तीसरी आंख बंद, लिफ्ट का काम अधूरा, स्ट्रेचर, सीढिय़ों से मरीज पहुंच रहे थर्ड फ्लोर, जिला अस्पताल की अव्यवस्था नहीं हो रही दूर, बीमार मरीजों को भुगतना
सीहोर. बदहाल व्यवस्था से जूझ रहे जिला अस्पताल में लापरवाही का ढर्रा सुधरने का नाम नहीं ले रहा है। इसका खामियाजा इलाज कराने आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। अस्पताल में निगरानी करने लगाई तीसरी आंख बंद है तो लिफ्ट का काम अधर में अटक गया है। अन्य अव्यवस्था अलग बनी हुई है। अफसर आए इन समस्या को देखकर चले गए, लेकिन सुधार के नाम पर कुछ नहीं किया है।
जिला मुख्यालय पर मुख्य स्वास्थ्य केन्द्र होने से मरीजों की संख्या बढ़ती रहती थी। इसे देखते हुए साल २०१६ में ८ करोड़ १६ लाख ५८ हजार की लागत से ट्रामा सेंटर का निर्माण किया था। एक साल बाद २०१७ में ७ करोड ६२ लाख ८६ हजार की लागत से महिला शिशु वार्ड भी बनाया था। मरीजों को अस्पताल में नया भवन तो मिल गया, लेकिन सुविधा नसीब नहीं हो पाई है। पुराने अस्पताल की तरह ही व्यवस्था संचालित हो रही है। इसका अंदाजा पुराने पंलग और फटे गद्दों पर मरीजों का इलाज होने से लगाया जा सकता है।
एक के भरोसे, तीन लिफ्टों का काम अधूरा
ट्रामा सेंटर और महिला शिशु वार्ड में ग्राउंड फ्लोर से फस्र्ट, सेकंड फ्लोर पर जाने एक मात्र ट्रामा सेंटर की लिफ्ट चालू है। वह भी छोटी होने से गंभीर मरीजों को लाने ले जाने के काम की नहीं है। अस्पताल के पिछले हिस्से में लिफ्ट का काम चल रहा है, लेकिन वह भी अधुरा है। महिला शिशु वार्ड में २ लिफ्टों का काम अब भी पिछले कई दिनों से बंद है। इससे महिलाओं को सीढिय़ों के सहारे ही आवाजाही करना पड़ रही है। गंभीर महिलाओं को इससे सबसे ज्यादा तकलीफ भोगना पड़ रही है। दर्द से कराहते उनको दूसरी मंजिल तक पहुंचना पड़ रहा है। जिन स्ट्रेचर पर मरीज को लादकर ले जा रहे हैं, उनमें से कई अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहे हैं।
सुरक्षा की दृष्टि से लगाए कैमरे बने शोपीस
अस्पताल में सुरक्षा की दृष्टी से लाखों की लागत से कैमरे लगाए हंै। यह देखरेख के अभाव में कभी बंद तो कभी चालू होते रहते हैं। कुछ कैमरे तो अभी श्ुारू तक नहीं हुए हैं। ऐसे में कोई संदिग्ध इसका फायदा उठाकर बड़ी घटना को अंजाम दे सकता है। अफसर भी अस्पताल का औचक निरीक्षण करने पहुंचते हैं। उनकी नजर में भी यह सब है। न जाने क्यों अनदेखी की जा रही हैयह समझ से परे नजर आ रहा है। प्रतिदिन अस्पताल में सैकड़ों मरीज इलाज कराने आते हैं। जिले के अन्य अस्पताल से रेफर मरीज को भी यही लाकर भर्ती कराया जाता है। इसके अलावा भी कई समस्या बनी है।
स्ट्रेचर खराब
मरीजों को लाने ले जाने कई स्ट्रेचर खराब है। बिजली कटौती के समय जनरेटर तक की सुविधा अस्पताल में नहीं है। ऐसे में परेशानी तो होगी ही।- मुइन खां, मरीज इछावर
छा जाता है अंधेरा
जब भी बिजली जाती, अस्पताल में अंधेरा छा जाता है। दूसरा इंतजाम नहीं होने और जनरेटर खराब होने से हाल बेहाल हो जाते हैं। - दिनेश मिश्रा, मरीज सीहोर
बालक भर्ती है
बच्चा वार्ड में बालक भर्ती है। जांच व अन्य काम के लिए बार-बार बालक को लाना ले जाना पड़ता है। दोनों ही लिफ्ट अधुरी पड़ी है। -राधेश्याम गौर, परिजन सीहोर
शुरू होगी लिफ्ट
सभी कैमरे चालू और काम कर रहे हैं। एक लिफ्ट चालू, दूसरी जल्द शुरू होगी। अन्य काम जारी है। व्यवस्था को लेकर प्रयास जारी है। -सुधीर कुमार, आरएमओ जिला अस्पताल सीहोर