तीन माह बाद खुलेंगे कोर जोन के चारो गेट
सिवनी. पेंच नेशनल पार्क में बाघ के दीदार का इंतजार कर रहे लोगों के लिए खुशखबरी है। दो दिन बाद 1 अक्टूबर को पेंच नेशनल पार्क के कोर जोन के गेट(तुरिया, कमरमाझिरी और जमतरा) खुलने जा रहे हैं। दिसंबर तक ऑनलाइन बुकिंग लगभग फुल हो चुकी है। काफी टूरिस्ट नए साल का जश्न पार्क में ही मनाने की योजना बना चुके हैं। इस बार पार्क में सैलानियों के प्रवेश के लिए किसी तरह के शुल्क में बढ़ोतरी नहीं की गई है, जिससे सैलानियों को राहत मिलेगी। प्रबंधन ने पेंच नेशनल पार्क के रास्तों को ठीक कर दिया है। वहीं बारिश में बहे पुल-पुलिया आदि का निर्माण भी हो गया है। टूरिस्टों को कोई परेशानी न हो इसके लिए भी प्रबंधन ने व्यवस्था बना ली है। पहले दिन पेंच नेशनल पार्क के कोर जोन की सैर बेटियां करेंगी। दरअसल पेंच प्रबंधन दो सालों से मध्यप्रदेश शासन की महत्वाकांक्षी योजना ‘बेटी-बचाओ, बेटी-पढ़ाओ’ को आगे बढ़ाते हुए ‘बेटी को दुनिया की सैर कराओ’ थीम पर काम कर रही है। इसके तहत पेंच नेशनल पार्क के बफर जोन के आसपास के गांव की बेटियों को अतिथि के रूप में कोर जोन की सैर का मौका दिया जाएगा। प्रबंधन ने बफर जोन के आसपास इको विकास समिति बनाई है, उन्हीं परिवारों की अधिकतर बेटियां इसमें शामिल होंगी। बेटियों को कोर जोन की सैर कराने के साथ ही उन्हें जानकारी भी दी जाएगी। इसके लिए प्रबंधन ने व्यवस्था बना ली है। कुल 21 सफारी से लगभग 140 बेटियां कोर एवं बफर जोन का सैर करेंगी। इसके बाद आम सैनानियों के घुमने के लिए गेट खोल दिया जाएगा।
बारिश में गेट कर दिया जाता है बंद
पेंच प्रबंधन बारिश के समय तीन माह(जुलाई, अगस्त, सितंबर) के लिए कोर जोन का गेट बंद कर देता है। वहीं बफर जोन खुला रहता है। इसके बाद 1 अक्टूबर को कोर जोन का गेट खोला जाता है। यह पर्यटन वर्ष की शुरुआत भी होती है। दरअसल बारिश का मौसम प्रजनन के अनुकूल रहता है। ऐसे में पेंच प्रबंधन की यह कोशिश होती है कि उनकी किसी भी गतिविधि से जीव-जन्तू प्रभावित न हो। इसके लिए गेट बंद रखा जाता है। इसके अलावा बारिश में पार्क में कच्ची सडक़ भी प्रभावित हो जाती है। बारिश् में जंगल में टूरिस्टों के फंसने का डर रहता है। इन सब वजहों से तीन माह के लिए कोर जोन बंद रखा जाता है।
तीन समय होता है बाघों का दीदार
पेंच प्रबंधन ने कोर जोन में टूरिस्टों के सैर के लिए तीन समय निर्धारित कर रखा है। सुबह, दोपहर एवं शाम। वहीं बफर जोन में सुबह एवं दोपहर को टूरिस्ट करते हैं। बफर जोन में आमतौर पर बाघों का दीदार कम होता है। जबकि कोर जोन संरक्षित क्षेत्र है। इस जोन में किसी के भी आने-जाने पर पाबंदी रहती है। जबकि बफर जोन में ग्रामीण आते-जाते हैं। पेंच प्रबंधन ने सुबह, दोपहर एवं शाम के लिए 99 सफारी की व्यवस्था कर रखी है। जिससे पर्यटकों को टाइगर सफारी कराई जाती है। इनका किराया निर्धारित है। हालांकि छुट्टी के दिनों में किराए में बढ़ोतरी भी होती रहती है।
