
सतना। नगर निगम परिषद की साढ़े पांच घंटे चली बैठक में शहर के विकास और नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के बजाय नामकरण के प्रस्ताव छाए रहे। परिषद के 23 में से 19 एजेंडे नामकरण से संबंधित होने पर विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा ने सवाल उठाए और कहा कि नामकरण की राजनीति में विकास के मुद्दे गुम हो रहे हैं। बैठक के दौरान कई प्रस्तावों पर तीखी बहस, नारेबाजी और हंगामा हुआ। विपक्ष के भारी विरोध के बीच धवारी स्टेडियम का नाम शंकर प्रसाद ताम्रकार के नाम पर करने का प्रस्ताव बहुमत से पारित घोषित कर दिया गया। विपक्ष इस पर मतदान कराने की मांग करता रहा, लेकिन अध्यक्ष ने मतदान नहीं कराया। वहीं, पूर्व सांसद स्वर्गीय रामानंद सिंह के नाम पर एक गली का नामकरण करने का प्रस्ताव पारित नहीं हो सका।
बैठक का सबसे अहम पहलू यह रहा कि शहर की समस्याओं से जुड़े एजेंडा क्रमांक 23 पर चर्चा की मांग के बावजूद विचार-विमर्श नहीं हुआ। इस एजेंडे में विकास कार्य, अतिक्रमण, सीवर लाइन और पेयजल जैसे जनहित के मुद्दे शामिल थे। विपक्ष के पार्षद इस पर चर्चा कराने की मांग करते रहे, लेकिन अध्यक्ष ने सम्मेलन समाप्त करने की घोषणा कर दी। इस तरह नामकरण के कई प्रस्तावों पर विस्तार से बहस हुई, लेकिन नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दे चर्चा से बाहर रह गए।
नगर निगम परिषद की बैठक में पहली बार पहुंचे विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा का महापौर ने स्वागत किया। बैठक की कार्यवाही शुरू होने से पहले विधायक ने अध्यक्ष की अनुमति लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि नगर की समस्याओं को लेकर वह समय-समय पर नगर निगम को पत्र लिखते रहे हैं, इसके बावजूद महापौर का कहना है कि उन्होंने कोई पत्र नहीं दिया। विधायक संबंधित पत्रों की प्रतियां लेकर पहुंचे थे, जिन्हें उन्होंने अध्यक्ष को सौंपा। विधायक ने कहा कि विकास के नाम पर हजारों करोड़ रुपए खर्च होने के बावजूद शहर की समस्याओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। परिषद के 23 में से 19 एजेंडे नामकरण से संबंधित हैं। करीब 500 करोड़ रुपए के सालाना टर्नओवर वाले नगर निगम में कार्यों की समीक्षा और विकास की प्राथमिकताओं पर चर्चा करने के बजाय नाम बदलने की राजनीति हो रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि निगम को अब नामकरण का काउंटर ही खोल लेना चाहिए। कहा, विकास के मुद्दों पर वह साथ चलने और जरूरत पड़ने पर कुर्बानी करने को तैयार हैं, लेकिन चर्चा शहर के विकास और नागरिकों की समस्याओं पर होनी चाहिए।
नामकरण के प्रस्तावों पर चर्चा के दौरान बम्हनगवां में पारिजात होटल के सामने की गली का नाम राधापुरम मार्ग करने पर नेता प्रतिपक्ष मिथलेश सिंह ने आपत्ति जताई। उनका कहना था कि उन्होंने मोहल्ले का नाम बदलने का प्रस्ताव दिया था। इस दौरान पार्षद अभिषेक तिवारी की टिप्पणी को लेकर भी बहस हुई। बाद में तीन गलियों के नाम राधापुरम गली नंबर-1, 2 और 3 रखने पर सहमति बनी। पुराने पावर हाउस चौक का नाम हुकुमचंद जैन के नाम पर करने के प्रस्ताव पर भी सहमति रही।
