
शहडोल। आदिवासी परिवार के होनहार बच्चों को प्रतियोगी परीक्षा के लिये तैयार करने का बीड़ा सरकार ने उठाया है। जिसके लिये कोचिंग संस्थान संचालित कर जेईई एवं एनआईटी जैसी प्रतियोगी परीक्षा के लिये तैयार किया जाता है। लगभग दो वर्ष से अधिक समय से चल रही इस योजना के क्रियान्वयन को लेकर विभागीय अमले द्वारा विशेष रुचित दिखाई जा रही है। इस वर्ष विभाग ने शहरी के साथ ग्रामीण अंचलो के विद्यालयों में अध्ययनरत प्रतिभावान छात्रों का कोचिंग के लिये चयन करने का निर्णय लिया है। कोचिंग के लिये जिन छात्रों का चयन किया जायेगा वह अर्धवार्षिक परीक्षा के परिणाम के आधार पर किया जायेगा। जिससे कि ऐसे छात्रों का चयन किया जा सके जिनकी पढ़ाई के प्रति विशेष रुचि हो।
परीक्षा के बाद तैयार होगी सूची
आदिवासी विकास विभाग की माने तो इस वर्ष जेईई व एनआईटी की कोचिंग के लिये फिलहाल छात्रों का चयन नही किया गया है। इसके लिये छमाही परीक्षा का इंतजार किया जा रहा है। छात्रों की सूची २२ से २४ दिसम्बर के बीच तैयार की जायेगी। जिसमें ऐसे छात्रों का चयन किया जायेगा जिनके कि छमाही परीक्षा में संतोष जनक परिणाम होंगे। इस सूची में कक्षा १२ वीं के छात्रों का चयन किया जाना है। जिसमें गणित संकाय के ५० व विज्ञान संकाय के ५० छात्र चयनित किये जायेंगे।
यहां हो रही परेशानी
हालांकि आदिवासी परिवार के बच्चों के लिये संचालित की जा रही यह योजना भी समस्याओं से घिरी हुई है। बताया जा रहा है कि इसके लिये न तो कोई शैक्षणिक संस्थान ही नीयत है और न ही कोचिंग में अपनी सेवा देने वालों के लिये कोई मानदेय की व्यवस्था है। इस सत्र में भी गल्र्स हायर सेकेण्ड्री स्कूल में ही कोचिंग सेंटर बनाये जाने की कार्ययोजना बनाई जा रही है। वहीं तैयारी कराने वालों के लिये भी ऐसा कोई विशेष प्रावधान नही बनाया गया है।
इनका कहना है
शहरी के साथ ग्रामीण अंचलो के विद्यालयों से छात्रों का चयन किया जाना है। छमाही परीक्षा के बाद ही छात्रों की सूची तैयार की जायेगी। फिलहाल गल्र्स हायर सेकेण्ड्री में कोचिंग संस्थान बनाने की तैयारी चल रही है।
नरोत्तर बरकड़े, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग