
सीकर. मेडिकल कॉलेज के अधीन जिले के सबसे बडे कल्याण अस्पताल का 78 वां शिलान्यास समारोह शनिवार को मनाया गया। आजादी से पहले बने इस अस्पताल का निर्माण पांच साल, पांच माह और पांच दिन में पूरा हुआ। 6 मार्च 1943 को जयपुर के तत्कालीन प्रधानमंत्री सर मिर्जा इस्माइल ने अस्पताल भवन की नींव रखी थी। एसके अस्पताल के पीछे नेत्र चिकित्सालय भवन है, जिसका शिलान्यास मुख्य भवन के लोकार्पण के छह साल बाद हुआ था। यह भवन तैयार हो जाने पर 15 नवंबर 1964 में तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने इसका शुभारंभ किया। एसके अस्पताल में सबसे पहले डीएमएचओ डॉ. केडी शर्मा और चिकित्सक के रूप में डॉ. जयशंकर लुहानी को लगाया गया। इसके बाद समय-समय पर एसके अस्पताल में कई परिवर्तन हुए। स्टाफ बढ़ा। भवन ने विस्तार पाया और चिकित्सा सुविधाओं में भी इजाफा हुआ। इसका नतीजा है कि इस समय सवा सौ से ज्यादा चिकित्सक और 325 से ज्यादा नर्सिंग कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। अस्तपाल में सीकर, चूरू, झुंझुनूं और नागौर जिले के मरीज आते हैं।
ट्रेन से लाए थे पत्थर और पटिट्यांइतिहासकार महावीर पुरोहित ने बताया कि एसके अस्पताल के निर्माण के लिए पत्थर और पट्टियां ट्रेन से सीकर आए थे। निर्माण के समय उस समय मजदूर की 50 पैसा और मिस्त्री की एक रुपया प्रतिदिन की मजदूरी थी। अस्पताल बनाने के लिए सीकर के राजकोष से 2 लाख 70 हजार रुपए खर्च किए गए थे। इसके अलावा सेठ साहूकारों ने भी चंदा दिया था। अस्पताल के शिलान्यास समारोह में पंडित आनंदी लाल और रघुवीर शास्त्री ने पूजा अर्चना करवाई थी। 10 अगस्त 1948 को एसके अस्पताल भवन जनता को समर्पित किया था। राज्य सरकार ने जुलाई 1954 से एसके अस्पताल का विधिवत शुभारंभ किया था।