पतेरी स्थित नवनिर्मित सामुदायिक भवन का नाम पूर्व विधायक शंकरलाल तिवारी के नाम पर करने को लेकर भी विवाद हुआ। विपक्षी पार्षदों का तर्क था कि शंकरलाल तिवारी के राजनीतिक कद और जननेता के रूप में उनके योगदान को देखते हुए सामुदायिक भवन का नामकरण उनके सम्मान के अनुरूप नहीं है। पार्षद पंकज कुशवाहा ने किसी चौराहे या पार्क में उनकी प्रतिमा स्थापित कर उस स्थल का नाम उनके नाम पर रखने का सुझाव दिया। पार्षद अमित अवस्थी ने स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का नाम शंकरलाल तिवारी के नाम पर करने की बात कही। हालांकि, बहस के बीच सामुदायिक भवन का नामकरण उनके नाम पर करने का प्रस्ताव पारित हो गया।
पीएम आवास उतैली चौराहे का नाम श्री सहस्त्रबाहु महाराज चौक करने के प्रस्ताव पर एल्डरमैन ने विरोध जताया। सौरभ नायक और शैलेष तिवारी ने चौक का नाम पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर करने का सुझाव दिया। इस पर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते नारेबाजी होने लगी। हंगामे के बीच परिषद अध्यक्ष ने नाराजगी जताते हुए दोनों पक्षों को शांत कराया और प्रस्ताव पारित होने की घोषणा कर दी। इनके विरोध दर्ज कराने के अध्यक्ष के निर्देश पर नेता प्रतिपक्ष ने एल्डरमैन को अधिकार नहीं होने की जानकारी दी। इसके बाद अन्य नामकरण प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई और अधिकांश प्रस्ताव पारित होते चले गए।
धवारी स्टेडियम का नाम शंकर प्रसाद ताम्रकार के नाम पर करने का प्रस्ताव आते ही विपक्ष ने विरोध शुरू कर दिया। पार्षद नम्रता सिंह ने स्टेडियम का नाम पूर्व विधायक शंकरलाल तिवारी के नाम पर करने की मांग की। उन्होंने विकल्प के तौर पर स्टेडियम का निर्माण करवाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन सिंह का नाम भी सुझाया। नेता प्रतिपक्ष मिथलेश सिंह, पार्षद अमित अवस्थी, पंकज कुशवाहा और विधायक प्रतिनिधि राजदीप सिंह सहित विपक्षी सदस्यों ने प्रस्ताव पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि प्रस्ताव को पूर्व में एमआईसी में पारित किए जाने के साथ संबंधित संकल्प और पूर्व में हुई प्रक्रिया को भी देखा जाना चाहिए। उन्होंने जनभावनाओं का हवाला देते हुए स्टेडियम का नाम अर्जुन सिंह के नाम पर करने की मांग की। विपक्ष ने इस प्रस्ताव पर मतदान कराने की मांग रखी। हंगामे के बीच अध्यक्ष ने इस एजेंडे पर आखिर में चर्चा कराने की बात कही और अन्य प्रस्तावों पर चर्चा आगे बढ़ाई। बैठक के अंतिम चरण में जब धवारी स्टेडियम के नामकरण का मुद्दा फिर आया तो विपक्ष ने मतदान की मांग दोहराई। इस पर अध्यक्ष ने पूर्व में पार्षदों द्वारा सौंपे गए पत्रों के आधार पर हाथ खड़े करवाकर समर्थन लिया और बहुमत से प्रस्ताव पारित होने की घोषणा कर दी। विपक्षी पार्षद इस प्रक्रिया का विरोध करते रहे।
