
सीहोर/आष्टा। सरकारी अस्पताल में शासन के लाख प्रयास कि बाद भी लापरवाही का ढर्रा सुधरने का नाम नहीं ले रहा है। इसकी पोल आष्टा के सिविल अस्पताल में खुल गई। मरीजों को दिए जा रहे भोजन की थाली में कीड़े (धंधूरा) तैर रहे थे। कुछ मरीजों की नजर उस पर पड़ी तो उनकी आंख फटी रह गई। इसका जमकर विरोध जताते हुए हंगामा किया। करीब आधे घंटे तक चले इस हंगामे के बाद अस्पताल प्रभारी मौके पर पहुंचे और भोजन प्रभारी को जमकर डांट फटकार लगाई। मरीज इस भोजन को खाते तो उनकी सेहत बिगड़ सकती थी।
शासन सरकारी अस्पताल की व्यवस्था सुधारने पानी की तरह रुपया बहा रहा है। दूसरी तरफ उसके ही नुमाईंदों की अनदेखी के चलते ढर्रा सुधरने की बजाए बढ़ता जा रहा है। अस्पताल में भर्ती मरीज को इलाज के साथ भोजन के लिए इधर-उधर नहीं भटकना पड़े, इसे लेकर भोजन की व्यवस्था की गई। इसके तहत मरीजों को मीनू अनुसार भोजन उपलब्ध कराना है। आष्टा के सिाविल अस्पताल में ऐसा होता नहीं दिख रहा है। इस अस्पताल में मरीजों को मीनू अनुसार भोजन मिलना तो दूर की बात, जो मिल रहा है उस पर भी कई तरह के सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। बुधवार को अस्पताल में मरीजों को भोजन दिया जा रहा था। इसी दौरान कुछ मरीजों की नजर थाली पर पड़ी तो उसमें कीड़े दिखे। जिसे लेने से मना कर दिया। मरीजों का कहना था कि इस भोजन को खाया तो उल्टा और बीमार हो जाएंगे।
नहीं मिलता मीनू अनुसार भोजन
अस्पताल में भर्ती मरीजों के मुताबिक उनको मीनू अनुसार भोजन नहीं दिया जाता है। अधिकांश पालक की सब्जी दी जाती है, उसमें भी पानी के अलावा कुछ नहीं रहता है। मजबूरी में इससे ही भूख मिटाना पड़ती है। थाली से सलाद तक गायब रहती है। जिसमें भोजन दिया जाता है वह भी नाश्ते की प्लेट रहती है। अस्पताल में भर्ती मरीज घनश्याम जांगड़ा ने बताया कि भोजन देने के नाम पर मनमानी चल रही है। मरीज भोजन की आस लगाते हैं, लेकिन वह भी ठीक तरह से नहीं दिया जाता है।
प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
अस्पताल को 11 करोड़ की लागत से बनाया है, लेकिन इसमें लापरवाही का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। जब इस तरह का भोजन दिया जा रहा था तो अस्पताल प्रबंधन ने क्यों ध्यान नहीं दिया। मरीजों के हंगामे के बाद जरूर अस्पताल प्रबंधन की नींद खुली और इसे शांत कराने भोजन प्रभारी को फटकार लगाई। जागरूक मरीज सामने नहीं आते तो शायद ऐसा ही क्या पता कब तक चलता रहता।