
मलसीसर (झुंझुनूं).
वर्ष 1991 में फिल्म आई थी साजन। फिल्म में सलमान खान और माधुरी दीक्षित का एक गाना था 'देखा है पहली बार साजन की आंखों में प्यार , अब जाके आया मेरे बेचैन दिल को करार'। करार मतलब आराम। हम उस आराम की बात नहीं कर रहे जो इस गाने में प्रेमी जोड़े के लिए इस्तेमाल किया गया है बल्कि बता रहे हैं एक ऐसे मासूम बच्चे की दर्दभरी दास्तां जो जन्म के कई साल बाद खुशी में बदल गई।
दरअसल, ये स्टोरी है राजस्थान के झुंझुनूं जिले के मलसीसर उपखण्ड के गांव हरिपुरा निवासी महेन्द्र कुमार के परिवार की। चार साल पहले महेन्द्र के बेटा पैदा हुआ। नाम रखा कुशांत। कुशांत अक्सर गुमसुम रहता था। ना हंसता ना खेलता। यूं मानों कि कुशांत का मन किसी ना किसी वजह से अशांत सा रहता था।
धीरे-धीरे परिजनों ने कुशांत की गतिविधियों पर गौर करना शुरू किया। उसे चिकित्सक को दिखाया। पता चला कि दिल में छेद है, जो जानलेवा है। घरवालों ने बेटे की सलामती के लिए खूब मंदिर देवरे धोके। इलाज भी करवाया, मगर कुशांत के ना कोई दवा लगी ना ही कोई दुआ काम आई।
इलाज में गरीबी आई आड़े
महेन्द्र के परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। फिर भी वह अपने बेटे के दिल के छेद का इलाज करवाने का हर संभव प्रयास किया। चिकित्सकों को दिखाता रहा। आखिर में जवाब मिला कि जयपुर या दिल्ली के किसी बड़े में लाखों खर्च कर कुशांत का ऑपरेशन करवाना होगा, मगर ऑपरेशन करवा पाना मजदूर महेन्द्र के बस की बात नहीं थी।
आंगनबाड़ी केन्द्र से मिली राह
-महेन्द्र अपने बेटे का इलाज तो नहीं करवाया पाया, मगर उसका दाखिला गांव के आंगनबाड़ी केन्द्र में करवाया दिया।
-उस दिन कुशांत की जिंदगी में सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट आया जब राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य की टीम गांव बास हरिपुरा की आंगनबाड़ी में पहुंची।
-वहां बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया तभी टीम को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने बताया कि कुशान्त के दिल में छेद है।
-टीम ने कुशान्त को इलाज के लिए चिन्हित किया गया, इसके बाद टीम ने कुशान्त को इलाज के लिए झुंझुनूं जिला मुख्यालय स्थित भगवान दास खेतान (बीडीके) अस्पताल के लिए रैफर कर दिया गया।
-बीडीके अस्पताल में कुशान्त की जांच की गई। यहां से कुशान्त के लिए जयपुर के नारायणा ह्रदयाल अस्पताल में रैफर किया गया।
-जयपुर के नारायणा ह्रदयाल अस्पताल में 29 मार्च 2018 को कुशान्त के दिल का सफल ऑपरेशन हुआ।
फिर खेलता मिला कुशांत
जब सात दिन बाद ब्लॉक सीएमएचओ डॉ. मनोज डूडी व स्वास्थ्य विभाग की टीम के सदस्य डॉ. विकास सोलंकी, डॉ. समीर खान व नर्सिंग स्टाफ अजय कुमार व महिला स्वास्थ्य कार्यकत्र्ता प्रमोद के साथ फॉलोअप लेने गए तो पाया कि कुशान्त अपने साथ के बच्चों के साथ खेल रहा है, और वह आज पूरी तरह से स्वस्थ हो चुका है।
इनका कहना है...
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत राजकीय विद्यालय, आंगनबाड़ी केन्द्र व पंजीकृत मदरसों में बच्चों की स्क्रीनिंग की जाती है एवं इनमे पाये गये चार विकार (4 डी) डिफेक्ट फॉर्म बर्थ, डेफिशियेंसी, डीजीजेज एन्ड डवलपमेंट डीले वाले बच्चों का मिशन के तहत नि: शुल्क उपचार व ऑपरेशन करवाये जाते है।
-डॉ मनोज डूडी बीसीएमओ, मलसीसर, झुंझुनूं