नगर निगम की आय बढ़ाने के लिए व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के ट्रेड लाइसेंस शुल्क में वृद्धि का प्रस्ताव पारित हुआ। आटा चक्की कारोबारियों के शुल्क में बढ़ोतरी का प्रस्ताव छोड़कर अन्य प्रस्तावों पर सहमति बनी। कई व्यवसायों के लिए एमआईसी से प्रस्तावित दरों में भी वृद्धि की गई। निगमायुक्त ने बताया कि शहर में करीब 4600 कारोबारी प्रतिष्ठान हैं, जबकि ट्रेड लाइसेंस केवल 93 ने लिया है। इस पर सभी पात्र कारोबारियों को लाइसेंस जारी कराने के लिए गंभीरता से कार्रवाई करने की बात कही गई। पटिया-पत्थर और मार्बल कारोबार का लाइसेंस शुल्क 1000 रुपए करने के सुझाव पर एमआईसी सदस्य गोपी गेलानी ने विरोध किया, लेकिन उनकी आपत्ति स्वीकार नहीं हुई। उनका खुद का यही कारोबार होने पर विरोध को लेकर वे बैठक में हंसी का पात्र भी बने। ब्यूटी पार्लर के लाइसेंस शुल्क में वृद्धि के प्रस्ताव पर महिला पार्षदों ने विरोध जताया, जिसके बाद शुल्क यथावत रखने का निर्णय हुआ।
पुष्कर्णी पार्क में निर्माण कार्य के टेंडर पर नेता प्रतिपक्ष मिथलेश सिंह ने आपत्ति जताई, लेकिन चर्चा के बाद प्रस्ताव पारित हो गया। शहर में दिशासूचक बोर्ड (गैन्ट्री) लगाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली। निगमायुक्त ने बताया कि विज्ञापन का काम देख रही एजेंसी को टर्मिनेशन नोटिस दिया गया है। भविष्य में दिशासूचक बोर्डों पर विज्ञापन नहीं लगाने की व्यवस्था पर ध्यान दिया जाएगा। शहर के 11 तालाबों के नामकरण संबंधी प्रस्ताव भी पारित किए गए। जगतदेव तालाब के मामले में पार्षद नम्रता सिंह ने विकास कार्यों में बाधा बनने वाले कथित भूस्वामियों के खिलाफ सफाई नहीं होने पर पेनाल्टी लगाने की मांग की। वहीं, मनीष टेकवानी ने सिंधी कैंप स्थित तालाब का नाम भगवान झूलेलाल के नाम पर करने के लिए पत्र सौंपा।
पार्षद नम्रता सिंह ने जोन कार्यालय की व्यवस्था में परेशान हो रहे लोगों की समस्या रखी। कहा हर काम के लिए जनता को पहले जोन ऑफिस और फिर नगर निगम मुख्य ऑफिस के चक्कर काटना पड़ता है। ऐसे में अगर हर जोन में उपयंत्री, सहायक यंत्री एवं कार्यपालन यंत्री नियुक्त हो जाएंगे तो जनता को अनावश्यक दौड़ना भी नहीं पड़ेगा। उन्होंने हर कार्य मुकेश चतुर्वेदी को सौंपे जाने पर भी आपत्ति जाहिर की। इसके अलावा मस्टर कर्मी भर्ती पर गड़बड़झाले का आरोप लगाया। कहा, वर्तमान में 1096 मस्टरकर्मी विभिन्न विभागों में कार्यरत हैं। जिनमें से काफी लोग बिना काम किए वेतन उठा रहे हैं या ऐसी जगह कार्यरत हैं जहाँ उनकी पोस्टिंग नहीं होनी चाहिए। पार्षद फुरसत ने नजीराबाद में पेयजल समस्या का मुद्दा उठाया। कहा सीवर के चक्कर में पेयजल पाइप लाइन उखाड़ दी और बाद में उसे लगाया नहीं। इस दौरान उन्होंने हाल में बनी सड़क के क्रेक होने का मसला उठाकर जांच की मांग की। निगमायुक्त ने जांच के निर्देश दिए।
बैठक में वार्ड 37 के पार्षद ने जर्जर स्कूल का मुद्दा उठाया। कहां, यहां स्कूल भवन जर्जर होने के कारण बच्चों को सामुदायिक भवन में पढ़ना पड़ रहा है। स्कूल का स्टीमेट बनाने में देरी पर निगमायुक्त नागार्जुन गौड़ा ने ईई मुकेश चतुर्वेदी से पूछा। चतुर्वेदी ने उपयंत्री दीक्षा तिवारी पर लेट लतीफी करने की बात कही। इससे नाराज निगमायुक्त ने उपयंत्री को निलंबन का नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
