रात 12 बजे बाद निरीक्षण करने नहीं जाते हैं गार्ड
सीहोर. रात के समय जिला अस्पताल की सुरक्षा भगवान भरोसे चल रही है। इसका फायदा चोर बखूबी उठाने में लगे हैं। शनिवार-रविवार की रात फिर चोरों ने तीन मरीज और उनके परिजन के मोबाइल पर हाथ साफ कर दिया। सुबह जब मोबाइल गायब दिखा तो अस्पताल छान मारा, लेकिन कोई पता नहीं चल सका। जिन सुरक्षा गार्डों की ड्यूटी थी उनको भी इस वारदात की भनक तक नहीं लगी। इससे सिस्टम की पोल खुल गई है। ऐसा नहीं है कि यह पहला मामला सामने आया हो। इस तरह से आए दिन सामान आदि की चोरियां होती रहती हंै।
स्वास्थ्य सेवाओं को बहाल करने करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। उसके बावजूद व्यवस्था का ढर्रा सुधरने का नाम नहीं ले रहा है।यह तक की अस्पतालों में मरीज सुरक्षित तक नहीं है।इसकी बानगी जिला अस्पताल में आसानी से देखी जा सकती है।कहने को तो यह सबसे बड़ा अस्पताल है, लेकिन इसमें मरीजों के साथ कब घटना घट जाएं इसका कहना मुश्किल है।यहां बढ़ती चोरी की वारदातों के चलते मरीजों को भय के साए में इलाज कराने विवश होना पड़ रहा है।यह सब पिछले कई दिन से हो रहा है, उसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन इससे अंजान बना हुआ है।यही कारण है कि अस्पताल फिर से इस समय चर्चा में आ गया है।मरीजों ने बताया कि अस्पताल से हर कभी उनके सामान चोरी आदि होते रहते हैं।
वर्तमान में अस्पताल में कुल १२ गार्ड हैं।इसमें ९ पुरूष और ३ महिला है।महिला गार्ड की ड्यूटी मातृ शिशु वार्ड में तीन शिफ्ट (८-८) घंटे के हिसाब से लगाई जाती है।इसी वार्ड में दो पुरूष गार्ड की सुबह, एक दोपहर और एक की रात में ड्यूटी रहती है।
ट्रामा सेंटर की बात करें तो उसमें दो गार्ड की सुबह, दो दोपहर और एक गार्ड की रात में ड्यूटी रहती है।अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता हैकि सैकड़ों मरीजों के बीच एक-एक गार्ड वार्डो में किस तरह से निगरानी कर पाते होंगे। दिलचस्प बात यह हैकि मातृ शिशु वार्ड में २० और ट्रामा सेंटर में १७ के करीब सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं। प्रबंधन यह जरूर कह रहा है कि उनकी तरफ से २४ गार्ड की नियुक्ति करने उच्च अधिकारियों को अवगत कराया है। उसके बावजूद अब तक कुछ नहीं हो सका है।
इनका कहना है
अस्पताल में सुरक्षा गार्डो की कमी है।पिछले दिनों मोबाइल चोरी करते हुए एक लड़का पकड़ाया था।उसकी शिकायत कर पुलिस के हवाले कर दिया था।जिनका मोबाइल चोरी हुआ था बाद में समझौता होने पर छोड़ दिया था।मरीज और उनके परिजन की भी जिम्मेदारी हैकि वह अपने सामान की निगरानी करें।
सुधीर श्रीवास्तव, आरएमओ, जिला अस्पताल सीहोर