अगर मशीनों का मुकाबला करना है तो हमें खुद को मशीनों के साथ जोड़ना होगा -अरबपति एलन मस्क आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के मुखर आलोचक हैं, उनकी कंपनी ने हाल ही ऐसी चिप बनाई जो मनुष्य के दिमाग को बुद्धिमान मशीनों से जोड़ सकती है
हाल के वर्षों में एलोन मस्क कृत्रिम बुद्धि के सबसे मुखर आलोचक बनकर उभरे हैं। वे अक्सर भविष्य में मशीनों से होने वाले खतरे के बारे में चेतावनी देते रहते हैं। 48 वर्षीय अरबपति अविष्कारक मस्क ने बीते साल एक साक्षात्कार में कहा था कि भविष्य में अगर इंसान मशीनों के साम्राज्य में ग़ुलामों की तरह व्यवहार नहीं करना चाहते तो उन्हें खुद को मशीनों के साथ जोडऩा होगा।
मस्क ने कहा कि मानव को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ खुद को जोडऩा होगा इससे मशीनी बुद्धिमत्ता का मानव हिट उपयोग किया जा सकेगा। अगर इंसान ऐसेा करने में विफल रहते हें तो हम एक ऐसे अमर तनाशाह के यहां गुलामी कर रहे होंगे जिसे हमने ही बनाया होगा। लेकिन अगर हामरे पास ऐसे अरबों लोग हैं जो एक आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस एक्सटेंशन से एक हाई बैंडविड्थ लिंक से जुड़े होंगे तो यह वास्तव में हमें हाइपर-स्मार्ट बना देगा।
चिप से दिमाग को मशीन से जोड़ेंगे मस्क
हाल ही उनकी कंपनी न्यूरालिंक ने एक ऐसी चिप विकसित की है जो इंसानी दिमाग को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के साथ जोडऩे का काम करेगी। मस्क ने इसके बारे में बताते हुए कहा कि एआइ-इंफ्यूज्ड चिप इंसानी दिमाग की क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी। यह लोगों के दिमाग के लिए एक सुपर कम्प्यूटर हार्ड ड्राइव जैसी होगी। यह बहुत सूक्ष्म सतर पर इलेक्ट्रोन से न्यूट्रॉन इंटरफेस की तरह काम करेगी। उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं मशीन और इंसानी दिमाग का यह संगम उन्हें मेरुदंड की चोटों से उबरने, याददाश्त में सुधार और डिमेंशिया जैसे खतरों से भी बचाएगा।
इंसान मशीनों से तेज़ी से पिछड़ रहे है
मस्क ने कहा कि मशीनी बुद्धि के उदय के साथ ही इंसान पिछडऩे लगे हैं। मशीनें आज तेजी से अपने-आसपास की चीजों के प्रति प्रतिक्रिया करने लगी हैं। अगर ऐसा ही रहा तो एक दिन हम मशीनों के बनाए जू में कैद किए हुए वन्य जीवों की तरह होंगे जिनसे उनका प्राकृतिक आवास छीन लिया जाएगा। हम आज इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं लेकिन हमारी निर्भरता इन पर तेजी से बढ़ रही है। मस्क ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की तुलना शैतान से करते हुए कहा कि भविष्य में ये विनाश के हथियारों पर नियंत्रण कर पूरी मानव जाति को तबाह कर सकती हैं। इतना ही नहीं ये तीसरे विश्वयुद्ध का कारण भी बन सकती हैं। उन्होंने सुपर कम्प्यूटर्स को इंसान के लिए वास्तविक खतरा बताया।
2020 तक इंसानो पर चिप का परीक्षण
न्यूरालिंक की ओर दावा किया गया कि चूहों पर इसका परीक्षण सफल रहा है और साल 2020 तक वे इंसानों पर इसका परीक्षण शुरू करने जा रहे हैं। कंपनी ने कहा कि शुरुआत में इस चिप के जरिए तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारियों जैसे लकवा और अंधता का इलाज किया जा सकेगा। हालांकि अभी इसे अमरीकी खाद्य एवं औषधी नियंत्रण विभाग की मंजूरी मिलना बाकी है। मस्क ने कहा कि यह अभी शुरुआत है और वास्तविक परिणाम अभी दूर की कौड़ी है।
उन्होंने बताया कि इस चिप को सिलाई मशीन जैसे एक रोबोट के जरिए मस्तिष्क में बिठाया जाएगा जिसमें सैकड़ों इलेक्ट्रोड्स लगे होंगे। फिट होने के बाद चिप के तंतु से जानकारी कान के पीछे पहने गए ब्लूटूथ जैसे डिवाइस में स्टोर होगी। यह चिप 1500 इलेक्ट्रोड से जानकारी प्राप्त करता है। इसकी सटीकता वर्तमान में उपयोग होने वाले उपकरणों की तुलना में 15 गुना बेहतर है। कंपनी ने प्रयोग के लिए उपयोग जानवरों की 19 बार सर्जरी की इस चिप को बिठाने में। 87 फीसदी समय रोबोट ने बिना नुक्सान किए इसे दिमाग में बिल्कुल सही तरीके से लगाया। उन्होंने कहा कि इस चिप को लगाकर उनके लैब के एक बंदर ने कम्प्यूटर को कंट्रोल कर के भी दिखाया है।