सीकर

Rajasthan Panchayat Election: पंचायत चुनाव लड़ने के लिए  ASI सुल्तान सिंह ने छोड़ी पुलिस की नौकरी, अब राजनीति में आज़माएंगे भाग्य

सीकर के रानोली थाने में तैनात ASI सुल्तान सिंह बराल ने जिला परिषद चुनाव लड़ने के लिए छोड़ी खाकी। जानिए 10 साल की नौकरी छोड़कर राजनीति में उतरने की पूरी कहानी।
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Oct 16, 2026
siikar asi sultan singh baral resigns for zila parishad election
ASI सुल्तान सिंह- तब और अब! (AI PIC)

राजस्थान के सीकर जिले में पंचायती राज चुनावों की सरगर्मी के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पुलिस महकमे से लेकर आम जनता तक सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। दरअसल, सीकर के रानोली थाने में सहायक उपनिरीक्षक (ASI) के पद पर सेवाएं दे रहे सुल्तान सिंह बराल ने जिला परिषद का चुनाव लड़ने के लिए अपनी खाकी वर्दी और पुलिस की नौकरी को अलविदा कह दिया है। सुल्तान सिंह बराल अब आगामी जिला परिषद चुनाव में वार्ड नंबर 40 से बतौर उम्मीदवार अपनी चुनावी किस्मत आजमाने जा रहे हैं। एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी द्वारा अपनी नौकरी के पूरे 10 साल बाकी रहते हुए इस तरह राजनीति में कदम रखने का फैसला चर्चा का विषय बन गया है।

जानकारी के अनुसार, गुरुवार को सुल्तान सिंह बराल ने सीकर जिला पुलिस अधीक्षक संजीव नैन के समक्ष स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) यानी वीआरएस के लिए अपना आवेदन सौंपा था। मामले की गंभीरता और प्रशासनिक प्रक्रिया को देखते हुए पुलिस विभाग ने उसी शाम उनका वीआरएस मंजूर भी कर लिया। दिलचस्प बात यह है कि इन दिनों शारदीय नवरात्र का पावन पर्व चल रहा है और सीकर के प्रसिद्ध जीणमाता मेले में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए उनकी ड्यूटी लगाई गई थी। मेले की व्यस्त ड्यूटी के बीच अचानक नौकरी छोड़ने के उनके इस निर्णय ने हर किसी को चौंका दिया है।

राजनीतिक पारिवारिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखते हैं सुल्तान सिंह

पुलिस सेवा छोड़कर सीधे ग्रामीण लोकतंत्र की चौपाल पर उतरने वाले सुल्तान सिंह बराल का परिवार पहले से ही स्थानीय राजनीति और समाज सेवा से जुड़ा रहा है। उनके घर में राजनीति का पुराना माहौल रहा है, जिसके चलते उनका झुकाव अब जनप्रतिनिधि बनकर जनता की सेवा करने की ओर हुआ है।

सुल्तान सिंह के पिता भागीरथमल ग्रामीण इलाके की ग्राम पंचायत जुराठड़ा में वार्ड पंच के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इसके अलावा उनके परिवार की राजनीतिक सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनका छोटा भाई भी पहले वार्ड पंच रह चुका है और पूर्व में सरपंच का चुनाव भी लड़ चुका है। राजनीतिक परिवार की पृष्ठभूमि होने के कारण सुल्तान सिंह के लिए ग्रामीण मतदाताओं के बीच अपनी पैठ बनाना और चुनाव प्रचार करना काफी सहज माना जा रहा है।

नवरात्र और मेला ड्यूटी के बीच अचानक लिया गया बड़ा फैसला

एक तरफ जहां पुलिसकर्मी मेलों और त्योहारों के दौरान अपनी ड्यूटी को पूरी मुस्तैदी से निभाने में जुटे रहते हैं, वहीं सीकर के रानोली थाने में तैनात ASI सुल्तान सिंह बराल ने नवरात्र के दौरान जीणमाता मेले की भारी भीड़ और सुरक्षा प्रबंधों के बीच प्रशासनिक सेवा से हटने का कड़ा कदम उठाया।

ग्रामीण इलाकों में चर्चा है कि जिला परिषद के वार्ड नंबर 40 से चुनाव लड़ने की उनकी तैयारी लंबे समय से चल रही थी, लेकिन चुनाव की तारीखों और नामांकन प्रक्रिया के नजदीक आते ही उन्होंने बिना किसी देरी के अपने पद से त्यागपत्र देने का निर्णय लिया। वीआरएस मंजूर होते ही उन्होंने अपने चुनावी अभियान की तैयारियां भी तेज कर दी हैं।

जिला परिषद वार्ड 40 का मुकाबला हुआ दिलचस्प

सुल्तान सिंह बराल के पुलिस सेवा छोड़कर मैदान में उतरने से वार्ड नंबर 40 का राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गया है। एक पुलिस अधिकारी के रूप में लंबा प्रशासनिक अनुभव होने के कारण उन्हें क्षेत्र की कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक कामकाज और आम जनता की समस्याओं की गहरी समझ है।

अब देखना यह होगा कि खाकी वर्दी उतारकर सीधे जनता के बीच पहुंचे सुल्तान सिंह बराल को ग्रामीण मतदाता कितना समर्थन देते हैं। उनके इस साहसिक और अचानक लिए गए फैसले के बाद से सीकर जिले के राजनीतिक गलियारों में बैठकों और चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है, और हर कोई यही कह रहा है कि इस बार का जिला परिषद चुनाव बेहद रोमांचक होने वाला है।

Updated on:
16 Oct 2026 10:44 am
Published on:
16 Oct 2026 10:44 am