सूखने रखा मक्का अंदर से हो रहा अंकुरित, धान की फसल भी बर्बाद
मोहगांव. मौसम की अनिश्चितता, अत्यधिक बारिश के चलते जिले भर के किसानों को खरीफ फसलों से खासा नुकसान हुआ है। इसी के चलते जनपद पंचायत सिवनी अंतर्गत ग्राम सिमरिया, खैरी, सीलादेही, बटवानी, पलारी, नंदौरा, जमुनिया अधिकतर अन्नदाता फसल नुकसान को लेकर खासे चिंतित नजर आ रहे हैं। मक्का के साथ धान की फसल को भी हुए नुकसान ने किसानों की कमर तोड़कर कर दी है।
किसानों में हुकुमचंद सनोडिया, प्रभुदयाल सनोडिया, संजू सनोडिया, महेश रैदास, कन्हैया पटेल, देवेश सनोडिया, अशोक डहेरिया, गोपाल बघेल, बीरबल सनोडिया, राजेन्द्र सनोडिया, वेद प्रकाश सूर्यवंशी, दिलीप पटेल, राम भरोस सूर्यवंशी, महावीर प्रसाद सूर्यवंशी आदि ने बताया कि खेतों में नुकसानी से जो मक्का की फसल बची थी उसकी कटाई करके मकई तुड़वाकर सूखने के लिए खेतों व खलियान में रखे थे वह भी हाल ही में हुई बारिश व जमीन में नमी के चलते सूखी मकई के दाने नमी की चपेट में आने से अंदर ही अंदर अंकुरित होने लगे हैं। इससे किसानों को खासा नुकसान हुआ है।
इस समय में भारी बारिश के कारण मक्का जो अभी भी खेतों पर लगा है जिसकी तुड़ाई हो चुकी है जिसने गाहनी कर लिया है तीनों तरह से किसान परेशान हैं। किसान मक्का न तो सुखा पा रहा है और न ही व्यापारियों को बेच पा रहा है। इससे किसानों को चहुओर नुकसानी झेलनी पड़ रही है। अंकुरित हो रहे मक्के से किसानों को फसल से जो थोड़ा बहुत मुनाफा होने की आस थी वह भी पूरी तरह से लगभग खत्म हो गई है। मक्का सुखाने के लिए एक तो जगह की कमी हो रही है दूसरा मौसम साफ नहीं हो रहा है। तेज धूप नहीं मिल पा रही है ऊपर से हलकी बारिश होने और आसमान में बादलों के छाए रहने से किसान अपनी आंखों के सामने मक्का खराब होता देखने मजबूर है।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि कम से कम किसानों का जो फसल बीमा हुआ था वह किसानों को मिल जाए। ताकि आगे की फसल के लिए किसान अपनी तैयारी कर सके। धान भी लगभग आ चुकी है लेकिन बारिश के कारण नीचे मकई व धान सूख गई है। इससे लगभग धान को भी नुकसान हो रहा है इस समय किसान अपने आप को अकेला व ठगा सा महसूस कर रहा है