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चित्रकूट दीपावली मेले में इस बार दिखेगा नया रंग, मंदाकिनी की प्रतिमा से लेकर रामसेतु की झांकी तक होंगे खास आकर्षण

इस बार का चित्रकूट मेला खास होने जा रहा है। पहली बार मेले में दिखेगा हाट मेला जिसमें तमाम झूले होंगे आकर्षण का केन्द्र। गुप्त गोदावरी के 360 डिग्री वर्चुअल दर्शन देंगे नया अनुभव...
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सतना

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Ramashankar Sharma

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Updated: 5 Nov 2026, 9:25 AM IST

chitrakoot

सतना। आस्था, परंपरा और दीपदान के लिए देशभर में पहचान रखने वाला चित्रकूट इस बार दीपावली मेले में एक नए रंग में नजर आएगा। 6 से 10 नवंबर तक आयोजित होने वाले पांच दिवसीय मेले में श्रद्धालुओं को धार्मिक अनुभूति के साथ मनोरंजन और आधुनिक तकनीक का अनुभव भी मिलेगा। पहली बार मेले में हाट बाजार और विद्युत चलित झूलों की व्यवस्था की जा रही है। वहीं पुण्य सलिला मां मंदाकिनी की प्रतिमा, रोशनी से सजी अयोध्या की झलक, टूटे बड़े पुल पर रामसेतु की कथा और गुप्त गोदावरी के 360 डिग्री वर्चुअल दर्शन इस बार के प्रमुख आकर्षण होंगे। जिला प्रशासन ने मेले को भव्य स्वरूप देने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। घाटों से लेकर परिक्रमा पथ और प्रमुख प्रवेश मार्गों तक साज-सज्जा का काम अंतिम चरण में है। इस बार आयोजन की खासियत यह भी है कि बाढ़ से प्रभावित चित्रकूट की परिस्थितियों के बीच श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और आकर्षण को ध्यान में रखकर कई नई व्यवस्थाएं की गई हैं।

तीन एकड़ में हाट मेला, विभिन्न प्रकार के झूले

इस बार दीपावली मेले में धार्मिक गतिविधियों के साथ मनोरंजन का नया ठिकाना रजौला के पास तैयार किया जा रहा है। यहां करीब तीन एकड़ जमीन पर हाट मेले की व्यवस्था की गई है। पहली बार इतने बड़े स्तर पर लग रहे इस मेले में अस्थाई बाजार के साथ विभिन्न प्रकार के विद्युत चलित झूले लगाए जा रहे हैं। इनमें मेरी-गो-राउंड और ड्रैगन झूला प्रमुख आकर्षण होंगे। इनकी स्थापना की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।

तोरण द्वारों से सजेगा परिक्रमा पथ, रोशनी से नहाएगा चित्रकूट

दीपावली मेले को भव्य स्वरूप देने के लिए प्रमुख स्थलों और मार्गों पर आकर्षक तोरण द्वार बनाए जा रहे हैं। परिक्रमा पथ की विशेष सजावट की जा रही है। जगह-जगह विद्युत सज्जा और रोशनी की व्यवस्था की गई है। कई स्थानों पर निर्माण और साज-सज्जा का काम अभी जारी है। तैयारियां पूरी होने के बाद पूरा चित्रकूट रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगाएगा।

पहली बार मां मंदाकिनी के प्रतिमा स्वरूप में दर्शन

मंदाकिनी नदी चित्रकूट की धार्मिक पहचान और आस्था का प्रमुख केंद्र है। इसी भाव को ध्यान में रखते हुए इस बार घाट के पास पहली बार मां मंदाकिनी की प्रतिमा स्थापित की गई है। श्रद्धालु नदी के साथ अब मां मंदाकिनी के मूर्त स्वरूप का भी दर्शन और पूजन-अर्चन कर सकेंगे। प्रतिमा के सामने प्रतिदिन आरती और पूजन की गतिविधियां होंगी। दीपावली मेले के समापन के बाद प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा। भरत घाट के सामने नदी के दूसरी ओर विद्युत झालरों से अयोध्या के राम मंदिर की प्रतिकृति तैयार की गई है। इसके ऊपर प्रभु श्रीराम की भव्य प्रतिकृति भी बनाई गई है। रात में रंग-बिरंगी रोशनी के बीच यह पूरा दृश्य श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण बनेगा।

गुप्त गोदावरी गुफाएं बंद, अब 360 डिग्री वर्चुअल दर्शन

इस साल बाढ़ के बाद गुप्त गोदावरी की गुफाओं की स्थिति खतरनाक हो गई थी। सुरक्षा कारणों से यहां श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद कराया गया है। ऐसे में दूर-दराज से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को निराशा न हो, इसके लिए प्रशासन ने तकनीक का सहारा लिया है। गुप्त गोदावरी के 360 डिग्री वर्चुअल दर्शन की व्यवस्था की गई है (देखें लिंक में वर्चुअल दर्शन) तकनीक के जरिए ऐसा अनुभव देने की तैयारी है, मानो श्रद्धालु स्वयं गुफा के भीतर प्रवेश कर रहे हों।

बाढ़ में ढहा पुल, भग्नावशेषों पर उकेरी रामसेतु की कथा

इस साल की भीषण बाढ़ में चित्रकूट का बड़ा पुल ढह गया था। पुल टूटने से हुए नुकसान के बीच उसके बचे हुए हिस्सों को भी दीपावली मेले के आकर्षण से जोड़ने की कोशिश की गई है। पुल के भग्नावशेषों पर कलात्मक तरीके से रामसेतु निर्माण की पूरी कथा का चित्रण किया गया है। इस तरह बाढ़ की तबाही के निशान को धार्मिक और सांस्कृतिक प्रस्तुति का रूप दिया गया है।

मंदाकिनी में स्नान और नौका विहार के लिए सुरक्षा इंतजाम

श्रद्धालुओं की भीड़ और मंदाकिनी में स्नान व नौका विहार के दौरान सुरक्षा को लेकर इस बार अतिरिक्त व्यवस्थाएं की गई हैं। नदी में गहराई की ओर जाने से रोकने के लिए भरत घाट के सामने वाले हिस्से में फ्लोटिंग बैरियर लगाए गए हैं। नौकाओं के सुरक्षित संचालन के लिए पहली बार जेटी भी बनाई गई है।अब नौकाएं घाट की सीढ़ियों से टकराने के बजाय जेटी पर रुकेंगी। दीपदान के दौरान नौकाओं की आवाजाही से होने वाली परेशानी कम करने में भी यह व्यवस्था मददगार होगी।

पूर्वी-पश्चिमी चित्रकूट को जोड़ेंगे दो पीपा पुल

बड़े पुल के ढहने के बाद पूर्वी और पश्चिमी चित्रकूट के बीच आवागमन की समस्या खड़ी हो गई थी। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने दो पीपा पुल तैयार कराए हैं। चित्रकूट में पहली बार इस तरह के पीपा पुल बनाए गए हैं। आवागमन की सुविधा मिलने के साथ ही ये पुल भी लोगों के लिए कौतूहल का विषय बने हुए हैं।