विज्ञान और टेक्नोलॉजी

ततैया का जहर फेफड़े की बीमारी में है लाभकारी

ततैया या मधुमक्खियों जैसे कीटों का जहर उन अवयवों से भरपूर होता है, जो जीवाणुओं को मारते हैं।

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Dec 09, 2018
ततैया का जहर फेफड़े की बीमारी में है लाभकारी

नई दिल्ली। एमआईटी के इंजीनियरों ने नया एंटीमाइक्रोबियल पेप्टाइड्स (सूक्ष्मजीवीरोधी अम्लों की छोटी श्रंखला) विकसित की है। इससे श्वसन और अन्य संक्रमण को फैलाने वाले जीवाणुओं पर काबू पाया जा सकता है। इसे एक दक्षिण अमेरिकी ततैया द्वारा स्वाभाविक रूप से उत्पन्न होने वाले पेप्टाइड से तैयार किया गया है। ततैया या मधुमक्खियों जैसे कीटों का जहर उन अवयवों से भरपूर होता है, जो जीवाणुओं को मारते हैं। दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि इसमें से कुछ अवयव लोगों के लिए जहरीले भी होते हैं, जिस वजह से इसका एंटीबायोटिक दवाइयों के रूप में इस्तेमाल करना असंभव हो जाता है।

हालांकि चूहों पर किए गए अध्ययन में, समूह ने सामान्यत: दक्षिण अमेरिकी ततैया में पाए जाने वाले जहर पर पुन: अध्ययन किया। समूह ने पेप्टाइड के ऐसे दूसरे प्रकार बनाने की कोशिश की, जो जीवाणुओं के संक्रमण रोके और मानव कोशिकाओं के लिए जहरीला न हो। ऐसे में उन्होंने पाया कि सबसे मजबूत पेप्टाइड जीवाणु के एक प्रकार (स्यूडोमोनास एरूगिनोसा) को पूरी तरह समाप्त कर सकता है, जिससे श्वसन, मूत्र पथ संक्रमण जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

एमआईटी में एक अध्ययनकर्ता सीजर डी ला फ्यूंटे-नूनेज ने कहा, "इन पेप्टाइड की संरचना और कार्यप्रणाली का प्रणालीगत तरीके से अध्ययन करने के बाद, हम उनकी गतिविधि और गुणों का खुद के अनुकूल बनाने में सक्षम हैं।" समूह ने पेप्टाइड को जीवाणुओं के सात स्टैन (उपभेदों), कवकों में प्रयोग किया। पेप्टाइड के जहर की जांच के लिए अध्ययनकर्ताओं ने इसे प्रयोगशाला में निर्मित मानव किडनी कोशिकाओं में डाला और पाया कि कई पेप्टाइड संक्रमण को कम कर सकते हैं और इसे पूरी तरह समाप्त कर सकते हैं। वहीं फ्यूंटे-नूनेज ने कहा, "चार दिन बाद हमने देखा कि मिश्रण ने पूरी तरह से संक्रमण को समाप्त कर दिया है।" अगर यह प्रयोग पूरी तरह से सफल रहता है तो स्वास्थ्य के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित होगा।

Published on:
09 Dec 2018 12:06 pm
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