सीधी

जानिए घरेलू नुस्खे से कैसे हो सकता है साइटिका का उपचार

डॉ.रूचि शुक्ला ने बताए कम लागत में उपचार के बेहतर उपाय, ग्रामीण क्षेत्र में अधिकांश लोग है रोग से ग्रसित

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May 26, 2019
sidhi news

सीधी। ढलती उम्र एवं काम के बोझ के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश लोग साइटिका की बीमारी से ग्रसित हो रहे है। किंतु आर्थिक अभाव के कारण उनका समुचित उपचार नही हो पाता, जबकि घरेलू नुस्खे से उक्त रोग का आसानी से उपचार हो सकता हैं।

डॉ.रूचि शुक्ला ने बताया कि यह बीमारी से रीढ़ से निकलने वाली स्पाइनल नर्व से मिलकर बनती है। यह पैर की मांसपेशियो को कंट्रोल करती है एवं पैरो में होने वाले दर्द तापमान और प्रतिक्रियाओं की जानकारी इस्पाइनल कार्ड तक पहुंचाती है।

जब स्पाइनल नर्व पर किसी भी तरह का दबाव होता है तो कमर में दर्द होता है, जिसके कारण पैरो से लेकर कमर तक तीव्र वेदना होती है, जिसे साइटिका कहते है। आयुर्वेद शात्रो के अनुसार यह एक वात व्याधि रोग है, वात दोष के असंतुलन के कारण कटि शूल होता है, आयुर्वेद में इस रोग को गृघ्रसी कहते हैं, क्योंकि इस रोग से ग्रसित व्यक्ति की चाल गिद्ध के समान हो जाती है ।

साइटिका रोग होने का प्रमुख कारण
डॉ.रूचि शुक्ला ने बताया कि साइटिका इन कारणों से होता है जिसमें लबर हर्निएटेड डिस्क, स्पोंडिलोसिस, डीजेनरेटीव डिजीज, पिरिफोर्मिस सिंड्रोम, लम्बर स्पाइनल स्टेनोसिस, सैक्रोइलिअक ज्वाइंट डिसफं क्शन, प्रेगनेंसी, घाव का निशान, मांसपेशियों में तनाव, स्पाइनल ट्यूमर, कमर में संक्रमण, लंबर वेर्टेब्रा में फैक्चर, कई घंटो तक बैठ कर कार्य करना आदि शामिल हैं। इसके लक्षण कमर में दर्द, पांव के पंजे में वीकनेस और दर्द, पैर के अंगूठे और उंगलियो का मुड़ा होना, पेशाब एवं मल त्याग करने में तकलीफ, पैरों और पंजों का संवेदी प्रतिक्रिया की अनुभूति की क्षमता की आंशिक या पूर्ण हानि हो जाती है, रोगी को बेचैनी सुई चुभने जैसा दर्द होता है।

रोग का कैसे करें उपचार एवं बचाव
रोग उग्र होने पर रोगी को संपूर्ण विश्राम कराना चाहिए, फि जियोथेरेपी चिकित्सा लेनी चाहिए जिससे मांसपेशियां सक्रिय होती है, पंचकर्म चिकित्सा में नाड़ी स्वेद कटि बस्ती एवं बस्ती लेने पर संपूर्ण रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है, लहसुन किसी भी प्रकार केसूजन में इसकी 4 कली कच्ची सुबह अथवा 4 कली शाम को 200 ग्राम दूध में उबाल कर ठंडा होने पर सेवन करने पर लाभ होता है। मेथी इसमें फास्फेट फोलिक एसिड जिंक कॉपर आदि न्यूट्रिएंट होते हैं। एक चम्मच मेथी दाना सुबह में लेने पर लाभ होता है। हरसिंगार पारिजात के पत्ते 250 ग्राम 1 लीटर पानी में उबालकर ठंडा होने पर 1-2 रत्ती केसर मिला कर रोज सुबह-शाम एक कप पीने पर विशेष लाभ होता है। नियमित व्ययाम करने से मसल मजबूत बनते हैं, इसके लिए भुजंगासन, बज्रासन, मत्यासन, व्युमुद्रासन आदि रोगी को करना चाहिए और साइटिका के लिए लगातार अधिक समय तक काम न कर आराम करें, आगे झुकने पर परहेज करना चाहिए और भारी सामान नही उठाना चाहिए, गर्म पानी से सिकाई करनी चाहिए, कुर्सी शौंचालय का उपयोग करना चाहिए।

Updated on:
27 May 2019 12:20 pm
Published on:
26 May 2019 09:56 pm
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