सिवनी

अब पर्यटकों को नहीं हो पाएगा पेंच की लगड़ी बाघिन का दीदार

वर्ष 2008 में जन्मी इस बाघिन की आयु लगभग 18 वर्ष थी। यह बाघिन 6 मार्च 2026 को अंतिम बार पर्यटकों को दिखाई दी थी।

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Mar 07, 2026

वृद्धावस्था के कारण हुई मौत, 10 शावकों को दिया जन्म

सिवनी. पेंच टाइगर रिजर्व की प्रसिद्ध एवं वरिष्ठतम बाघिनों में से एक लगड़ी बाघिन के नाम से मशहूर पीएन- 20(टी-20) बाघिन का दीदार अब पर्यटकों को नहीं हो सकेगा। शनिवार सुबह लगभग 10.30 बजे कर्माझिरी रेंज के बाइसन बीट अंतर्गत जोड़ा मुनारा कैम्प के पास बाघिन मृत अवस्था में पाई गई। वर्ष 2008 में जन्मी इस बाघिन की आयु लगभग 18 वर्ष थी। यह बाघिन 6 मार्च 2026 को अंतिम बार पर्यटकों को दिखाई दी थी। पेंच टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर देवप्रसाद जे. ने बताया कि बाघिन काफी समय से दीर्घ आयु होने के कारण शारीरिक रूप से कमजोर थी। बाघिन की मृत्यु वृद्धावस्था के कारण से हुई। यह पेंच टाइगर रिजर्व की सबसे अधिक आयु वाली बाघिनों में से एक थी। पीएन- 20 पेंच टाइगर रिजर्व की विश्वविख्यात ‘कॉलरवाली’ बाघिन की सहोदर बहन थी। कर्माझिरी परिक्षेत्र के लगभग 70 प्रतिशत क्षेत्र में इसका विचरण रहा है। सामने के पंजे में जन्मजात विकृति के कारण यह बाघिन हल्का लंगड़ाकर चलती थी, जिसके कारण यह पर्यटकों के बीच ‘लंगड़ी बाघिन’ के नाम से प्रसिद्ध हो गई थी।

10 शावकों को दे चुकी थी जन्म,
टी-20 बाघिन का प्रजनन इतिहास अत्यंत उल्लेखनीय रहा है। दिसंबर 2012 में प्रथम बार दो मादा शावकों को जन्म दिया। वहीं वर्ष 2016 में तीन शावक(एक नर एवं दो मादा) एवं वर्ष 2019 में चार नर शावक एवं वर्ष 2021 में एक मादा शावक को जन्म दिया, जो वर्तमान में पीएन 165 (लक्ष्मी) के नाम से कर्माझिरी परिक्षेत्र में विचरणरत है। पीएन 20 बाघिन ने अपने जीवनकाल में कुल 10 शावकों को जन्म दिया, जिन्होंने पेंच टाइगर रिजर्व एवं इसके आसपास के क्षेत्रों में अपने-अपने क्षेत्र स्थापित कर बाघों की संख्या बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। अत्यधिक आयु के कारण यह बाघिन शारीरिक रूप से कमजोर हो चुकी थी एवं स्वयं शिकार करने में भी असमर्थ थी। हालांकि, अन्य बाघों अथवा तेंदुओं द्वारा छोड़े गए शिकार एवं अन्य छोटे वन्यप्राणियों से इसे समय-समय पर भोजन प्राप्त हो रहा था। पीएन 20 बाघिन न केवल पेंच टाइगर रिजर्व की जैव विविधता का प्रतीक रही है, बल्कि बाघ संरक्षण प्रयासों की एक प्रेरणादायक मिसाल भी है।

संघर्षशील जीवन शक्ति का दिया परिचय
अत्यधिक आयु के बावजूद पीएन-20 बाघिन ने लंबे समय तक जीवित रहने की अदम्य इच्छा और संघर्षशील जीवन शक्ति का परिचय दिया। अपने जीवनकाल में इसने पेंच टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस प्रतिष्ठित बाघिन के निधन पर मुख्य वन संरक्षक, सिवनी एवं पेंच टाइगर रिजर्व प्रबंधन तथा द्वारा भावभीनी और सम्मानपूर्वक विदाई दी गई। निर्धारित गाइडलाइंस का पालन करते हुए पोस्टमार्टम एवं भस्मीकरण किया गया।

Published on:
07 Mar 2026 08:15 pm
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