
सीहोर। जिले से महिला नेत्री से अभी तक विधानसभा में प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है। चार विधानसभा बुदनी, इछावर, आष्टा और सीहोर से अभी तक करीब दो दर्जन महिला उम्मीदवार विधानसभा का चुनाव लड़ चुकीं, लेकिन जनता ने मौका नहीं दिया है।
साल 1977 में सीहोर विधानसभा से सविता वाजपेयी को विधायक चुना लड़ा, लेकिन वह भी तीन साल ही प्रतिनिधित्व कर सकीं। तीन साल बाद 1980 में फिर से चुनाव हुए और यहां की जनता ने सुंदरलाल पटवा को विधायक चुना, जो कि मुख्यमंत्री बने। इसके अलावा चारों विधानसभा सीट में से हर बार पुरुष ही विधायक चुने गए हैं।
निर्दलीय ने मात्र डेढ़ हजार वोट से दी मात....
साल 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सीहोर से पूर्व विधायक रमेश सक्सेना की पत्नी ऊषा सक्सेना को उम्मीदवार बनाया। कांग्रेस से टिकट की दावेदारी कर रहे सुदेश राय टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़े। सीहोर की जनता से भाजपा की महिला उम्मीदवार ऊषा सक्सेना को छोड़कर निर्दलीय उम्मीदवार सुदेश राय को प्रतिनिधि चुना। हालांकि जीत का अंतर महज एक हजार 626 वोट का था।
परंपरागत सीट पाने की मशक्कत....
सीहोर जिले की चारों सीट भाजपा के खाते की मानी जाती हैं। पिछले चुनाव में सीहोर और इछावर भाजपा के खाते से निकलर सीहोर निर्दलीय और इछावर कांग्रेस के खाते में चली गई।
भाजपा इस बार दोनों सीट पर फिर से कब्जा करने की मशक्कत कर रही है। सीहोर सीट से रमेश सक्सेना तीन बार भाजपा और एक बार निर्दलीय के रूप में चुनाव जीते हैं, वहीं इछावर की जनता ने लगातार सात बार करण सिंह वर्मा को विधानसभा में प्रतिनिधित्व का मौका दिया है।
इस बार मौका मिलेगा या नहीं....
लोगों का कहना है कि चार विधानसभा बुदनी, इछावर, आष्टा और सीहोर से अभी तक करीब दो दर्जन महिला उम्मीदवार विधानसभा का चुनाव लड़ चुकीं, लेकिन जनता ने मौका नहीं दिया है। अगर इस बार पार्टियां महिला उम्मीदवारों को विधानसभा चुनाव लडवती है तो जनता इस बार मौका देती है या नहीें।