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निगमायुक्त की सख्ती के बाद एबीसी की 2 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी राजसात

विजुअल इंप्रूवमेंट का प्रोजेक्ट गुणवत्ताहीन समय पर नहीं करने के कारण ठेका कंपनी एबीसी का अनुबंध निरस्त कर दिया गया। लेकिन स्मार्ट सिटी के अफसर मिलीभगत में बैंक गारंटी राजसात नहीं कर रहे थे।
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सतना

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Ramashankar Sharma

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Updated: 3 Nov 2026, 8:35 AM IST

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सतना। स्मार्ट सिटी के विजुअल इंप्रूवमेंट की निविदाकार फर्म एबीसी की लगभग 2 करोड़ रुपए की बैंक गारंटी राजसात कर ली गई है। यह कार्यवाही निगमायुक्त डॉ नागार्जुन बी गौड़ा की सख्ती के बाद हुई है। दरअसल इस प्रोजेक्ट का अनुबंध एबीसी से अप्रैल में समाप्त हो चुका था लेकिन स्मार्ट सिटी के जिम्मेदार इसकी फाइल दबा कर बैठे थे। निगमायुक्त के संज्ञान में मामला आने के बाद उन्होंने जिम्मेदारों की क्लास लगाई तो आनन फानन में कार्रवाई की गई।

यह है मामला

स्मार्ट सिटी मिशन के तहत शहर की सड़कों, चौराहों और प्रवेश द्वार के पास सौदर्यीकरण को लेकर विजुअल इंप्रूवमेंट का प्रोजेक्ट तैयार किया गया था। इसका ठेका एबीसी नामक फर्म को दिया गया था। शुरुआत से ही ठेकेदार द्वारा इस कार्य में बड़े पैमाने पर लापरवाही की जा रही थी और गुणवत्ताहीन कार्य किया जा रहा था। इसके अलावा समय सीमा में कार्य भी नहीं हो पा रहा था। लगातार समीक्षा बैठकों में निर्देश दिए जाने के बाद भी कोई सुधार नहीं होने पर अप्रैल माह में स्मार्ट सिटी बोर्ड की बैठक में इसका ठेका निरस्त करने और बैंक गारंटी राजसात करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद विजुअल इंप्रूवमेंट प्रोजेक्ट का एबीसी से अनुबंध समाप्त कर दिया गया। लेकिन नियमानुसार अनुबंध समाप्त होने के बाद ठेका कंपनी की बैंक गारंटी राजसात की जानी थी। लेकिन स्मार्ट सिटी के ईई एसके सिंह और कंपनी सचिव ने जानबूझकर इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।

ईई ने किया था बड़ा खेल

इस मामले में तत्कालीन ईई एसके सिंह ने बड़ा खेल किया था। बोर्ड मीटिंग में लिए गए निर्णय के बाद उन्होंने ठेका कंपनी एबीसी को पत्र लिखा। इसमें बड़े शातिराना तरीके से उन्होंने महज पेनाल्टी लगाने का हवाला दिया लेकिन बैंक गारंटी राजसात करने का मामले का उल्लेख नहीं किया। कुल मिलाकर उनकी मंशा पत्राचार में मामले को उलझाये रखना था। इसके अलावा इस खेल में कंपनी सचिव भी शामिल थे। उन्होंने अपने इससे संबंधित नस्ती को दबा कर रख लिया। हद तो यह हो गई कि तकनीकि अमले ने इसका फाइनल बिल तक तैयार नहीं किया। इतना ही नहीं एसके सिहं के बाद जो ईई आए उन्होंने भी इस पर चुप्पी साधे रखी। बाकी लेखापाल को तो मानो इस मामले में कोई मतलब ही नहीं रखना था। कुल मिलाकर स्मार्ट सिटी के इस प्रोजेक्ट से जुड़े सभी जिम्मेदार मामले को टालने में जुटे हुए थे।

निगमायुक्त ने लगाई क्लास

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्टों की समीक्षा के दौरान निगमायुक्त गौड़ा के सामने यह मामला आया तो उन्होंने संबंधितों की क्लास लगाई। इसके बाद आनन फानन में कार्रवाई प्रारंभ हुई और लगभग 2 करोड़ रुपए की राशि राजसात कर ली गई है। संकेत मिले है कि इस मामले संबंधित दोषियों पर भी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए प्रकरण को लंबित रखने में कौन-कौन शामिल थे उनकी पहचान की जा रही है।