बैठक के पहले नेता प्रतिपक्ष और अन्य पार्षदों ने शहर के विकास से जुड़े मुद्दों को एजेंडे में शामिल कराया था। इनमें अतिक्रमण, सीवर लाइन, पेयजल और अन्य नागरिक समस्याओं से संबंधित विषय शामिल थे। विपक्ष इन पर चर्चा कराने की मांग करता रहा। बैठक को साढ़े पांच घंटे बीतने और महिला पार्षदों के त्योहार की तैयारियों का हवाला देते हुए अगले दिन चर्चा कराने का सुझाव भी दिया गया। अध्यक्ष ने अपने दस दिन बाहर रहने की बात कहते हुए बैठक आगे बढ़ाने से इनकार किया। इस पर विधायक प्रतिनिधि राजदीप सिंह ने आपत्ति जताई और कहा कि यह तरीका ठीक नहीं है कि विषयों पर चर्चा ही न हो। विपक्षी पार्षद विरोध में खड़े हो गए और हंगामा शुरू हो गया। इसी बीच अध्यक्ष ने धवारी स्टेडियम के नामकरण का प्रस्ताव पारित होने की घोषणा करते हुए राष्ट्रगान शुरू करा दिया और सम्मेलन का समापन कर दिया। अंत में पूर्व पार्षद मो. इकबाल माईडियर के निधन पर दो मिनट का मौन रखा गया।
व्यापक जनहित से जुड़े आखिरी एजेंडे पर चर्चा की लगातार मांग के बाद भी बिना चर्चा के परिषद की बैठक समाप्त करने को कांग्रेस ने आड़े हाथों लिया है। नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष मिथलेश सिंह ने अपने बयान में कहा है कि निगम अध्यक्ष ने जनता के हितों के साथ कुठाराघात किया है। निर्माण घोटाले को लेकर एजेंडे में विषय लाया गया था। स्टेशन रोड को तीन-तीन बार बनाया गया। 3 साल की गारंटी के बाद भी चार माह में नई सड़क बनाई गई और अलग अलग भुगतान किया गया। इसी तरह महदेवा में सीसी रोड बनी। खराब हुई तो डामर का काम कराया। इसके बाद तीसरी बार डामर की सड़क बना दी गई। जनता के पैसे की इस तरह बर्बादी की गई। सीवर लाइन में करोड़ों का घोटाला किया गया। रेस्टोरेशन घोटाला, बैक फिलिंग घोटाला हुआ। लेकिन अध्यक्ष इस पर चर्चा न करवाकर दोषियों को बचा रहे हैं। इसी तरह स्टेडियम के नामकरण पर वोटिंग न करवा कर नियम विरुद्ध प्रस्ताव पास किया।
परिषद की बैठक के बाद पूर्व विधायक स्व. शंकरलाल तिवारी के पुत्र राज नारायण तिवारी ने निगमायुक्त को शंकरलाल तिवारी की प्रतिमा स्थापित करने एवं नामकरण का मांगपत्र महापौर योगेश ताम्रकार की उपस्थिति में सौंपा। कहा, गरीबों के मसीहा, जन-जन के नेता और लोकतंत्र सेनानी के रूप में पहचाने जाने वाले सतना के पूर्व विधायक स्व. शंकरलाल तिवारी के निधन के एक वर्ष बाद भी शहर में उनके नाम पर किसी प्रमुख स्थल का नामकरण अथवा प्रतिमा स्थापना नहीं होने पर समर्थकों ने अब शहर में उनकी स्मृति को स्मरणीय बनाने की मांग कर रहे है। मांग पत्र में उन्होंने समर्तकों की ओर से कहा है कि सतना शहर के किसी प्रमुख चौराहे अथवा पार्क में स्व. शंकरलाल तिवारी की प्रतिमा स्थापित की जाए। इसके साथ ही सोनौरा में नवनिर्मित स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स का नामकरण स्व. शंकरलाल तिवारी के नाम पर किया जाए।
Updated on:
29 Oct 2026, 8:51 AM IST
Published on:
29 Oct 2026, 8:34 AM IST
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