123 बाघों से गुलजार है पार्क
पेंच नेशनल पार्क में हर वर्ष काफी संख्या में देशी-विदेशी सैलानी आते हैं और बाघ का दीदार करते हैं। साल दर साल यहां बाघों की संख्या में भी बढ़ोतरी हो रही है। वर्ष 2022 में हुए गणना के अनुसार पेंच नेशनल पार्क में 77 बाघ टाइकर रिजर्व के अंदर है। वहीं 123 बाघ पेंच नेशनल पार्क का उपयोग करते हैं। यानी आते-जाते रहते हैं। बाघ सैलानियों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र हैं। वहीं 175 तेंदुआ हैं। इसके अलावा जंगली बिल्ली, भेडिय़ा, जंगली कुत्ता, शियार, हिरन, चीतल, काला हिरन, नेंवला सहित अन्य जीव-जन्तू हैं। 10 हाथी से पेंच नेशनल पार्क की पेट्रोलिंग की जाती है। वहीं हाल ही में एक नवजात हाथी का जन्म हुआ है। जिससे संख्या अब 11 हो चुकी है। पेंच नेशनल पार्क अपनी जैव विविधता के लिए अब पूरे देश में पहचाना जाने लगा है।
देश-विदेश में भी है लोकप्रिय
रूडयार्ड किपलिंग की विश्व प्रसिद्ध कृति द जंगल बुक जिले के वन क्षेत्र के आधार पर लिखी गई थी। उसका मुख्य पात्र मोगली से जुड़ा होने के कारण यह पार्क देश के अलावा विदेश में भी काफी प्रसिद्ध है। खासकर बच्चों को यहां पाए जाने वाले बघीरा, शेरखान जैसे चरित्र पार्क की ओर बुलाते हैं।
सैनालियों को न हो कोई रूकावट
मानसून में तीन माह के लिए पार्क बंद रहता है। एक अक्टूबर को कोर एरिया के गेट खोलने के पूर्व भीतर के कच्चे रास्ते कई जगह बारिश से खराब हो चुके होते हैं। गेट खोले जाने के पहले हर साल इन रास्तों को दुरुस्त करने की कवायद की जाती है। पार्क प्रबंधन इन दिनों इन रास्तों की मरम्मत करा रहा है। इसके साथ ही कोर एरिया के भीतर जगह-जगह ऊंचाई तक बढ़ गई घास को भी काटा जा रहा है। ज्यादा घास होने से सैलानियों को टाइगर आदि वन्य जीवों के दीदार में अवरोध खड़ा होता है।
325 से अधिक पक्षियों की प्रजाति
पेंच नेशनल पार्क बाघों के लिए भले जाना जाता हो लेकिन यह यहां पर जैव विविधता काफी है। यहां पर 325 से अधिक पक्षियों की प्रजातियां, 90 स्तनपाई जीव प्रजातियां, 13 प्रकार के उभयचर और अन्य जीव मिलते हैं। 125 तिललियों की प्रजातियां, इसके अलावा यहां पर 1300 से अधिक पौधों की प्रजातियां पाई जाती हैं। विविधता पूर्ण इको सिस्टम होने के कारण पार्क पर्यावरण विदों को भी आकर्षित करता है।
इनका कहना है
मध्यप्रदेश शासन की महत्वाकांक्षी योजना बेटी-बचाओ, बेटी-पढ़ाओ को आगे बढ़ाते हुए बेटी को दुनिया की सैर कराओ थीम पर काम कर पेंच प्रबंधन काम कर रही है। एक अक्टूबर से पेंच नेशनल पार्क के कोर एरिया में टाइगर सफारी प्रारंभ की जा रही है। इसकी तैयारी पूरी हो चुकी है। पहले दिन बेटियों को अतिथि के रूप में सैर कराया जाएगा।
रजनीश कुमार सिंह, डिप्टी डायरेक्टर, पेंच नेशनल पार्क