ष के दोनों ओर के गलियारों को घेर लिया गया। जनसुनवाई समाप्त होने के बाद जब कलेक्टर बाहर निकले तो दोनों तरफ लोगों की भीड़ के कारण उनका रास्ता बंद था। इस पर कलेक्टर ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उनकी समस्या पहले भी सुनी जा चुकी है। इस तरह रास्ता रोककर या घेराव करके बात नहीं की जा सकती। प्रतिनिधिमंडल के रूप में तीन-चार लोग आएं और अपनी समस्या बताएं। इसी दौरान अपर कलेक्टर भी पहुंचे और लोगों को नीचे जाने के लिए कहा। इसके बाद नारेबाजी शुरू हो गई।

पुलिस से भिड़े प्रदर्शनकारी, तीन हिरासत में

नीचे पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने फिर कलेक्ट्रेट परिसर का रास्ता रोक दिया। लगातार समझाइश के बावजूद जब प्रदर्शन और नारेबाजी बंद नहीं हुई तो पुलिस बल बुलाया गया। पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारियों को मुख्य द्वार की ओर ले जाने लगे, तभी नेतृत्व कर रहे तीन-चार लोग पुलिसकर्मियों से उलझ गए और झूमाझटकी करने लगे। स्थिति बिगड़ती देख अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। थाना प्रभारी भी बल के साथ मौके पर पहुंचे। इसके बाद तीन लोगों को हिरासत में लिया गया।

मालवाहक जब्त, महिलाओं-बच्चों को बस से भेजा

प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छोटे बच्चे और स्कूली छात्राएं भी शामिल थीं। पुलिस और प्रशासन ने पाया कि इन्हें देवराज नामक व्यक्ति मालवाहक वाहन में बैठाकर गांव से कलेक्ट्रेट लाया था। बच्चों को मालवाहक में ढोने पर यातायात पुलिस को बुलाया गया। वाहन जब्त कर थाने में खड़ा कराया गया। वहीं, प्रदर्शन में शामिल महिलाओं और बच्चों को वापस गांव भेजने के लिए प्रशासन ने बस की व्यवस्था की। उधर, हंगामा और पुलिस से झूमाझटकी के मामले में हिरासत में लिए गए तीनों लोगों को पुलिस ने एसडीएम के समक्ष पेश किया। यहां उनके खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करते हुए जेल भेज दिया गया। जिन्हें जेल भेजा गया है उनमें आकाश कुशवाहा पिता विष्णु कुशवाहा, सुमेश कुशवाहा पिता सौखीलाल और रामऔतार कुशवाहा पिता टिर्रा कुशवाहा शामिल है।

बाल कल्याण समिति ने डीईओ से मांगा जवाब

इस मामले में काफी संख्या में स्कूली छात्राओं को प्रदर्शन में लाने को लेकर बाल कल्याण समिति भी सक्रिय हो गई है। सीडब्लूसी अध्यक्ष चंद्र किरण श्रीवास्तव ने डीईओ को पत्र लिख बच्चों की उपस्थिति के संबंध में जवाब तलब किया है। विभिन्न विद्यालयों के नर्सरी से लेकर 11वीं तक अध्ययनरत बच्चों को यहां लाए जाने को लेकर 4 बिन्दु में जवाब तलब किया गया है। इस दौरान 27 छात्र छात्राएं प्रदर्शन में लाए गए थे। जिनकी सूची भी डीईओ को भेजी गई है।