Kuno National Park news: चीता केएपी-2 गत अप्रेल माह में कूनो से निकलकर कोटा जिले के इटावा क्षेत्र में पहुंचा और फिर वहां से निकलकर...। यहां पढ़ें विस्तार से...।
Kuno National Park news: कूनो नेशनल पार्क से निकलकर पिछले 23 दिन से राजस्थान के रणथंभौर टाइगर रिजर्व में डेरा डाले चीता केएपी-2 (नया नाम केएपी-12) को शुक्रवार की सुबह ट्रैंक्युलाइज कर वापस लाया गया। रणथंभौर के वन अमले की मदद से कूनो के विशेषज्ञों और चिकित्सकों की टीम ने शुक्रवार की सुबह फलौदी रेंज के काला कुआं क्षेत्र में चीते का रेस्क्यू किया। चीते को लेकर कूनो की टीम सुबह साढ़े 9 बजे रणथंभौर से रवाना हुई और सुबह साढ़े 11 बजे के आसपास चीता को वापस कूनो के खुले जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया गया।
उल्लेखनीय है कि चीता केएपी-2 गत अप्रेल माह में कूनो से निकलकर कोटा जिले के इटावा क्षेत्र में पहुंचा और फिर वहां से निकलकर सवाईमाधोपुर जिले की सीमा में रणथंभौर टाइगर रिजर्व में पहुंच गया। पिछले 23 दिन से ये फलौदी रैंज के जंगल में ही डेरा डाले हुए था। हालांकि कूनो की ट्रैकिंग टीम और रणथंभौर की स्थानीय टीम निगरानी में जुटी थी, लेकिन कूनो प्रबंधन ने चीते को वापस लाने का निर्णय लिया। यही वजह है कि शुक्रवार की अल सुबह से ही चीता प्रोजेक्ट के डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा के नेतृत्व में डीएफओ कूनो आर थिरुकुराल के साथ रेस्क्यू टीम चीते की लोकेशन पर पहुंची और लगभग डेढ़ घंटे में ट्रैंक्युलाइज कर वापस ले आए।
चीता केएपी-2 केा राजस्थान के रेस्क्यू कर पहली बार नहीं लाया गया है, बल्कि 43 दिन में ये दूसरी बार मौका है, जब उसे रेस्क्यू कर वापस कूनो लाया गया है। इससे पहले 27 मार्च 2026 को चीता केएपी-2 को राजस्थान के कोटा जिले की सीमा में ईटावा क्षेत्र के निमोदा उजाड़ गांव के पास से ट्रैंक्युलाइज किया और बॉक्स में सुरक्षित वापस लाया गया। इसके बाद कूनो के खुले जंगल में ही छोड़ दिया गया था। लेकिन वापस आने के कुछ दिन बाद ही केएपी-2 ने फिर राजस्थान का रुख कर लिया और अप्रेल के तीसरे सप्ताह में फिर ये सवाईमाधोपुर जा पहुंचा।
-अप्रैल माह में मध्यप्रदेश की सीमा को छोड़ राजस्थान में चले गया था चीता
-8 मई को फारेस्ट की टीम ने रणथंभौर से पकड़ लिया
-फलौदी रैंज के जंगल में चीता ने डेरा डाला था
-चीता को ट्रैंक्युलाइज कर सुरक्षित श्योपुर लाया गया
चीते केएपी-12 को रेस्क्यू कर वापस ला गया है। पिछले कुछ दिनों में ये मानव-बहुल क्षेत्र में चला गया था। चीते और स्थानीय आबादी दोनों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रेस्क्यू करने का निर्णय लिया गया। इसमें राजस्थान के वन विभाग का पूरा समर्थन मिला है।
-उत्तम कुमार शर्मा, डायरेक्टर, चीता प्रोजेक्टर कूनो नेशनल पार्क