इस समय को धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जाता है, लेकिन मांगलिक कार्यों के लिए यह वर्जित रहता है। मान्यता है कि इस दौरान शादी, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य शुभ कार्य करने से सकारात्मक फल नहीं मिलते, इसलिए इन कार्यों पर रोक लगाई जाती है।
सिवनी. मलमास 17 मई से शुरु हो गया है। ऐसे में 16 मई से मांगलिक कार्यों पर ब्रेक लग गया। हिंदू पंचांग के अनुसार जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश नहीं करते, उस अवधि को मलमास या अधिक मास कहा जाता है। इस समय को धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जाता है, लेकिन मांगलिक कार्यों के लिए यह वर्जित रहता है। मान्यता है कि इस दौरान शादी, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य शुभ कार्य करने से सकारात्मक फल नहीं मिलते, इसलिए इन कार्यों पर रोक लगाई जाती है। साल 2026 में अधिक मास का आरंभ 17 मई से 15 जून तक रहेगा। इसके बाद शुद्ध ज्येष्ठ मास का शुक्ल पक्ष शुरू होगा, जो 29 जून यानी ज्येष्ठ पूर्णिमा तक चलेगा। ज्योतिषविदों के अनुसार ज्येष्ठ मास में अधिक मास का यह संयोग काफी दुर्लभ होता है और अगली बार ऐसा संयोग 2037 में देखने को मिलेगा। इस वर्ष अधिक मास के दौरान विशेष ज्योतिषीय संयोग भी बन रहे हैं। सामान्यत: एक महीने में केवल एक ही पुष्य नक्षत्र आता है, लेकिन इस बार अधिक मास में दो गुरु पुष्य योग बन रहे हैं। पहला योग मई के अंत में और दूसरा जून में पड़ेगा। यह संयोग आध्यात्मिक साधना और पूजा-पाठ के लिए बेहद शुभ माना जाता है।
भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व
मलमास को भगवान श्रीहरि विष्णु की भक्ति के लिए सर्वोत्तम समय माना जाता है। इस पूरे महीने विष्णु पूजा, व्रत और मंत्र जाप का विशेष महत्व होता है। मंत्रों का नियमित जाप करने से मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और कष्टों से मुक्ति मिलती है। सच्चे मन से की गई पूजा से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं और लंबे समय से चल रही परेशानियां भी दूर हो सकती हैं।
मांगलिक कार्यों पर लगेगी रोक
मलमास के दौरान शादी-विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और जनेऊ संस्कार जैसे मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। मान्यता है कि इस समय किए गए शुभ कार्य जीवन में बाधाएं ला सकते हैं। इसके अलावा नए व्यापार, दुकान या शोरूम की शुरुआत भी इस अवधि में टालने की सलाह दी जाती है।
दान और जाप से मिलेगा पुण्य
धार्मिक मान्यता के अनुसारए मलमास में अनाज, जल और तिल का दान करना अत्यंत फलदायी होता है। साथ ही मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। इस अवधि में तामसिक भोजन से दूर रहकर सात्विक जीवनशैली अपनाने की सलाह दी जाती है। मलमास को आत्मचिंतन और आध्यात्मिक उन्नति का समय माना जाता है। मलमास को भगवान विष्णु को महीना माना जाता है, इसलिए इस माह को पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म में मलमास के दौरान स्नान-दान और पूजा-पाठ का विशेष महत्व बताया गया है। इस माह में किए गए दान-पुण्य से व्यक्ति को पुण्यकारी लाभ मिलता है।