शहडोल

यहां की जाती है दलदल की पूजा, लोगों की जुड़ी है आस्था

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Updated: 6 Apr 2018, 5:27 PM IST
Worship of the swamps, the people's belief

मंडला - अलग-अलग मान्यताओं और रीति-रिवाजों की पूर्ति के लिए यहां कई तरह से पूजा और आराधना की जाती है और देवों को प्रसन्न किया जाता है। भक्तों की जिससे भी आस्था जुड़ी होती है, पूरे मन से वो पूजा अर्चना करते हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है जबलपुर से लगे हुए मंडला जिले में स्थित एक मंदिर की, जहां भक्त भारी तादाद में पहुंचते हैं, और दलदल की पूजा करते हैं, मन्नतें मांगते हैं, और ऐसा लोगों का मानना है कि यहां मांगी गई हर मुराद पूरी भी होती है। इसे लोग दलदली माता मंदिर के नाम से भी जानते हैं।

यहां है मंदिर
दलदली माता का मंदिर मंडला जिले के नैनपुर तहसील के अंतर्गत जेवनारा ग्राम पंचायत में है, जहां दूर-दूर से भक्त अपनी मनोकामनाओं को लेकर पहुंचते हैं, और दलदली माता के नाम से मशहूर इस स्थल में पूजा अर्चना करते हैं।

इसलिए की जाती है दलदल की पूजा
दलदली माता मंदिर में भक्तों को अटूट विश्वास है। ऐसा माना जाता है कि दलदल की पूजा रोगों को दूर करने और संतान सुख के लिए की जाती है। यहां एक छोटे से तालाब में काफी मटमैला पानी भरा हुआ है। जहां बड़ी संख्या में लोग अपने कष्टों को निदान करने के लिए पूजा अर्चना करते हैं। इस चमत्कारी मंदिर के सामने की अधिकांश भूमि में दलदल है, जिस पर पानी भरा रहता है। यहां के पुराने लोगों का दावा है कि दलदली माता इसी स्थान से प्रकट हुई हैं, इसलिए इस सिद्ध स्थान का नाम दलदली माता रखा गया है।

ऐसी मान्यता है कि जिनके बच्चे नहीं होते वो पहले मंदिर के सामने दलदल में भरे पानी की पूजा करते हैं, और फिर उसके बाद मंदिर के बाजू में पालने के सामने बैठकर संतान प्राप्ति की मन्नत मांगते हैं।

मन्नत पूरी होने पर दंपति अपनी संतान के साथ पहुंचते हैं और चमत्कार करने वाली संतानदायनी दलदली माता पर प्रसाद अर्पण करते हैं। लोगों का ये भी मानना है कि दलदल के ऊपर भरा पानी भी चमत्कारी है, और इस पानी को पीने से सभी शारीरिक रोग दूर हो जाते हैं।

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