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एमपी के आष्टा में एक नहीं, लगातार 3 दिन तक होता है रावण दहन, 150 साल पुरानी है परंपरा

Dussehra 2026:मध्य प्रदेश के आष्टा अंचल में दशहरा सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि तीन दिन तक मनाया जाता है। इसके पीछे 150 साल पुरानी अनूठी परंपरा है।
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सीहोर

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Akash Dewani

•

Oct 20, 2026

dussehra 2026 three day ravan dahan 150 year old tradition

Three day Ravan Dahan: आष्टा में लगातार 3 दिन होता है रावण दहन (फोटो सोर्स- iStock)

Three day Ravan Dahan: दशहरा एक, लेकिन उत्सव तीन दिन का। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के आष्टा अंचल में करीब 150 साल से अधिक समय से यही परंपरा निभाई जा रही है। विजयादशमी (Dussehra 2026) पर आष्टा में 71 फीट ऊंचे रावण का दहन होता है। अगले दिन खड़ी हाट में 25 फीट और तीसरे दिन कजलास में 20 से 25 फीट के रावण का पुतला जलाया जाता है। तीनों जगह रामलीला, चल समारोह और आतिशबाजी के बीच हजारों लोग जुटते हैं।

वजह जान, रह जाएंगे हैरान!

इस अनूठी परंपरा के पीछे वजह भी दिलचस्प है। पुराने समय में मनोरंजन के साधन सीमित थे। त्योहार और रामलीला ही लोगों के मेल-मिलाप और मनोरंजन के बड़े अवसर होते थे। एक ही दिन रावण दहन होने से दूर-दराज के गांवों के लोग उत्सव में शामिल नहीं हो पाते थे। तब बुजुर्गों ने मिलकर दशहरा तीन दिन मनाने का फैसला किया। आष्टा, खड़ी हाट और कजलास को इसके लिए चुना गया। पीढ़ियां बदलीं, मनोरंजन के साधन बदले, लेकिन परंपरा नहीं बदली।

महीनेभर पहले शुरू हो जाती थी तैयारी

आष्टा के 76 वर्षीय कन्हैयालाल शर्मा बताते हैं कि पहले दशहरे की तैयारी करीब एक महीने पहले शुरू हो जाती थी। आधे लोग रावण का पुतला बनाने में जुटते, तो बाकी रामलीला के पात्रों की तैयारी करते थे। भजन मंडलियां अलग से जुटतीं और लगातार भजन गाती रहती थीं। कलाकारों के खाने-पीने की व्यवस्था स्थानीय लोग मिलकर करते थे। आयोजन का खर्च भी आपस में बांट लिया जाता था। तैयारी का यह दौर भी गांवों के लिए सामूहिक मनोरंजन और मेल-मिलाप का अवसर बन जाता था। अब पुतले और आयोजन की दूसरी तैयारियां सात से 15 दिन में पूरी कर ली जाती हैं।

हर जगह अलग उत्साह, जुटते हैं आसपास के गांव

आष्टा में पहले पुरानी सब्जी मंडी के पास रावण दहन होता था। कुछ साल पहले आयोजन स्थल बदलकर थाने के सामने नए दशहरा मैदान के पास कर दिया गया। यहां 51 फीट से शुरू हुई परंपरा में अब 61 से 71 फीट तक के पुतले जलाए जाते हैं। दहन से पहले आतिशबाजी, राम-रावण युद्ध और कलाकारों की प्रस्तुतियां होती हैं। खड़ी हाट में भी दिन में गाजे-बाजे के साथ चल समारोह निकलता है। खड़ी के रमेश वर्मा के अनुसार, यहां आसपास के 15 से अधिक गांवों के लोग दशहरा देखने पहुंचते हैं। कजलास में तीसरे दिन रामलीला मंचन के बाद रावण दहन होता है। इस तरह तीन दिन तक पूरा अंचल उत्सव के रंग में रंगा रहता है।

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