विज्ञान और टेक्नोलॉजी

देश की पहली कृत्रिम हृदय वाल्व प्रौद्योगिकी लांच, मेक इन इंडिया के तहत हुई है पहल

मेक इन इंडिया पहल के तहत शनिवार को पहला स्वदेशी कृत्रिम एरोटिक वाल्व लांच किया गया है।
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Dec 09, 2018
heart valve
देश की पहली कृत्रिम हृदय वाल्व प्रौद्योगिकी लांच, मेक इन इंडिया के तहत हुई है पहल

नई दिल्ली। विज्ञान और प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में नित नए अविष्कार हो रहे हैं। ऐसा ही एक नई खोज हार्ट के मरीजों के लिए की गई है। देश में पहली बार कृत्रिम हृदय वाल्व प्रौद्योगिकी लांच की गई है। बता दें कि ऐसे मरीजों के लिए जिन्हें उच्च जोखिम है और वे ओपन हार्ट वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी नहीं कराना चाहते, उनके लिए वैश्विक मेडिकल डिवाइस निर्माता मेरिल लाइफ साइंसेज ने मेक इन इंडिया पहल के तहत शनिवार को पहला स्वदेशी कृत्रिम एरोटिक वाल्व लांच किया है।

ट्रांसकैथेटर एओर्टिक हार्ट वाल्व रिप्लेसमेंट (टीएवीआर) को 'मायवल' ब्रांड नाम से बेचा जाएगा। इसे लगाने के लिए किसी जटिल सर्जरी की जरूरत नहीं होगी और डॉक्टर मरीज के फेमोरल आर्टरी (ग्रोइन क्षेत्र की बड़ी धमनी, जो पेट और जांघ के बीच होता है) के माध्यम से एक कैथेटर डालकर कृत्रिम हृदय वाल्व को लगा सकेंगे। यह वाल्व को बदलने के लिए ओपन हार्ट सर्जरी जैसी पारंपरिक प्रक्रिया की जगह पर इस्तेमाल की जा सकने वाला पारंपरिक तरीका है।

इस मौके पर मेरिल लाइफ साइंसेज के उपाध्यक्ष (कार्पोरेट रणनीति) संजीव भट्ट ने कहा, कि "मेरिल दुनिया की पहली कंपनी है, जो इस थेरेपी को वाणिज्यिक रूप से देश में उपलब्ध करा रही है। इस प्रौद्योगिकी के वाणिज्यीकरण से मेरिल जल्द ही देश और दुनिया के हजारों मरीजों को अगली पीढ़ी की कनेक्टिविटी मुहैया करा सकेगी।" खास बात यह है कि अभी तक भारत में यह सुविधा नहीं होने के कारण हमारी निर्भरता दूसरे देशों पर ज्यादा थी, लेकिन अब भारत सरकार के सहयोग से शुरू हुई इस योजना से काफी लोगों को सहूलियत होगी और पहले के मुकावले इलाज भी सस्ता उपलब्ध मिल सकेगा।

Published on:
09 Dec 2018 01:23 pm