सिवनी. पेंच टाइगर रिजर्व एवं सामान्य वन मंडल क्षेत्र से सटे गांव और खेतों में बिना मुंडेर के बने कुएं में गिरकर आए दिन बाघ एवं तेंदुओं की मौत हो रही है। इसके बावजूद भी जिम्मेदार खुले एवं असुरक्षित कुओं को लेकर इंतजाम नहीं कर पा रहे हैं। बता दें कि बीते 24 जनवरी की […]
सिवनी. पेंच टाइगर रिजर्व एवं सामान्य वन मंडल क्षेत्र से सटे गांव और खेतों में बिना मुंडेर के बने कुएं में गिरकर आए दिन बाघ एवं तेंदुओं की मौत हो रही है। इसके बावजूद भी जिम्मेदार खुले एवं असुरक्षित कुओं को लेकर इंतजाम नहीं कर पा रहे हैं। बता दें कि बीते 24 जनवरी की रात दक्षिण सामान्य वनमंडल के कुरई वन परिक्षेत्र के कुड़वा वन कक्ष क्रमांक आरएफ 300 से लगे खेत में बने बिना मुंडेर के कुएं में तेंदुआ के गिरने से उसकी मौत हो गई थी। 25 जनवरी की सुबह खेत मालिक व क्षेत्रवासियों ने कुएं के पानी में तेंदुआ का शव उतारा देखकर वन अधिकारियों को इसकी सूचना दी, जिसके बाद अधिकारी मौके पर पहुंचे। इस घटना ने एक बार फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल ऐसा पहली बार नहीं है जब कोई बाघ या तेंदुआ की कुएं में गिरकर मौत हुई है। इससे पहले भी जानवरों एवं इंसानों के कुएं में गिरने की घटना कई बार हो चुकी है। जबकि स्पष्ट निर्देश हैं कि कुएं को ढककर रखा जाए। इसके बावजूद भी लोग अपनी मनमानी पर उतारू हैं। वन क्षेत्र में खेत और गांव के आसपास के खुले कुएं में लगातार हादसे हो रहे हैं। कई अलग-अलग इलाकों में वन्यजीवों के कुएं में गिरने की घटनाएं हो रही हैं, लेकिन विभागीय अधिकारी कुएं को जाली लगवाने या मुंडेर ऊंची करवाने के लिए गंभीर नहीं है। जबकि विभाग के पास इस काम के लिए राशि भी उपलब्ध है।
रेस्क्यू कर बचाई थी जान
4 फरवरी 2025 को कुरई के ग्राम हरदुआ में शिकार करते हुए सूअर के साथ एक बाघिन कुएं में गिर गई थी। हालांकि गनीमत रही कि रेस्क्यू से बाघिन एवं जंगली सूअर दोनों को समय रहते बचा लिया गया।
बीते कुछ दिनों में कुएं में गिरने की घटना
बीते 7 मई 2025 को कुंभपानी बफर परिक्षेत्र में पानी में डूबने से मादा बाघ की मौत हो गई थी। वहीं 2 अप्रेल 2025 को घाटकोहका बफर क्षेत्र के परासपानी में कुएं में डूबने से तेंदुआ की मौत हो गई थी। वहीं 21 फरवरी 2025 को सिवनी परिक्षेत्र में पानी में डूबने से दो तेंदुआ की मौत हो गई थी। वहीं 20 दिसंबर 2024 में खवासा रेंज के अंतर्गत एक गांव के पास खुलेकुएं में बाघिन मृत पाई गई थी। जिस कुएं में घटना हुई थी वह बिना मुंडेर का था। कुएं के ऊपरी हिस्से में घास उग आने से कुआं दिखाई नहीं दिया। कुएं की दीवार पर बाघ के पंजे के निशान भी मिले थे। बाघ ने गिरने के बाद कुएं से बाहर निकलने का प्रयास किया था। हालांकि वह निकल नहीं पाया और थकने के कारण पानी में डूब गया।
इनका कहना है…
सीएसआर के अंतर्गत बफर क्षेत्र के सटे गांवों में 62 कुएं में मुंडेर बनाकर जाली लगवाई गई थी। इससे काफी हद तक घटनाएं रूक गई हैं। जैसे-जैसे बजट आ रहा है वैसे-वैसे मुंडेर बनवाए जा रहे हैं।
अनिल सोनी, एसडीओ, पेंच टाइगर रिजर्व, सिवनी